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जंग का आर्थिक हथियार: 'होर्मुज से कोई जहाज नहीं गुजरेगा...', यूरोपियन यूनियन का दावा- ईरान भेज रहा ऐसे संदेश

Sat, 28 Feb 2026 08:40 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Sat, 28 Feb 2026 08:40 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराने लगा है। कई तेल कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से ईंधन आपूर्ति रोक दी है। दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए हालात बिगड़ने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। आइए जानते हैं कि इस जंग के बीच जलडमरूमध्य क्यों बना चिंता का केंद्र।

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होर्मुज जलडमरूमध्य - फोटो : amarujala.com

विस्तार

पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में आया नया उबाल वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए खतरे की घंटी बन गया है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के सैन्य और शीर्ष नेतृत्व के ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में प्रमुख युद्ध अभियानों की घोषणा कर दी है, जिसके बाद ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। इस सैन्य टकराव के बीच दुनिया भर की निगाहें होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिक गई हैं, जिसके बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का खतरा पैदा हो गया है। होर्मुज को तनाव की स्थिति में ईरान का आखिरी आर्थिक हथियार माना जाता है। आइए समझते हैं कि यह पूरा संकट क्या है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा।

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तेल कंपनियों ने अचानक शिपमेंट क्यों रोकी?

रिपोर्टों के अनुसार, कई बड़ी तेल और ट्रेडिंग कंपनियों ने सुरक्षा जोखिम बढ़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से ईंधन और कच्चे तेल की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है। एक प्रमुख ट्रेडिंग कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनके जहाज फिलहाल कुछ दिनों तक आगे नहीं बढ़ेंगे। यह फैसला संभावित हमलों और समुद्री सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है।

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रेडियो पर जहाजों को ईरान की ओर से क्या संदेश मिल रहे?

यूरोपीय संघ के नौसैनिक मिशन एस्पाइड्स के एक अधिकारी ने शनिवार को कहा कि क्षेत्र में संचालित जहाजों को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से वीएचएफ रेडियो संदेश मिल रहे हैं, जिसमें चेतावनी दी गई है कि किसी भी जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं है। अधिकारी के अनुसार तेहरान ने अभी तक इस तरह का कोई आदेश जारी करने की औपचारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि अगर इस्लामी गणराज्य पर हमला होता है तो वह संकरे जलमार्ग को बंद कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है? इससे नीचे दिए गए तथ्यों से समझिए।

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  • होर्मुज जलडमरूमध्य अरब प्रायद्वीप और ईरान के बीच स्थित दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है।
  • हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और अन्य ईंधन इसी रास्ते से वैश्विक बाजार तक पहुंचता है।
  • यदि यहां आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है तो तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है और यह ऊर्जा बाजार के लिए इतना अहम क्यों है?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार पर स्थित एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है, जो उत्तर में ईरान और दक्षिण में संयुक्त अरब अमीरात व ओमान के बीच स्थित है। यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार की एक जीवन रेखा है, क्योंकि दुनिया का लगभग एक-चौथाई समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है। ईरान इस रास्ते को किसी भी तनाव की स्थिति में अपने रणनीतिक आर्थिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। क्योंकि-

  • सऊदी अरब, ईरान, यूएई, कुवैत और इराक जैसे ओपेक (ओपीईसी) सदस्य एशियाई बाजारों तक पहुंचने के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। 
  • कतर भी अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के निर्यात के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करता है।

खाड़ी क्षेत्र क्यों माना जाता है वैश्विक आर्थिक केंद्र?

  • खाड़ी देश अंतरराष्ट्रीय निवेश और वित्तीय गतिविधियों के बड़े केंद्र हैं।
  • यहां दुनिया भर से लाखों प्रवासी कामगार काम करते हैं।
  • बड़े व्यापारिक शहर और ऊर्जा बाजार इसी क्षेत्र में केंद्रित हैं।
  • वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से गुजरता है।
  • किसी भी सैन्य तनाव का असर सीधे विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर होगा?

केप्लर लिमिटेड के विश्लेषकों के अनुसार, यदि ईरान केवल एक दिन के लिए भी इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। तुलनात्मक रूप से, इस साल 20 फरवरी तक वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 66 डॉलर प्रति बैरल था। इस मार्ग के लंबे समय तक बंद रहने से ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आएगा, मुद्रास्फीति बढ़ेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगेगा।

क्या ईरान के लिए इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करना संभव है?

ईरान के लिए इसे पूरी तरह बंद करना इतना आसान नहीं है। हालांकि ईरान ने अतीत में धमकियां दी हैं, लेकिन उसने कभी इसे पूरी तरह से बंद नहीं किया है क्योंकि इससे पश्चिमी नौसेनाओं की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा:

  • ईरान खुद भी अपने तेल निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है, इसलिए इसे बंद करने से उसकी अपनी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। 
  • इससे चीन के साथ उसके संबंध खराब हो सकते हैं, जो ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और संयुक्त राष्ट्र में उसका एक अहम सहयोगी है। 
  • हालांकि, ईरान छोटी गश्ती नौकाओं, समुद्री बारूदी सुरंगों, ड्रोन हमलों या इलेक्ट्रॉनिक (जीपीएस) हस्तक्षेप के जरिए इस मार्ग पर व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा जरूर पैदा कर सकता है।

क्या यह भू-राजनीतिक बदलाव की शुरुआत हो सकती है?

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने से सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन भी बदल सकता है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति, निवेश प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हालात शांत होंगे तो दुनिया की आर्थिक और रणनीतिक व्यवस्था किस रूप में सामने आएगी।

भारत के लिए यह संकट कितनी बड़ी चिंता का विषय है?

यह भू-राजनीतिक संकट भारत के लिए एक सीधा आर्थिक खतरा है। भारत अपनी कच्चे तेल की मांग का लगभग 90% हिस्सा आयात करता है। भारत की 40% कच्चे तेल की खरीद मध्य पूर्वी देशों (इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत) से होती है और इसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से ही होकर आता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत पहले ही रूस से तेल आयात कम कर रहा है, इसलिए यदि होर्मुज मार्ग बाधित होता है, तो रूस से आयात बढ़ाना एक आसान विकल्प नहीं होगा।

बाजार और निवेशकों में क्यों बढ़ी बेचैनी?

तेल आपूर्ति रुकने की आशंका से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ऊर्जा कीमतों में संभावित उछाल से परिवहन, उद्योग और व्यापार पर असर पड़ सकता है। निवेशक स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है।

प्रवासी आबादी और व्यापार पर क्या असर?

खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था बड़ी संख्या में विदेशी कामगारों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर आधारित है। यदि तनाव बढ़ता है तो लोगों की आवाजाही, व्यापारिक गतिविधियां और निवेश परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे वैश्विक श्रम बाजार और वित्तीय प्रवाह पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

मौजूदा स्थिति को कई विशेषज्ञ संभावित वैश्विक बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। यदि ऊर्जा मार्ग सुरक्षित नहीं रहते तो दुनिया वैकल्पिक सप्लाई चेन और नए रणनीतिक गठबंधन तलाश सकती है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि क्या तनाव जल्द कम होगा या यह संकट वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को नई दिशा देगा।

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