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Power Consumption: भारत में बिजली खपत लगभग 8 प्रतिशत बढ़ी, आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत

Sun, 08 Oct 2023 12:48 PM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 08 Oct 2023 12:48 PM IST
सार

वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर, 2023) में भारत की बिजली खपत लगभग 8 प्रतिशत बढ़ी है। सरकारी संस्था की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल पहले छह महीने में 847 बिलियन यूनिट बिजली खपत हुई है। 

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april to sept power consumption 847 billion units sign of increasing economic activities
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की इकोनॉमी लगातार बढ़ रही है। सरकार का दावा है कि आने वाले दिनों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसी बीच एक और उत्साह बढ़ाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में देशभर में बिजली खपत लगभग आठ प्रतिशत बढ़ी है। अप्रैल से सितंबर की अवधि में भारत में लगभग 847 बिलियन यूनिट (बीयू) बिजली खपत हुई। सरकार के अनुसार, बिजली खपत का बढ़ना देश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी को दिखाता है।
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10 फीसद से अभी अधिक हो सकती थी डिमांड
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2022 के दौरान बिजली की खपत 786 बिलियन यूनिट्स थी। इस साल 61 बीयू अधिक बिजली की खपत हुई। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल, मई और जून में भारत के बड़े हिस्से में बेमौसम बारिश हुई। इससे बिजली की खपत पर सीधा असर पड़ा। बारिश के प्रभाव पर विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बिजली खपत की वृद्धि दोहरे अंक में जाने की आशंका भी थी, यानी खपत 10 फीसद से अधिक भी बढ़ सकती थी।
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पंखे, कूलर और एसी ने छुड़ाए पसीने!
औद्योगिक जगत की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने वाले जानकारों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया, असामान्य रूप से उच्च आर्द्रता स्तर के कारण अगस्त में बिजली की मांग के साथ-साथ खपत में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने के कारण बिजली की खपत तेजी से बढ़ी। ये भी रोचक है कि बिजली की डिमांड बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का दबाव भी बढ़ा। इस अवधि में कई राज्यों में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 500 से 1000 रुपये से अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ा। कॉमर्शियल यूनिट में बिल और भी अधिक आए।
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पिछले साल की तुलना में कितनी डिमांड बढ़ी
जानकारों का मानना है कि अगस्त और सितंबर में बिजली की खपत बढ़ी, मुख्य रूप से आर्द्र मौसमऔर त्योहारी सीजन से पहले औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ी, नतीजतन बिजली से चलने वाले उद्योगों के सीधे असर के कारण बिजली की खपत बढ़ी। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अप्रैल-सितंबर 2023 के दौरान बिजली की अधिकतम मांग 241 गीगावॉट के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक जा पहुंची। पिछले साल इसी अवधि में यानी वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही में बिजली की अधिकतम डिमांड 215.88 गीगावॉट थी।

सरकार का अनुमान और कुल बिजली खपत का अंतर
बिजली मंत्रालय ने अनुमान लगाया था कि गर्मियों के दौरान देश की बिजली की मांग 229 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी। हालांकि, बेमौसम बारिश के कारण अप्रैल-जुलाई में मांग अनुमानित स्तर तक नहीं पहुंची। बिजली की अधिकतम मांग जून में 224.1 गीगावॉट की नई ऊंचाई तक जा पहुंची।

सितंबर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर बिजली की डिमांड
जुलाई में बिजली की डिमांड गिरकर 209.03 गीगावॉट पर आ गई। अगस्त में अधिकतम बिजली की मांग 238.19 गीगावॉट तक पहुंच गई। देशभर में बिजली की डिमांड इस साल सितंबर में लगभग 240 गीगावॉट की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गई।

कोयले पर अहम फैसला, बिजली उत्पादन के लिए धारा 11 लागू
गौरतलब है कि 2023 में गर्मी के मौसम के दौरान देश में 229 गीगावॉट की उच्च बिजली मांग की आशंका को देखते हुए, मंत्रालय ने कटौती से बचने के लिए कई कदम भी उठाए थे। मंत्रालय ने देश में बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयातित कोयले से संचालित सभी संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने का फैसला लिया था। इसके लिए बिजली अधिनियम 2023 की धारा 11 लागू की गई थी।

24 घंटे बिजली सप्लाई का लक्ष्य, सरकार के बड़े फैसले
इसके अलावा, मंत्रालय ने सूखे ईंधन की किल्लत से बचने के लिए घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को भी मिश्रण का निर्देश दिया है। मिश्रण के लिए कोयले का आयात करना भी अनिवार्य बनाया गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि इन उपायों से देश में कोयले का आयात भले ही बढ़ गया हो, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए देश में चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है।


भारत में बिजली उत्पादन पर CEA की रिपोर्ट
अगस्त, 2023 के लिए जारी केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 424 गीगावॉट की बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित की है। इसमें 206 गीगावॉट कोयला आधारित, 47 गीगावॉट बड़े पनबिजली और लगभग 132 गीगावॉट नवीकरणीय (सौर, पवन ऊर्जा) शामिल हैं।
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