Life Insurance: 81 प्रतिशत भारतीय अपनी जीवन बीमा जरूरतों को कम करके आंकते हैं, सर्वे में खुलासा
Life Insurance Survey: बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस द्वारा नीलसनआईक्यू के सहयोग से किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में युवा बड़े पैमाने पर जीवन बीमा करवा रहे हैं। इससे पहली बार जीवन बीमा खरीदने वालों की औसत आयु 33 वर्ष से घटकर 28 वर्ष हो गई है। सर्वे में और कौन सी नई बातें कही गईं हैं, आइए जानते हैं।
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81 प्रतिशत भारतीय अपनी जीवन बीमा की जरूरतों को कम करकेआंकते हैं। एक सर्वे में यह बात सामने आई है। लोगों का मानना है कि उनकी वार्षिक आय के 10 गुना से कम जीवन बीमा कवरेज वित्तीय सुरक्षा के लिए पर्याप्त है। हालांकि वास्तव में कवरेज के आंकड़े कुछ ओर बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों में औसतन जीवन कवर वार्षिक आय 3.1 गुना था, जो बड़े पैमाने पर समृद्ध परिवारों के लिए 2.9 गुना तक गिर गया है।
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बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस द्वारा नीलसनआईक्यू के सहयोग से किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में युवा बड़े पैमाने पर जीवन बीमा करवा रहे हैं। इससे पहली बार जीवन बीमा खरीदने वालों की औसत आयु 33 वर्ष से घटकर 28 वर्ष हो गई है। हालांकि इसके बावजूद बहुत से लोग अब भी अपर्याप्त राशि का बीमा करवाते हैं। उनका कवरेज उनकी वार्षिक आय के कम से कम 10 गुना के आदर्श स्तर से भी काफी कम है।
जीवन बीमा रुझानों में दिखे हैं महत्वपूर्ण बदलाव
अध्ययन में जीवन बीमा रुझानों में महत्वपूर्ण बदलाव का पता चलता है, जिसमें पहली बार बीमा खरीदने वालों की औसत आयु 33 से घटकर 28 वर्ष हो गई है। पारिवारिक जिम्मेदारियां आय का स्तर और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बीमा अपनाने के लिए प्रमुख कारक बनकर उभरी हैं। दूसरा भारतीयों का मानना था कि उनके पास उनकी आय का 6.4 गुना कवरेज है, लेकिन वास्तविक कवरेज औसतन केवल 3.1 गुना है, जो वित्तीय तैयारी में एक बड़े अंतर है।
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तीसरा तीन में से एक से अधिक भारतीयों ने कभी भी अपने जीवन बीमा कवरेज की समीक्षा नहीं की है, यहां तक कि जीवन की बड़ी घटनाओं के बाद भी स्व-रोजगार और संपन्न व्यक्तियों में यह संख्या बढ़कर 43 प्रतिशत हो जाती है, जिससे उन्हें कम बीमा होने का अधिक जोखिम होता है। चौथा, युवा व्यक्ति पहले से ही बीमा खरीद रहे हैं, 46-50 आयु वर्ग, जो आमतौर पर 33 वर्ष की आयु में पॉलिसी खरीदता था, ने अपनी बीमित राशि में कम विश्वास व्यक्त किया, जो कवरेज पर्याप्तता के बारे में चल रही अनिश्चितता को दर्शाता है। पांवचां, 46 प्रतिशत भारतीय जीवन बीमा निर्णयों के लिए व्यक्तिगत शोध पर भरोसा करते हैं, जो स्व-निर्देशित सीखने को प्राथमिकता देते हैं।
जीवन बीमा के प्रति फिलहाल देश में जागरुकता की कमी
आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ तरुण चुघ ने कहा, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद, कुल बीमित राशि जीडीपी का सिर्फ 70 प्रतिशत है - जो कि अमेरिका (251 प्रतिशत), थाईलैंड (143 प्रतिशत ) और मलेशिया (153 प्रतिशत) जैसे देशों की तुलना में काफी कम है, जो एक महत्वपूर्ण सुरक्षा अंतर को उजागर करता है। यह कमी परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर बना सकती है, जिससे उन्हें संकट के समय बचत में से पैसे निकालने या संपत्ति बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे उनके जीवन के लक्ष्य पटरी से उतर सकते हैं।
चुघ के अनुसार भारत में अब भी लोगों में जीवन बीमा को लेकर जागरुता कम है। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण(आईआरडीएआई) और उद्योग के साथ मिलकर जागरूकता बढ़ाने, उत्पादन पारदर्शिता बढ़ाने और पहुंच में सुधार करने के लिए और भी कड़े कदम उठाएंगे। एक मजबूत डिजिटल और तकनीक इको सिस्टम शुरू करने और उसे आसानी से लोगों को समझाने पर ध्यान होगा, जिसमें 2047 तक सभी के लिए बीमा के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।