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आम्रपाली समूह ने निवेशकों के पैसे से खरीदे 5.88 करोड़ के गोल्ड बार

Thu, 25 Jul 2019 08:03 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 25 Jul 2019 08:03 PM IST
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amrapali directors purchased gold bar for personal use from home buyers money
- फोटो : अमर उजाला

रियल इस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कराए गए फॉरेंसिंक ऑडिट में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में आम्रपाली समूह के निदेशकों का एक और घपला सामने आया है। निवेशकों के पैसे से कंपनी के निदेशकों ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए 5.88 करोड़ रुपये के गोल्ड बार खरीदे थे। 

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कंपनी की बैलेंसशीट में जिक्र

मनीकंट्रोल.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की बैलेंसशीट में इस खरीदारी का जिक्र किया गया है। लेकिन ऑडिटर्स ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन गोल्ड बार की खरीद को त्योहारी खर्च के तौर पर दर्शाया गया है। ऑडिटर्स का मानना है कि गोल्ड बार्स को निदेशकों ने अपने निजी प्रयोग के लिए रख लिया और कर्मचारियों को नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन पैसों की वसूली कंपनी की जाए।

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इस ज्वैलर्स से खरीदे बार

कंपनी ने नोएडा में स्थित ज्वैलर याशिका डायमंड से इन गोल्ड बार को खरीदा था। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के मुताबिक यशिका डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनय गर्ग, हिमांशु गर्ग, रजनी गर्ग और यश गर्ग हैं। यह कंपनी 20 मार्च, 2002 को बनाई गई थी। इसका ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल तीन करोड़ रुपये है, वहीं पेड-अप कैपिटल 2.74 करोड़ रुपये है।

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पैसों के बदले मिला 11 हजार वर्ग फीट का विला

ऑडिटर्स के मुताबिक 05 फरवरी 2018 को आम्रपाली ने याशिका डायमंड के निदेशक विनय गर्ग को आम्रपाली ड्रीम वैली प्रोजेक्ट में 11 हजार वर्ग फीट का एक विला बदले में दे दिया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस विला को जब्त कर लिया गया है। 

हो रही थी बेनामी रजिस्ट्री

रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए फंड्स को डमी कंपनीज, फर्जी बिल और अपार्टमेंट्स के दाम गिराकर डायवर्ट कर रही थी। 2015-16 के दौरान जब सुप्रीम कोर्ट में केस चल ही रहा था, तभी ग्रुप ने आपराधिक मंशा के साथ संपत्तियों का हस्तांतरण शुरू कर दिया था। ग्रुप के फंड को एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर किया जा रहा था और संपत्तियों की बेनामी रजिस्ट्री कराई जा रही थी।

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