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Adani-NDTV : सेबी की मंजूरी के बिना अदाणी समूह नहीं कर सकता अधिग्रहण, प्रवर्तकों पर लगी है दो साल की पाबंदी

Fri, 26 Aug 2022 04:56 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 26 Aug 2022 04:56 AM IST
सार

Adani NDTV : एनडीटीवी मामले का मुकेश अंबानी से भी कनेक्शन है क्योंकि विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लि. (वीसीपीएल) पहले अंबानी के पास थी और बाद में इसका मालिकाना हक कई कंपनियों के हाथों से होते हुए अदाणी समूह के पास चला गया।

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Adani NDTV : Adani Group cannot do acquisition without SEBI s approval, promoters are banned for two years
गौतम अदाणी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Adani NDTV : अदाणी समूह की कंपनी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) के लिए एनडीटीवी की प्रवर्तक इकाई आरआरपीआर लिमिटेड में हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने के लिए सेबी की मंजूरी जरूरी है। वीसीपीएल की ओर से  आरआरपीएल को बिना ब्याज के दिए गए कर्ज के बदले अधिग्रहण किया जाना है।

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एनडीटीवी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 27 नवंबर, 2020 को प्रवर्तकों प्रणय और राधिका रॉय पर प्रतिभूति बाजार में शेयरों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी थी। यह रोक 26 नवंबर 2022 को खत्म हो रही है। कंपनी ने बताया, ‘जब तक लंबित अपील कार्यवाही पूरी नहीं होती है, प्रस्तावित अधिग्रहणकर्ता के लिए प्रवर्तक समूह के 99.5 फीसदी हिस्सों के लिए सेबी की मंजूरी जरूरी है।
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ओपन ऑफर को रोकने की मांग
एनडीटीवी में 29.18 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने वाले अदाणी समूह ने कहा कि वह अतिरिक्त 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक खुली पेशकश लाएगा। इस पर एनडीटीवी ने कहा, अदाणी समूह को ओपन ऑफर लाने से रोका जाए। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला अब कानूनी पचड़े में फंसेगा।
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इंडस लॉ के भागीदार रवि कुमार ने कहा, वॉरंट को इक्विटी शेयर में बदलने के लिए उसे जारी करने वाली कंपनी से पूर्व सहमति जरूरी नहीं होती। मामला वास्तव में अनुबंध पर निर्भर करता है और किसी भी विवाद का फैसला निर्धारित शर्तों के आधार पर होगा। पॉयनियर लीगल के भागीदार शौभिक दासगुप्ता ने कहा,  अगर अधिग्रहण को चुनौती दी गई तो लंबी कानूनी लड़ाई हो सकती है।

कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लेती रही एनडीटीवी
एनडीटीवी मालिकों ने 2008 में एक ओपन ऑफर लाया और इंडियाबुल्स फाइनेंस से 540 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। इस कर्ज को चुकाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 375 करोड़ का कर्ज लिया जिसे 2009 में चुकाया गया। इसे चुकाने के लिए वीसीपीएल से 21 जुलाई, 2009 को 350 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। इस कर्ज को रिलायंस की एक कंपनी के जरिये वीसीपीएल को दिया गया।

बिना ब्याज के करोड़ों का कर्ज
हालांकि, कर्ज में भी काफी उलझा मामला है। वीसीपीएल ने कर्ज पर कोई ब्याज नहीं लिया, लेकिन आईसीआईसीआई बैंक सालाना 19 फीसदी ब्याज ले रहा था। कर्ज के समझौते में यह प्रावधान था कि 3-5 सालों में कर्जदाता और कर्ज लेने वाले एक विश्वसनीय खरीदार की तलाश करेंगे। उस समय ओपन ऑफर लाने की प्रक्रिया में रॉय असफल हो गए थे। अब यही काम अदाणी समूह कर रहा है, जो रॉय के लिए आगे कठिनाई पैदा कर सकता है।

अंबानी से भी कनेक्शन
एनडीटीवी मामले का मुकेश अंबानी से भी कनेक्शन है क्योंकि विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लि. (वीसीपीएल) पहले अंबानी के पास थी और बाद में इसका मालिकाना हक कई कंपनियों के हाथों से होते हुए अदाणी समूह के पास चला गया। वीसीपीएल को 2008 में शुरू किया गया था। यही कंपनी आरआरपीआर में परिवर्तनीय डिबेंचर की मालिक है। इसी डिबेंचर को कर्ज के एवज में इक्विटी में बदला गया है।

52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा शेयर, अपर सर्किट लगा
एनडीटीवी के शेयर दो दिन से 5% के अपर सर्किट (एक दिन में इससे ज्यादा नहीं) पर बंद हो रहे हैं। बृहस्पतिवार को यह 5 फीसदी की तेजी के साथ 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर बंद हुआ। एक साल में शेयर 71 रुपये से बढ़कर 403.70 रुपये पर पहुंच गया है। दो दिन में कंपनी की बाजार पूंजी 241 करोड़ बढ़कर 2,602.7 करोड़ रुपये पहुंच गई।

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