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ADB: एडीबी ने त्रिपुरा के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए दिया ₹975 करोड़ का ऋण, बुनियादी ढांचा निर्माण पर होगा खर्च
Mon, 21 Jul 2025 11:28 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 21 Jul 2025 11:28 AM IST
सार
ADB: एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने त्रिपुरा के नौ औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 975.26 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। यह राशि कहां और कैसे खर्च की जाएगी, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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मुख्यमंत्री माणिक साहा
- फोटो : X-@DrManikSaha2
विस्तार
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने त्रिपुरा के नौ औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 975.26 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। त्रिपुरा औद्योगिक विकास निगम (टीआईडीसी) के अध्यक्ष नबादल बानिक ने कहा कि इस परियोजना के तहत औद्योगिक शेड, बिजली सबस्टेशन, भूमिगत बिजली लाइनें, अग्निशमन सेवा स्टेशन और 34 सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
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उन्होंने पीटीआई को बताया, "एडीबी ने त्रिपुरा के नौ औद्योगिक क्षेत्रों में विकास के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु 975.26 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया है। इसका कार्यान्वयन जारी है।" उन्होंने बताया कि बोधजंगनगर, आरके नगर, दुकली और एएन नगर औद्योगिक क्षेत्र इन नौ क्षेत्रों में शामिल हैं।
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बनिक ने कहा कि राज्य सरकार ने दक्षिण त्रिपुरा में संतिरबाजार (127 एकड़) और उनाकोटी जिले में फटीक्रोय (28 एकड़) में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के लिए भूखंड सौंप दिए हैं। उन्होंने कहा, "टीआईडीसी ने दो नए क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सीमांकन का काम शुरू कर दिया है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उद्योगों के लिए आवंटित कोई भी जमीन लंबे समय तक अप्रयुक्त न रहे।"
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उनके अनुसार, टीआईडीसी ने 24 निष्क्रिय औद्योगिक इकाइयों से 28 एकड़ भूमि वापस प्राप्त कर ली है, क्योंकि पूर्वोत्तर राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए नए उद्यमी आ रहे हैं। बनिक ने कहा कि निगम ने प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में दो प्लाईवुड बनाने वाली इकाइयां चालू हैं तथा सात और इकाइयां स्थापित होने की योजना है।
उन्होंने कहा, "त्रिपुरा में 1,10,000 हेक्टेयर में रबर का बागान है और इसमें से लगभग 10,000 हेक्टेयर पुराने है। हमने रबर-लकड़ी आधारित प्लाईवुड को बढ़ावा देने के लिए एक पहल की है। अगर ये परियोजनाएं लागू होती हैं, तो त्रिपुरा प्लाईवुड निर्माण में अग्रणी राज्यों में से एक होगा।" वृद्धि रबर बागान से तात्पर्य उन वृक्षों से है जिन्हें बूढ़ा और अनुत्पादक माना जाता है।