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अमेरिका-चीन: कर्ज डिफॉल्ट का संकट, पूरे विश्व के वित्तीय सिस्टम पर होगा असर
Sat, 02 Oct 2021 04:31 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Sat, 02 Oct 2021 04:31 PM IST
सार
अमेरिका कर्ज पर डिफॉल्ट करने की स्थिति में पहुंच गया है। एक अगस्त को अमेरिका ने 28.48 लाख करोड़ डॉलर के डेट लिमिट को पिर से लागू किया था।
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America China
- फोटो : America China
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विस्तार
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका पहली बार अपने कर्ज पर डिफॉल्ट करने की स्थिति में पहुंच गया है। एक अगस्त को दुनिया के सबसे ताकतवर देश ने 28.48 लाख करोड़ डॉलर का डेट लिमिट को दोबारा लागू किया था। ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन उस वक्त से देश के वित्त पर नजर रख रही हैं। साथ ही इमरजेंसी एकाउंटिंग मानक अपना रही हैं। इसे एक्स्ट्राऑर्डिनरी मेजर्स कहा जाता है।
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पूरे विश्व के वित्तीय सिस्टम पर होगा असर
इन कदमों से सरकार कर्ज की सीमा तोड़े बिना अतिरिक्त लोन लेती रहती है। इस संदर्भ में विशेषज्ञों ने कहा कि दुनिया के दो ताकतवर देशों, अमेरिका और चीन के इस संकट से पूरे विश्व के वित्तीय सिस्टम पर प्रभाव पड़ सकता है। मामले में गोल्ड मैन सेक्स के विश्लेषकों ने कहा कि चीन में 8.2 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज डिफॉल्ट होने की आशंका बढ़ गई है। चीनी सरकार अपने वित्तीय चक्र के जरिए यह लोन लेकर विकास के काम कर रही हैं। इसे वापस करना मुश्किल हो रहा है।
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येलेन ने दी राजनेताओं को चेतावनी
वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने राजनेताओं को चेतावनी दी है कि अगर कांग्रेस कर्ज की सीमा को बढ़ाने में असफल रहती है, तो अमेरिका की सरकार 18 अक्तूबर तक इन एक्स्ट्राऑर्डिनरी मेंजर्स के जरिए जुटाई जाने वाली राशि की प्रक्रिया से हाथ धो बैठेगी। येलेन ने अमेरिकी कांग्रेस को एक पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि, 'अमेरिका के पास बहुत सीमित संसाधन बचे हैं और वह भी बहुत तेजी से खत्म हो रहे हैं।' फिलहाल यह साफ नहीं है कि 18 अक्तूबर के बाद देश की जरूरतों के हिसाब से पैसे की व्यवस्था कर पाएंगे या नहीं।
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मालूम हो कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध से अमेरिका में निवेश बढ़ाने में कोई मदद नहीं मिली। इसके तहत अमेरिका में जो कदम उठाए गए, उनकी वजह से अमेरिकी कंपनियों ने चीन में अपना कारोबार बंद नहीं किया, न ही उन्होंने अमेरिका में अपना निवेश बढ़ाया। ये बात दो अनुसंधानकर्ताओं- सामंथा वॉर्तेर्म्स और जियाकुल जैक झांग ने अपने अध्ययन के आधार पर कही है। उनकी अध्ययन रिपोर्ट एसएसआरएन वेब प्लैटफॉर्म पर प्रकाशित हुआ है।