Share Market: अदाणी प्रकरण से आगे की सोच रहे निवेशक, जानें आने वाले दिनों में कैसी रहेगी भारतीय बाजार की चाल
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विस्तार
भारतीय शेयरों के बारे में अब निवेशक अदाणी प्रकरण से आगे की सोच रहे हैं। स्थानीय मुद्रा प्रबंधक आने वाले वर्ष के लिए बाजार को लेकर आशावादी हैं। विदेशी फंड्स ने भी 3.1 ट्रिलियन डॉलर के भारतीय इक्विटी बाजार में वापस आना शुरू कर दिया है।
हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद फिसला बाजार
जनवरी में लगातार दूसरे महीने पिछड़ने के बाद शेयर बाजार का एक प्रमुख बेंचमार्क एक बार फिर से ऊपरी स्तर की ओर बढ़ रहा था उसी अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से अदाणी समूह के संबंध में एक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई जिससे बाजार की धारणा व्यापक रूप से बदल गई। हालांकि इसके बावजूद ब्लूमबर्ग न्यूज के एक सर्वेक्षण के अनुसार फंड मैनेजरों को लगता है कि भारतीय बाजार के दोनों मुख्य इक्विटी इंडेक्स मौजूदा स्तरों की तुलना में वर्ष के अंत में ऊपर होंगे क्योंकि मजबूत घरेलू मांग से कंपनियों की आय बढ़ेगी इससे बाजार को सहारा मिलेगा।
अदाणी प्रकरण पूरे शेयर बाजार का मुद्दा नहीं
मुंबई में एल्डर कैपिटल की इन्वेस्टमेंट मैनेजर राखी प्रसाद के अनुसार अदाणी का मुद्दा और भारतीय बाजार दोनों अलग-अलग है। उनके अनुसार अदाणी समूह में हो रही बिकवाली पूरे भारत या शेयर बाजार का मुद्दा नहीं है क्योंकि कई अन्य भारतीय कंपनियों के संचालन मानक वैश्विक कंपनियों के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि अदाणी समूह जैसी समस्या कई अन्य देशों में भी हो सकती है।
अदाणी समूह की कंपनियों का मार्केट कैप 130 अरब डॉलर घटा
हिंडनबर्ग रिसर्स की रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह की 10 कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे समूह की कंपनियों का मार्केट कैप में से लगभग 130 अरब डॉलर से अधिक का सफाया हो गया है। यह स्थिति भारत के विकास कहानी में एक छोटी बाधा बन सकती है क्योंकि सरकार का दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेजी से विस्तार करने का लक्ष्य है। पर सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद से देश के कॉर्पोरेट गवर्नेंस परिदृश्य को जिस जांच का सामना करना पड़ेगा वह दीर्घकालिक रूप से बाजार पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
विदेशी निवेशक अब भी भारतीय बाजार के प्रति सकारात्मक
मोबियस कैपिटल पार्टनर्स के सह-संस्थापक और उभरते बाजारों के दिग्गज निवेशक मार्क मोबियस का कहना है, 'मैं अब भारतीय बाजार के प्रति और अधिक उत्साहित हो गया हूं। भारत ने अब अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है और निवेशकों को एहसास होगा कि अदाणी का मामला महज एक विचलन है। मोबियस के अनुसार वे प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के शेयरों को खरीदना चाहते हैं। उन्होंने पिछले महीने ब्लूमबर्ग को बताया था कि वह भारत में अधिक पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं क्योंकि "बाजार का दीर्घकालिक भविष्य बहुत अच्छा है" और हिंडनबर्ग रिपोर्ट के परिणामस्वरूप निवेशकों का पीछे हटना सिर्फ एक समूह की समस्या है। हिंडनबर्ग ने 24 जनवरी को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें अदाणी समूह पर शेयरों में हेरफेर और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था, हालांकि इन आरोपों से समूह ने बार-बार इनकार किया है।
22 में से 16 फड मैनेजर भारतीय बाजार के प्रति बुलिश
ब्लूमबर्ग न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार इस महीने एक अनौपचारिक सर्वेक्षण में 22 में से 16 फंड मैनेजर अदाणी प्रकरण के बावजूद भारतीय शेयरों के प्रति उत्साहित हैं। केवल दो फंड मैनेजरों का दृष्टिकोण मंदी का था, जबकि चार अन्य तटस्थ रहे। इनमें से सत्रह ने भविष्यवाणी की है कि एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स और एनएसई निफ्टी 50 मौजूदा स्तर से साल के अंत तक ऊपर कारोबार करते दिखेंगे। जबकि इनमें बहुमत का मानना है कि अदाणी प्रकरण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास समर्थक राजनीतिक एजेंडे को कोई नुकसान नहीं होगा।
