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कोरोना संकट से 65 फीसदी साक्षात्कार हो सकते हैं रद्द, यूरोपीय कंपनियों को 81.39 लाख करोड़ की चपत

Mon, 23 Mar 2020 06:00 AM IST
गौरव पाण्डेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 23 Mar 2020 06:00 AM IST
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65 percent of interviews may be canceled due to Corona crisis, European companies lost 81.39 lakh crore
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

औद्योगिक गतिविधियों में आई सुस्ती की मार बेरोजगारों पर पड़ेगी। उद्योगों से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि कोरोना संकट की वजह से अगले कुछ दिनों तक 60-65 फीसदी साक्षात्कार और हाइरिंग को टाला जा सकता है। टीमलीज सर्विसेज के बिजनेस हेड अमित वडेरा ने कहा, हमारा अनुमान है कि कंपनियां 65 फीसदी साक्षात्कार को रद्द कर रही हैं और लॉकडाउन की वजह से यह अगले कुछ दिनों तक खिसक सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, वित्तीय सेवा, बीमा, रिटेल, लॉजिस्टिक्स पर दिख रहा है। फिलहाल कंपनियां अपने उत्पादन के लिए तकनीक पर ही निर्भर कर रही हैं। इससे अगली तिमाही में भी 15 फीसदी तक भर्ती प्रभावित हो सकती है।

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यूरोपीय कंपनियों को 81.39 लाख करोड़ की चपत

चीन के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित यूरोपीय देशों की कंपनियों पर कोरोना वायरस की भीषण मार पड़ने वाली है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा संकट से यूरोप की टॉप-100 कंपनियों का ब्रांड मूल्य इस साल 81.39 लाख करोड़ रुपये कम हो सकता है। इसमें सबसे ज्यादा विमानन, तेल एवं गैस, टूरिज्म, होटल-रेस्टोरेंट और रिटेल क्षेत्र की कंपनियां शामिल होंगी। हालांकि, ऑटोमोबाइल कंपनियों खासतौर से जर्मनी की मर्सिडीज बेंज को इसका मिलेगा। एक स्वतंत्र ब्रांड वैल्यूएंशन कंपनी ने कहा कि इटली, फ्रांस सहित कोरोना वायरस से अधिक पीड़ित देशों में ज्यादातर यूरोपीय हैं। ऐसे में यहां की कंपनियों के ब्रांड वैल्यू को 2020 में बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों को 25 फीसदी घाटा

कोरोना संकट और वैश्विक मंदी के डर से शेयर बाजार में जारी गिरावट का असर इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों पर भी हुआ है। पिछले एक महीने में इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंडों ने 25 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। आईफास्ट फाइनेंशियल इंडिया के वरिष्ठ शोध विश्लेषक कृष्णा कारवा का कहना है कि 44 म्यूचुअल फंड हाउस और उद्योग भी कोविड-19 वायरस की मार से अछूता नहीं है। आगे भी शॉर्ट मीडियम टर्म में स्माल और मिड कैप इक्विटी योजनाएं दबाव में रहेंगी। 19 फरवरी से 18 मार्च के बीच ईएलएसएस सहित सभी योजनाओं ने 25-26 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है और निवेशकों को घाटा उठाना पड़ा है। सबसे ज्यादा असर मिड कैप पर हुआ है।

टैरिफ फ्लोर प्राइस मुद्दे पर ट्राई से ऑनलाइन बहस की मांग

दूरसंचार उद्योग के संगठन सीओएआई ने ट्राई से टैरिफ का न्यूनतम मूल्य तय करने के मुद्दे पर ऑनलाइन खुली बहस कराने की मांग की है। ट्राई से जुड़े सूत्रों ने कहा कि इस तरह का समाधान व्यवहारिक नहीं है। दूरसंचार कंपनियों के लिए टैरिफ का फ्लोर प्राइस तय करना गंभीर मुद्दा है, जिसमें ग्राहकों की प्रतिक्रिया काफी मायने रखती है और इसे जल्दबाजी में लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ट्राई को इस मामले में अब तक मिले सुझाव और प्रतिक्रियाओं का अगले कुछ दिनों में अध्ययन कर लिया जाएगा। इससे पहले सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने मामले पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हितधारकों के साथ खुली बहस कराने की मांग रखी थी।

तेल शोध क्षेत्र में घट सकता है 500 अरब डॉलर का निवेश

दुनियाभर में कोरोना वायरस के फैलने के बाद कच्चे तेल की मांग में तेज गिरावट आई है। एक तरफ सऊदी अरब और रूस के बीच की खींचतान और दूसरी तरफ कोरोना संकट से मांग में आई कमी की चुनौती से निपटने के लिए तेल एवं गैस क्षेत्र की कंपनियां अपना निवेश कम करने का प्रयास कर रही हैं। फ्रांस की एक शोध संस्था आईएफपीईएन ने कहा है कि तेल खोज और उत्पादन के क्षेत्र में इस साल निवेश में 500 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आ सकती है। शोध संस्था ने कहा कि दुनियाभर में लोग अपने घरों में कैद हैं, जिसके चलते आगे भी मांग में भारी कमी आएगी।

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