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अमेजन-फ्यूचर विवाद : सुप्रीम कोर्ट आज सुना सकता है फैसला, रिलायंस से करार का है मामला
Fri, 06 Aug 2021 01:46 AM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 06 Aug 2021 01:46 AM IST
सार
अमेजन व फ्यूचर समूह के बीच चल रहे कानूनी विवाद को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकती है। इससे तय होगा कि मामले में सिंगापुर की मध्यस्थता पंचाट का फैसला वैध है या नहीं और क्या इसे भारत में लागू किया जा सकता है?
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेजन-फ्यूचर-रिलायंस मामले में सर्वोच्च न्यायालय शुक्रवार को निर्णय सुना सकता है। इस फैसले से तय होगा कि सिंगापुर स्थित मध्यस्थता पंचाट का फैसला वैध है? क्या इसे भारत में लागू किया जा सकता है? सिंगापुर की मध्यस्थता कोर्ट ने फ्यूचर रिटेल लि. के रिलायंस रिटेल में विलय पर रोक लगा रखी है।
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Supreme Court on Friday will deliver its judgement in Amazon-Future-Reliance case & will decide whether Singapore's Emergency Arbitrator Award restraining Future Retail Ltd from going ahead with its merger deal with Reliance Retail is valid under Indian law &if it can be enforced pic.twitter.com/ayNOpwK55H
— ANI (@ANI) August 5, 2021विज्ञापन
फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) और रिलायंस रिटेल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। शीर्ष अदालत इस बात का फैसला लेगी कि सिंगापुर के आपातकालीन पंचाट का फ्यूचर रिटेल लिमिटेड को रिलायंस रिटेल के साथ 24,713 करोड़ रुपये के विलय सौदे से रोकने का फैसला भारतीय कानून के हिसाब से वैध है या नहीं।
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भारत के एंटीट्रस्ट रेगुलेटर ने लगाया अमेरिकी कंपनी पर आरोप
शीर्ष अदालत ने अधिग्रहण के इस सौदे के खिलाफ अमेजन की याचिका पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। मालूम हो कि हाल ही में भारत के एंटीट्रस्ट रेगुलेटर ने अमेरिकी कंपनी पर आरोप लगाया था कि जब कंपनी ने फ्यूचर ग्रुप में 2019 के निवेश के लिए मंजूरी मांगी थी, तो उसने तथ्यों को छिपाया। साथ ही गलत जानकारी देने का आरोप भी लगाया है।
जानिए पूरा मामला
साल 2019 में अमेजन ने फ्यूचर समूह की गिफ्ट वाउचर इकाई में 49 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 1920 लाख डॉलर का भुगतान किया था। मामले में अमेजन का कहना है कि इस सौदे की शर्तें फ्यूचर समूह को फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के कारोबार को रिलायंस को बेचने से रोकती हैं।
उच्चतम न्यायालय ने 22 फरवरी को अपने अंतरिम आदेश में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से विलय पर अंतिम आदेश पारित नहीं करने को कहा था। फ्यूचर समूह ने रिलायंस के साथ 24,713 करोड़ रुपये के सौदे के लिए नियामकीय मंजूरियों को न्यायाधिकरण का रुख किया था। वहीं अमेजन ने दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आठ फरवरी को एकल जज के एफआरएल तथा विभिन्न सांविधिक निकायों को इस सौदे पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश पर रोक लगा दी थी। अमेरिका की ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ने कहा था कि सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (एसआईएसी) का ईए फैसला लागू करने योग्य है।