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GST : खत्म हो जाएंगे कई टैक्स, जानिए किसे होगा सबसे बड़ा फायदा

Thu, 04 Aug 2016 06:58 AM IST
शिशिर चौरशिया-राजीव कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरशिया-राजीव कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 04 Aug 2016 06:58 AM IST
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Advantage and disadvantage of GST bill

जीएसटी लागू होने पर काफी छोटे स्तर के उद्यमियों व कारोबारियों को आरंभ के वर्षों में इसका लाभ नहीं मिलेगा। उल्टा इसके लागू होने पर उनके कारोबार की लागत बढ़ जाएगी। 

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फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज (फिस्मे) के महासचिव, अनिल भारद्वाज के मुताबिक जीएसटी सैद्धांतिक रूप से काफी फायदेमंद है क्योंकि इससे कर चोरी की संभावना कम हो जाएगी और ईमानदारी से काम करने वाले कारोबारियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
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लेकिन छोटे स्तर के उद्यमियों व कारोबारियों को शुरू के कुछ वर्षों में जीएसटी का कोई लाभ नहीं मिल पाएगा क्योंकि वे अपने कारोबार का रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखते हैं।
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जीएसटी के प्रावधानों के मुताबिक, वस्तुओं की खरीदारी पर कारोबारी या उद्यमी जो कर देंगे, उसकी वापसी तभी संभव हो सकेगी जब वे खरीदारी के कागजातों को संभाल कर रखेंगे या उन्हें मेनटेन करेंगे।

अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें लाभ मिलने की जगह उनकी लागत में बढ़ोतरी होगी। भारद्वाज ने बताया कि चाय की दुकान, ब्यूटी पार्लर व इस प्रकार के छोटे-मोटे काम करने वाले कारोबारी अक्सर अपनी खरीदारी से जुड़े कागजात संभाल कर नहीं रखते हैं और इनमें से कम ही लोग टैक्स रिटर्न भरते हैं। बिना टैक्स रिटर्न भरे उन्हें दिए गए टैक्स का भुगतान नहीं हो पाएगा। 

कारोबारियों के मुताबिक, छोटे कारोबारी कम पढ़े लिखे होते हैं और दस्तावेजी काम से वे खुद को दूर रखते हैं। उन्हें कारोबार की पूरी समझ होती है, लेकिन टैक्स रिटर्न भरना, रिफंड लेना जैसे काम उन्हें पूरी तरह समझ में नहीं आते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जहां तक जीएसटी के लागू होने का सवाल है तो अभी इसमें काफी समय लगेगा क्योंकि इसे अभी कई प्रकार के चरणों से गुजरना है।

ये टैक्स होंगें खत्म

Advantage and disadvantage of GST bill
- केंद्रीय उत्पाद शुल्क
- उत्पाद शुल्क (मेडिसिनल और शौचालय निर्माण)
- अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विशेष महत्व की वस्तुएं)
- अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (टैक्सटाइल्स और टैक्सटाइल्स उत्पाद)
- अतिरिक्त कस्टम शुल्क
- विशेष अतिरिक्त कस्टम शुल्क
- सेवा कर
- वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले उपकर और अधिभार

राज्यों से खत्म होने वाले कर
- राज्यों के वैट
- केंद्रीय बिक्री कर
- खरीद कर
- लग्जरी कर
- प्रवेश कर (सभी प्रकार के)
- मनोरंजन कर
- विज्ञापन पर कर
- लॉटरी, सट्टा और जुआ पर कर
- राज्य उपकर और अधिभार

जीएसटी से किसको होगा सबसे बड़ा फायदा

Advantage and disadvantage of GST bill
- जीएसटी से सबसे बड़ा फायदा होगा कि यह कर चोरी को हतोत्साहित करेगा और टैक्स व्यवस्था पारदर्शी होगी। इसका परिणाम होगा वर्तमान में हो रहे छुपे लेनदेन सामने आएंगे।

ज्यादातर चीजें सस्ती होंगी
-  वर्तमान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स से किसी उत्पाद की कीमत उत्पादन से लेकर हमारे हाथों तक पहुंचने तक दुगनी या तिगुनी हो जाती है। किसी भी सामान खरीदते वक्त उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाते हैं। कहीं कहीं तो यह 50 प्रतिशत तक है। जीएसटी लागू होने के बाद ये टैक्स घटकर 12 -16 प्रतिशत रहने की उम्मीद की जा रही है।

टैक्स भरना होगा आसान
जीएसटी आने के बाद टैक्स का ढांचा पारदर्शी होगा और असमानता नहीं होगी। काफी हद तक टैक्स विवाद कम होंगे। जीएसटी लागू होने से ढेरों टैक्स कानून और नियामकों का झंझट नहीं होगा। साथ ही, सब कुछ ऑनलाइन होगा। इससे एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार कर लगाने की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इससे कुछ राज्यों के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।

जीएसटी बिल में हुए प्रमुख बदलाव

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  • राज्यों को होने वाले नुकसान की 100 फीसदी भरपाई केंद्र सरकार पांच साल तक करेगी। पहले तीन साल तक नुकसान की भरपाई की बात थी जिस पर राज्यों को एतराज था।
  • एक फीसदी अतिरिक्त कर का प्रावधान हटाया गया।
  • जीएसटी पर केंद्र और राज्यों के बीच विवाद पर जीएसटी काउंसिल फैसला करेगी। इस काउंसिल में केंद्र और राज्य, दोनों के प्रतिनिधि होंगे।
  • टैक्स का 15-15.5 फीसदी रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (आरएनआर) और जीएसटी दर की 17-18 फीसदी की सीमा बाद में तय हो सकती है।

