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पटाखों पर लगा प्रतिबंध, जानिए 9000 करोड़ के पटाखा कारोबार पर क्या पड़ेगा असर

Mon, 09 Nov 2020 01:59 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Mon, 09 Nov 2020 01:59 PM IST
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ban on crackers know about 9000 crores cracker business in India which employes 5 Lakh People
पटाखों पर लगा प्रतिबंध - फोटो : pixabay

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली-एनसीआर में नौ नवंबर से 30 नवंबर तक पटाखा जलाने पर संपूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं अन्य राज्यों के लिए एनजीटी ने कहा है कि जहां पर वायु गुणवत्ता अच्छी है, वहां पर दिवाली के दिन ग्रीन पटाखे जलाए जा सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि अवैध रूप से पटाखा बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें। 

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ऐसे में दिवाली से पहले पटाखों की बिक्री और उनके जलाने पर राज्यों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से व्यापार से जुड़े लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। तमिलनाडु के शिवाकाशी में इसको लेकर गंभीर चिंता है क्योंकि देश में बिकने वाले 80 फीसदी पटाखे शिवाकाशी में ही बनते हैं। मालूम हो कि पटाखा कारोबार से करीब पांच लाख लोगों को रोजगार मिलता है। 
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देश में कितना है पटाखों का कारोबार?
ऑल इंडिया फायरवर्क्स एसोसिएशन के मुताबिक शिवाकाशी में 1070 कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। अकेले शिवाकाशी में ही गतवर्ष में 6000 करोड़ का कारोबार हुआ था। जबकि देश में पटाखे का लगभग 9000 करोड़ का कारोबार है। शिवाकाशी में पटाखा कारोबार से प्रत्यक्ष रूप से तीन लाख लोग  जुड़े हैं। जबकि कुल पांच लाख लोगों को इससे रोजगार मिलता है।
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कितना होता है पटाखों का आयात?
पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सैफ्टी ऑर्गेनाइजेशन ने एक्सप्लोसिव्स रूल्स 2008 के तहत फायरवर्क्स के आयात के लिए कोई लाइसेंस नहीं दिया है। लेकिन देश में गैर कानूनी तरीके से करीब 30 फीसदी पटाखा चीन से आता है। दरअसल भारतीय पटाखों की तुलना में चीनी पटाखे 30 से 40 फीसदी सस्ते होते हैं और साथ ही आसानी से फटते हैं। यही चीनी पटाखों के पसंद किए जाने की वजह है। 


इस साल कितने महंगे होंगे पटाखे?
इस साल देश में पटाखों की कीमत 10 से 15 फीसदी ज्यादा होगी। इसका मुख्य कारण चीनी पटाखों के देश में आने पर कड़ी पाबंदी है। इसके साथ ही अब पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है क्योंकि इनके जलने से 40 से 50 फीसदी कम प्रदूषण होता है, जिसकी वजह से पटाखों की कीमत बढ़ेगी। ग्रीन पटाखों की लागत तुल्नात्मक रूप से अधिक होती है। 

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