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ट्रंप के दबाव में भारत सरकार ने बंद की निर्यातकों की प्रोत्साहन राशि

Sat, 24 Aug 2019 11:18 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 24 Aug 2019 11:18 AM IST
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amid pressure from usa administration, government cuts promotion of handicraft industries

मंदी की मार झेल रहे मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को बड़ा झटका लगा है। डीजीएफटी (डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड) ने अपनी साइट से एमईआईएस (फोकस) लाइसेंस के कॉलम को हटा लिया है। इसके तहत निर्यातकों को एक्सपोर्ट पर पांच से सात फीसदी तक की प्रोत्साहन राशि केंद्र सरकार से मिलती थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इसे खत्म करने के लिए लगातार डब्ल्यूटीओ पर दबाव बना रहे थे। सरकार के इस कदम से मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा।

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ईपीसीएच के पूर्व चेयरमैन सतपाल का कहना है कि सरकार की पूर्व घोषित आयात-निर्यात नीति के मुताबिक मार्च 2020 तक निर्यातकों को एमईआईएस लाइेंस मिलना था। लेकिन विश्व  व्यापार संगठन के दबाव में सरकार ने इसे बिना किसी पूर्व सूचना के वापस ले लिया है। 
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सतपाल के मुताबिक इसे खत्म करने का पता निर्यातकों को तब चला जब उन्होंने जुलाई के  निर्यात पर एमईआईएस क्लेम करने के लिए डीजीएफटी की साइट पर आवेदन करना चाहा।  एमईआईएस के लिए ऑनलाइन की आवेदन होता था। निर्यातकों को डीजीएफटी की साइट पर  काफी ढूंढने के बाद भी एमईआईएस के आवेदन का कॉलम नजर नहीं आया।
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ईपीसीएच के पूर्व  चेयरमैन ने बताया कि जब उन्होंने इस बाबत वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों से बात की तो  पता चला कि एक अगस्त को ही एमईआईएस को डीजीएफटी साइट से हटा लिया गया है। अब  निर्यातकों को एमईआईएस नहीं मिलेगा। इसके बजाए सरकार दूसरी योजना लाने की तैयारी कर  रही है। 

अभी तक पीतल, एल्युमीनियम और कांच से बने उत्पादों के निर्यात पर केंद्र सरकार  कुल निर्यात का सात फीसदी प्रोत्साहन राशि और लकड़ी व लोहे से बने उत्पादों के निर्यात  पर कुल निर्यात का पांच प्रतिशत रकम प्रोत्साहन राशि के रूप में बतौर एमईआईएस लाइसेंस  देती थी। पूर्व चेयरमैन का कहना है कि मुरादाबाद से सालाना करीब 8000 करोड़ रुपये का  निर्यात होता है। एमईआईएस लाइसेंस खत्म होने से निर्यातकों को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

फरवरी के कारोबारी आदेशों पर बड़ा नुकसान

निर्यातकों को कारोबारी आदेश मुख्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय मेलों से मिलते हैं।  देश में हस्तशिल्प के लिए ईपीसीएच साल में दो बार इंटरनेशनल फेयर का आयोजन करता है।  ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में फरवरी और अक्तूबर में दिल्ली फेयर का आयोजन  होता है।



इसमें दुनिया के करीब 125 देशों के खरीददार हिस्सा लेते हैं। अभी निर्यातक जो उत्पाद बनाकर निर्यात कर रहे हैं उनके ऑर्डर फरवरी फेयर में मिले थे। निर्यातकों का  कहना है कि यदि सरकार यह साफ कर देती थी कि एमईआईएस लाइसेंस को बीच में खत्म कर दिया जाएगा तो वह अपने उत्पादों के दाम बढ़ाकर कारोबार करते। निर्यातक कारोबार करते  समय एमईआईएस और ड्रा बैक को मुनाफे के तौर पर जोड़कर उत्पादों के दाम तय करते हैं। अक्तूबर तक होने वाले निर्यात पर निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

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