जीएसटी काउंसिल
केंद्र और राज्य के बीच या विभिन्न राज्यों के बीच जीएसटी से संबंधित विवादों का निपटारा जीएसटी काउंसिल करेगा। इसका गठन राष्ट्रपति करेंगे। जीएसटी काउंसिल में केंद्रीय वित्त मंत्री (अध्यक्ष), राजस्व राज्यमंत्री और प्रत्येक राज्य द्वारा नामित वित्त या टैक्सेशन या अन्य मंत्री होंगे।

निर्णय का तरीका : तीन-चौथाई बहुमत के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। केंद्र सरकार के पास एक-तिहाई मत और राज्यों के पास कुल मिलाकर दो-तिहाई मत होंगे। काउंसिल के सुझाव से उत्पन्न होने वाले विवादों पर काउंसिल खुद ही निर्णय कर सकता है।

जीएसटी की वसूली

  • संसद और राज्यों के विधानसभा दोनों को वस्तु एवं सेवाओं पर कर के कानून बनाने के अधिकार होंगे।
  • जीएसटी पर संसद का कानून राज्य के कानून के ऊपर नहीं होगा।
  • केंद्र सरकार को जीएसटी की वसूली का विशेष अधिकार होगा। केंद्र अंतरराज्यीय कारोबार, व्यापार या आयात पर कर संग्रह करेगा। इसे इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) कहा जाएगा।
  • केंद्रीय कानून यह प्रस्तावित करेगा कि जीएसटी काउंसिल के नजरिए के अनुसार आईजीएसटी केंद्र और राज्य के बीच कैसे साझा किया जाए।


जीएसटी के दायर से बाहर

  • शराब, पेट्रोलियम क्रूड, हाई स्पीड डीजल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमान का ईंधन। जीएसटी काउंसिल यह निर्णय करेगा कि यह जीएसटी के दायरे से कब तक बाहर रहेंगे।


जीएसटी के दायरे में आई चीजें

  • तंबाकू, तंबाकू उत्पाद। केंद्र सरकार तंबाकू पर उत्पाद शुल्क लगा सकती है।

जीएसटी का अब तक का सफर

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  • 2000 में वाजपेयी सरकार ने कमेटी बनाई
  • 2004 में केलकर टास्क फोर्स ने जीएसटी का सुझाव दिया
  • 2006-07 के बजट में 2010 तक जीएसटी की घोषणा की गई। इसके बाद राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को इसका खाका तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई।
  • 2008 के अप्रैल में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अगुवाई में अधिकार प्राप्त समिति  (ईसी) ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसी साल अक्टूबर और दिसंबर में समिति ने अपने सुझाव दिए। फिर ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप बना जिसने छूट के विकल्पों और दायरे, सेवाओं पर कराधान और अंतरराज्यीय आपूर्तियों से संबंधित मसलों की जांच की।
  • 2009 के नवंबर में ईसी ने पहला चर्चा पत्र जारी किया।
  • 2011 में 22 मार्च को संविधान (115वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया जिसे संसद की स्थाई समिति (वित्त) को भेजा गया जिसने 7 अगस्त 2013 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। लोकसभा 2014 में समाप्त होने से इस विधेयक का समय समाप्त हो गया।
  • 2014 में 19 दिसंबर को लोकसभा में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पेश किया गया।
  • 2015 में 6 मई को संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो गया।
  • 2015 में 12 मई को विधेयक भूपेंदर यादव की अगुवाई वाली राज्यसभा की 21 सदस्यीय प्रवर समिति को भेजी गई।
  • 2015 में 22 जुलाई को प्रवर समिति ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की।
  • 2015 के मानसून और शीतकालीन सत्र तथा 2016 के बजट सत्र में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने कुछ बिंदुओं पर अड़ंगा लगातार अड़ंगा लगाया।
  • 2016 में 3 अगस्त को इसे संशोधनों के साथ राज्यसभा में पेश किया गया।

अब आगे क्या होगा?

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  • राष्ट्रपति जीएसटी काउंसिल का गठन करेंगे।   जीएसटी  काउंसिल इन ‌ब‌िंदुओं पर देगा सुझाव देगा-
1 सम्मिलित किए जाने वाले कर
2 छूट
3 मॉडल जीएसटी कानून, उगाही के सिद्धांत आदि
4 छूट का दायरा
5 दरों की न्यूनतम और अधिकतम सीमा
6 खास अवधि के लिए विशेष दर 
7 किस तारीख से क्रूड, हाई स्पीड डीजल, प्राकृतिक गैस, विमान के ईंधन और पेट्रोल पर जीएसटी लागू होगा
8 पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान
  • संसद को सीजीएसटी और आईजीएसटी के कानून पारित करने होंगे
  • सभी 29 राज्यों और नौ केंद्र शासित प्रदेशों को अपना एसजीएसटी कानून पारित करना होगा
  • सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी के लागू होने की तारीख पर चर्चा होगी

अन्य देशों में जीएसटी पर एक नजर

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-150 देशों में जीएसटी लागू है।


विभिन्न देशों में 5 से 25 प्रतिशत तक है जीएसटी की दरें

देश                    जीएसटी की दर
जापान                   5
कनाडा                   5
मालदीव                 6
सिंगापुर                 7
आस्ट्रेलिया             10
दक्षिण कोरिया         10
न्यूजीलैंड               15
पाकिस्तान             16
जर्मनी                  19
फ्रांस                  19.6
स्वीडन               25
डेनमार्क              25
 
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