विदेशी निवेशकों ने बीते छह सत्रों में बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई
विदेशी निवेशक भी अदाणी प्रकरण के शुरुआती दिनों की तुलना में कम चिंतित दिख रहे हैं। नवीनतम एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी फंडों ने बीते गुरुवार को लगातार छह सत्रों में भारतीय शेयरों में अपनी होल्डिंग बढ़ाई है, यह नवंबर के बाद से सबसे अधिक है। हालांकि अदाणी समूह हाल के हफ्तों में समाचार सुर्खियों में रहा है, लेकिन समूह के कई व्यवसाय जो बंदरगाहों से लेकर बिजली तक के क्षेत्रों में फैले हुए हैं उनमें भारतीय अर्थव्यवस्था का महज एक हिस्सा शामिल है।
भारत की जीडीपी में अदाणी समूह का महज 0.3 फीसदी योगदान
ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस की गणना के अनुसार अगले दो वर्षों में समूह का संयुक्त पूंजीगत व्यय लगभग 12 बिलियन डॉलर होगा, अदाणी समूह अपनी व्यापक परेशानियों के बावजूद पिछले वित्त वर्ष के स्तर को बनाए रखने में कामयाब रख सकता है। आंकड़ों के अनुसार अदाणी समूह भारत की 3.47 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के संभावित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 0.3% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
अदाणी समूह अकेले भारतीय उद्योग जगत का प्रतिनिधित्व नहीं करता
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के विश्लेषक अभिषेक गुप्ता और स्कॉट जॉनसन की एक रिपोर्ट के अनुसार टाटा, रिलायंस और इंफोसिस सहित भारत के सबसे बड़े व्यापारिक समूहों में गवर्नेंस, लिक्विडिटी और लेवरेज की स्थिति के विश्लेषण से यह भी संकेत मिलता है कि अदाणी एक आउटलायर हैं और पूरी तरह से भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधि नहीं हैं। हालांकि हर हर कोई भारतीय बाजार के प्रति आशावादी नहीं है। कुछ निवेशकों को डर है कि अदाणी समूह की फर्मों से जुड़ी कॉर्पोरेट-गवर्नेंस की चिंताओं के कारण भारतीय इक्विटी बाजार पर बना बना दबाव जारी रह सकता है। और कंपनियों के महंगे मूल्यांकन से चीन के बाजार खुलने के बाद उस ओर वैश्विक फंड स्विच कर सकते हैं।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में अदाणी समूह का एक भी नहीं
यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि सेंसेक्स के 30 घटकों में अदाणी समूह का कोई स्टॉक नहीं है। दिसंबर में अपने रिकॉर्ड ऊंचाई से यह 4% से भी कम दूर है। आय-आधारित मूल्यांकन आधार पर यह एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स पर 89% प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी 50 में अडानी समूह की दो कंपनियां हैं, यह भी अपने उच्चतम स्तर से 5% से भी कम दूर है। सिंगापुर में ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के स्ट्रैटेजिस्ट नितिन चंदुका के अनुसार 'निकट भविष्य में भारतीय इक्विटी में वैल्यूएशन रिस्क अदाणी प्रकरण की तुलना में महंगाई के कारण अधिक है। अदाणी प्रकरण से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा।
प्रति शेयर आय के भारतीय बाजार के आंकड़े अधिकांश दूसरे बाजारों से बेहतर
इस बीच कंपनियों की आय में वृद्धि से भारत के दीर्घकालिक मूल्यांकन को समर्थन मिलता दिख रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में शामिल कंपनियों की प्रति शेयर आय इस साल 14.1% बढ़ेगी। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस द्वारा संकलित डेटा से पता चलता है कि यह दुनिया के अधिकांश बाजारों की तुलना में बेहतर है।
खुदरा निवेशकों के बढ़ने से भी मिल रही भारतीय बाजार को मिल रही मजबूती
संस्थागत धन प्रबंधकों की तेजी खुदरा निवेशकों की बढ़ती संख्या का प्रतिबिंब है, जो महामारी के कारण निवेश में तेजी आने के बाद एक ताकत बनकर उभरे हैं। पिछले दो वर्षों में भारत में खुदरा निवेशक खातों की संख्या तीन करोड़ से बढ़कर लगभग 11 करोड़ हो गई है। कर्मा कैपिटल के सह-मुख्य निवेश अधिकारी रुषभ सेठ के अनुसार, अदाणी प्रकरण पूरे सिस्टम के लिए चिंता का विषय नहीं है क्योंकि भारत का बाजार समय के साथ काफी परिपक्व हुए हैं। कुछ महीनों में अदाणी प्रकरण का सिर्फ एक आंशिक असर रह जाएगा।