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Amartya Sen: 'चुनावी बॉण्ड रद्द करने से अधिक पारदर्शिता आएगी', नोबेल विजेता अमर्त्य सेन ये बोले

Mon, 26 Feb 2024 01:38 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 26 Feb 2024 01:38 PM IST
सार

Amartya Sen: सेन ने अमेरिका के मैसाचुसेट्स से ‘पीटीआई-भाषा’ से बात की और कहा कि इस कदम से चुनाव के संदर्भ में लोगों के बीच अधिक पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा, ‘‘चुनावी बॉण्ड एक घोटाला था और मुझे खुशी है कि अब उसे हटा दिया गया है। मुझे उम्मीद है कि लोग चुनाव के संदर्भ में एक-दूसरे को जो समर्थन देते हैं, उसमें अधिक पारदर्शिता आएगी।’’

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Annulling of electoral bonds will lead to greater transparency: Amartya Sen
प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमृत्य सेन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द करने के उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले का सोमवार को स्वागत किया और इस योजना को घोटाला बताकर इसकी निंदा की।

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सेन ने अमेरिका के मैसाचुसेट्स से ‘पीटीआई-भाषा’ से बात की और कहा कि इस कदम से चुनाव के संदर्भ में लोगों के बीच अधिक पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा, ‘‘चुनावी बॉण्ड एक घोटाला था और मुझे खुशी है कि अब उसे हटा दिया गया है। मुझे उम्मीद है कि लोग चुनाव के संदर्भ में एक-दूसरे को जो समर्थन देते हैं, उसमें अधिक पारदर्शिता आएगी।’’
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उच्चतम न्यायालय ने इस महीने की शुरुआत में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राजनीति के वित्तपोषण के लिए लाई गई चुनावी बॉण्ड योजना को ‘‘असंवैधानिक’’ करार देते हुए निरस्त कर दिया था और चंदा देने वालों, बॉण्ड के मूल्यों और उनके प्राप्तकर्ताओं की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
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प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने 2018 की इस योजना को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सूचना के संवैधानिक अधिकारों का “उल्लंघन” बताया। शीर्ष अदालत केंद्र की इस दलील से सहमत नहीं थी कि इस योजना का उद्देश्य राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाना और काले धन पर अंकुश लगाना था।

लोकसभा चुनाव से पहले आए इस फैसले में न्यायालय ने इस योजना को तत्काल बंद करने तथा इस योजना के लिए अधिकृत वित्तीय संस्थान ‘भारतीय स्टेट बैंक’ (एसबीआई) को 12 अप्रैल, 2019 से अब तक खरीदे गए चुनावी बॉण्ड का विस्तृत ब्योरा छह मार्च तक निर्वाचन आयोग को सौंपने का भी निर्देश दिया।

सेन ने कहा, ‘‘भारत में चुनावी प्रणाली दलगत राजनीति की प्रकृति से काफी प्रभावित है, जिससे आम लोगों के लिए यह सुनना बहुत कठिन हो जाता है कि उन्हें चुनाव में भाग लेना चाहिए।’’ अर्थशास्त्री ने कहा कि देश की चुनावी प्रणाली इस बात से प्रभावित होती है कि सरकार विपक्षी दलों के साथ कैसा व्यवहार करती है।


उन्होंने कहा, ‘‘यह विपक्षी दलों और उन लोगों के साथ व्यवहार से प्रभावित होती है जिन्हें सरकार प्रतिबंधों के तहत रखना चाहती है। हम नागरिकों की अभिव्यक्ति और कार्य करने की स्वतंत्रता के अलावा यथासंभव स्वतंत्र चुनावी प्रणाली चाहते हैं।’’ सेन ने जोर देकर कहा, ‘‘भारतीय संविधान सभी नागरिकों को पर्याप्त राजनीतिक स्वतंत्रता देना चाहता है और वह यह नहीं चाहता कि किसी विशेष समुदाय को विशेषाधिकार मिले।’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द करने के न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि यह पारदर्शिता के लिए एक बड़ी जीत है।

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