Smart Investor: 'स्मार्ट इन्वेस्टर' सीरीज का पहला वेबिनार आयोजित, ईएलएसएस में लंबी अवधि का निवेश फायदे का सौदा
अमर उजाला और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ ने संयुक्त रूप से एक श्रृंखला शुरू की है, जो उद्योग के विशेषज्ञों के साथ 'स्मार्ट इन्वेस्टर' नामक एक निवेशक शिक्षा कार्यक्रम है। इसके तहत पहला वेबिनार गुरुवार को आयोजित किया गया। इसका विषय म्यूचुअल फंड के साथ टैक्स प्लानिंग था। एज इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंशियल स्टडीज के निदेशक और संस्थापक सीईओ वरुण मल्होत्रा ने बताया कि ईएलएसएस में निवेश टैक्स सेविंग के साथ फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
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अमर उजाला और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ ने संयुक्त रूप से एक श्रृंखला शुरू की है, जो उद्योग के विशेषज्ञों के साथ 'स्मार्ट इन्वेस्टर' नामक एक निवेशक शिक्षा कार्यक्रम है। इसके तहत पहला वेबिनार गुरुवार को आयोजित किया गया। इसका विषय म्यूचुअल फंड के साथ टैक्स प्लानिंग था। इस पर बातचीत करते हुए एज इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंशियल स्टडीज के निदेशक और संस्थापक सीईओ वरुण मल्होत्रा ने विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी। इनमें टैक्स प्लानिंग के बारे में जानें और लंबी अवधि में वेल्थ और टैक्स प्लानिंग बनाने में निवेशकों की मदद करने में ईएलएसएस फंड कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जैसे मुद्दे शामिल रहे।
ईएलएसएस में लंबी अवधि का निवेश फायदेमंद
ईएलएसएस पर रिटर्न को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। ये लाभ एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये तक का टैक्स फ्री होता है। ईएलएसएस पर रिटर्न शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा हुआ होता है, इसलिए किसी तरह की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। वरुण मल्होत्रा ने कहा कि इसकी लॉक-इन अवधि अन्य योजनाओं की तुलना में सबसे कम है, लेकिन आप लंबी अवधि के लिए इसमें निवेश करके ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईएलएसएस में आप एसआईपी फॉर्म में हर महीने छोटी मात्रा में निवेश कर सकते हैं। मल्होत्रा ने कहा कि टैक्स बचत करने के साथ स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग में भी फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि ग्रोथ के लिए पोर्टफोलियो में इक्विटी को जोड़ना जरूरी है और ईएलएसएस में लंबी अवधि का निवेश इस लिहाल से लाभदायक साबित हो सकता है। ईएलएसएस, तीन साल की लॉक इन अवधि को देख निवेशक मानते हैं तीन साल बाद जमा पैसों को निकाल लेना चाहिए, लेकिन हकीकत में इसे निकालने की जगह लंबी अवधि के लिए रखना चाहिए। इससे पैसे निकालकर खर्च करने वाले निवेशक वेल्थ क्रिएट नहीं कर पाएंगे, या तो इससे पैसे निकालने के बाद फंड को दूसरी जगह इन्वेस्ट कर दीजिए, नहीं तो लंबी बवधि तक इसमें पैसे डले रहने दीजिए। उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों को ईएलएसएस में निवेश रिटायरमेंट प्लान के तहत करना चाहिए।
टैक्स सेविंग के लिए निवेश जरूरी
वरुण मल्होत्रा ने कहा कि अगर आपको टैक्स सेविंग करनी है तो इनवेस्ट करना है। ईएलएसएस में तीन साल का लॉक इन होता है, लेकिन निवेशकों को ये सोचकर निवेश करना चाहिए कि हमें पांच साल या उससे अधिक अवधि तक निवेश करना है। लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद ज्यादा होती है। उन्होंने कहा कि बहुत से कारण हैं कि ईएलएसएस में लॉन्ग टर्म के लिए जाना लाभदायक होता है। उन्होंने कहा कि इसे एक तरह से रिटायरमेंट प्लान की तरह सोचकर निवेश करना चाहिए। युवा उम्र में इसमें निवेश करना ज्यादा फायदा पहुंचाता है। उदाहरण के तौर पर 25 से 35 की उम्र तक हर महीने 10 हजार निवेश किया और इसके बाद पैसा डालना बंद कर दिया, तो ऐसे निवेशकों को 35 से 60 की उम्र तक निवेश करने वालों से ज्यादा फायदा होगा। इसलिए इसे जल्द शुरू करना फायदेमंद होगा। इसमें 12 से 13 फीसदी तक का रिटर्न हासिल हो जाता है और 60 साल की उम्र में एक बड़ी रकम इकठ्ठी हो जाती है। उन्होंने कहा कि निवेश करना भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में ईएलएसएस टैक्स एडवांटेज के साथ रिटायरमेंट सिक्योर करने के लिए सही विकल्प है। इसे अलावा बच्चों की आगे की शिक्षा के लिए पैसा इकठ्ठा करने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
लंबे समय में पा सकते हैं अच्छा रिटर्न
वेबिनार को संबोधित करते हुए वरुण मल्होत्रा ने कहा कि इस दौरान एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि म्यूचुअल फंड में निवेश में मार्केट रिस्क रहता है तो इस क्षेत्र में सतर्क रहने की बेहद जरूरत है और इसके लिए पूरी जांच-परख के बाद निवेश करना फायदेमंद होता है। उन्होंने कहा कि ईएलएसएस को नॉर्मल इक्विटी फंड की तरह ट्रीट किया जाता है। तीन साल तक इसमें जमा रकम नहीं निकाल सकते। ईएलएसएस में लॉन्ग टर्म निवेश के दौरान टैक्स डेफर करने के बड़े एडवांटेज मिलेंगे। मल्होत्रा की मानें तो फंड होल्ड करना बेहद फायदेमंद होगा। ऐसे में लंबी अवधि में टैक्स सेविंग के साथ अच्छा रिटर्न मिलेगा।
निवेश से पहले इस बात का रखें ध्यान
ईएलएसएस की स्कीम को लेकर निवेशकों को इस बात की बहुत फिक्र रहती है कि किस फंड में निवेश करना बेहतर होगा। ऐसे में वरुण मल्होत्रा ने बताया कि निवेशकों को निवेश के पहले फंड मैनेजरों का पोर्टफोलियो देखना चाहिए कि किस फंड ने कितना रिफंड दिया, किसमें कितना रिस्क रिस्क है आदि। इस दौरान उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि ऐसे फंड को दरकिनार करना चाहिए जिनका एयूएम छोटा है, ब्रॉड फंड की ओर देखना उचित रहेगा। इसलिए मिड और बिग फंड पर ही ध्यान केंद्रित करें। फंड मैनेजरों के निवेश के बारे में बात करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि फंड मैनेजर ईएलएसएस निवेशकों का पैसा प्लेक्सी कैप फंड यानी ये लार्ज कैप, मिड कैप और स्माल कैप कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। इसमें कोई विशिष्ठ श्रेणी नहीं है। चूंकि ईएलएसएस इक्विटी म्यूचुअल फंड है इसलिए फंड मैनेजरों को निवेश इक्विटी में ही करना होगा। ईएलएसएस में निवेश को लोन लेने के लिए इस्तेमाल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस में तीन साल पूरे न होने तक यानी लॉक इन तक इसे नहीं भुना सकते। यानी लॉक इन टाइम पूरा होने के इसके जरिए लोन नहीं लिया जा सकता है।
ईएलएसएस म्यूचुअल फंड को समझें
टैक्स सेविंग के लिए कई प्रकार के निवेश विकल्प उपलब्ध हैं। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक के टैक्स डिडक्शंस का दावा कर सकते हैं। इस सेक्शन के तहत पीपीएफ समेत निवेश के कई विकल्पों में टैक्स छूट का फायदा मिलता है। हालांकि सबसे कम लॉक-इन पीरियड ईएलएसएस म्यूचुअल फंड में है। कई लोग यह मानते हैं कि ईएलएसएस म्यूचुअल फंड सिर्फ टैक्स बचत के लिए बेहतर है। ईएलएसएस ऐसा टैक्स सेविंग फंड है जिसके तहत इक्विटी व इक्विटी ओरिएंटेड सिक्योरिटीज में निवेश किया जा सकता है। ईएलएसएस दीर्घकालिक इक्विटी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए है। इसमें तीन साल का लॉक इन पीरियड होता है, जिसका मतलब यह है कि इसे निवेश की तारीख से तीन साल बाद ही भुनाया जा सकता है।
नॉमिनी चुनना निवेशकों के लिए जरूरी
बातचीत के दौरान वरुण मल्होत्रा ने बताया कि निवेशकों को किसी भी स्कीम में निवेश करने के दौरान नॉमिनी का चयन करना बेहद जरूरी होता है। नॉमिनी पहले से डाला है तो किसी भी मिस हैपनिंग में नॉमिनी उस पैसे को निकाल सकता है। इसलिए हर निवेश में नॉमिनेशन बेहद जरूरी होता है। ऐसा न करने पर किसी मिस हैनपिंग के बाद परिवार के लोगों को आपके जमा को निकालने में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मल्होत्रा ने इस दौरान सेबी के स्कोर सिस्टम के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि स्कोर सिस्टम आपके साथ किसी भी गड़बड़ी की शिकायत करने के लिए बनाया गया है। अगर आपको मार्केट में किसी भी गडबड़ी पता चलती है तो उसे इस प्लेटफार्म पर डाल सकते हैं।