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70 कंपनियों के 229 विज्ञापन पाए गए भ्रामक, यह कंपनियां पाई गई दोषी

Thu, 23 May 2019 08:51 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 23 May 2019 08:51 AM IST
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229 advertisments of seventy companies were not factually correct

विज्ञापन क्षेत्र पर निगरानी रखने वाली संस्था भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने इस साल मार्च में 229 भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को बरकरार रखा है। जिन विज्ञापनों को गुमराह करने का दोषी पाया गया है, उनमें वोडाफोन, एनआईआईटी, अमूल, कोलगेट, टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी के भ्रामक विज्ञापन भी शामिल हैं।

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एक बयान में कहा गया है कि एएससीआई ने 344 भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की। इसमें से 74 विज्ञापनदाताओं ने त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए अपने-अपने भ्रामक विज्ञापनों को हटा लिया। एएससीआई की उपभोक्ता शिकायत परिषद (सीसीसी) ने मूल्यांकन किए गए 270 में से 229 भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों का कायम रखा है। 
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बयान के मुताबिक, ग्राहकों को गुमराह करने के दोषी पाए गए 229 विज्ञापनों में सबसे अधिक 123 भ्रामक विज्ञापन हेल्थकेयर क्षेत्र के पाए गए। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र के 83, खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र के सात, पर्सनल केयर क्षेत्र के दो और विभिन्न श्रेणी के 14 विज्ञापनों को जांच में भ्रामक पाया गया। हेल्थकेयर क्षेत्र के 100 से अधिक विज्ञापनों को ड्रग्स एंड मैजिक (डीएमआर) रेमेडीज के नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। 

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187 विज्ञापनों की स्वत: निगरानी

एएससीआई ने 187 विज्ञापनों की स्वत: निगरानी की। इनमें से 70 विज्ञापनों का अनौपचारिक रूप से समाधान किया गया, जिसमें विज्ञापनदाताओं ने तुरंत अपने-अपने विज्ञापन वापस लेने की पुष्टि की। जिन 117 भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतें बरकरार रखी गई हैं, उनमें 79 शिक्षा क्षेत्र, 30 हेल्थकेयर क्षेत्र, चार खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र और चार विभिन्न श्रेणियों के हैं। 

भ्रामक विज्ञापनों में सबसे ज्यादा 123 हेल्थ केयर क्षेत्र के 

एएससीआई ने एनआईआईटी के विज्ञापन में '5,000 एश्योर्ड जॉब्स' के दावे को अतिश्योक्तिपूर्ण, अस्पष्ट और गुमराह करने वाला पाया। चूंकि यह छात्रों को दिया गया प्रोविजनल ऑफर था। यह उनके लिए सुनिश्चित नौकरी का वादा नहीं हो सकता है।

विज्ञापन में 50,000 छात्रों को नौकरी का दावा किया गया था। जांच पाया कि इस दावे के पीछे कोई प्रामाणिक डाटा नहीं था। जिन छात्रों को संस्थान के जरिए बैंकिंग सेक्टर में यह नौकरियां मिलीं इसके सत्यापन के लिए स्टूडेंट्स के कॉन्टेक्ट डिटेल्स नहीं मिले। एनरोलमेंट फॉर्म के अलावा छात्रों के अपॉइंटमेंट लेटर की प्रति नहीं मिल पाई। न ही इसका सत्यापन प्रमाण पत्र मिला। 

229 advertisments of seventy companies were not factually correct

इन कंपनियों के विज्ञापनों पर लगाई लगाम

अमूल: सिर्फ अपना घी 100% शुद्ध होने की बात कही, पर तुलनात्मक आंकड़े नहीं दिए 
अमूल के गुजराती विज्ञापन में 'अमूल का मतलब शुद्धता का वादा' और 'सिर्फ अमूल घी 100% शुद्ध है यह 36 लाख किसानों का वादा है' को गुमराह करने वाला पाया गया। यानी अमूल का घी 100 प्रतिशत शुद्ध है और अन्य ब्रांड का नहीं। कंपनी ने अपने प्रोडक्ट और अन्य प्रोडक्ट की शुद्धता को लेकर तुलनात्मक आंकड़े भी नहीं दिए।
 
कोलगेट: टूथपेस्ट में दूध के बराबर कैल्शियम होने का दावा गलत निकला 
कोलेगट ने अपने विज्ञापन में बताया था कि दूध और टूथपेस्ट में कैल्शियम की मात्रा बराबर-बराबर है। टूथपेस्ट में मौजूद कैल्शियम का प्रभाव दूध में मौजूद कैल्शियम के बराबर होने की बात भी गलत पाई गई। विज्ञापन के डिस्क्लेमर में एएससीआई की गाइडलाइन का उल्लंघन होने पर भी नियामक ने कंपनी की खिंचाई की। 

टाटा: नेक्सॉन को बताया सबसे सुरक्षित कार 
टाटा मोटर्स ने विज्ञापन में दावा किया गया था 'टाटा नेक्सॉन देश की सबसे सुरक्षित कार है। स्विफ्ट से जाना सुरक्षित नहीं है'। एएससीआई ने कहा ऐसी तुलना जब स्विफ्ट से की जाती है तो ग्राहक गुमराह हो सकता है। 

मारुति सुजुकी: बड़ी बचत का दावा किया 
मारुति के विज्ञापन में दावा किया गया था कि 'मार्च माह में आकर्षक ऑफरों का मजा लें। कंपनी के विभिन्न मॉडलों के फोटो और कीमत के साथ दिखाए। कंपनी दावा सही होने के बारे में डेटा नहीं पेश किया। न ही मॉडलों पर डिस्काउंट के बारे में जानकारी दी। 

वोडाफोन: हर घंटे में एक टावर लगा रहे हैं 
एएससीआई ने वोडाफोन के सुपरनेट 4जी विज्ञापन में किए गए दावे को भी भ्रामक पाया। इसमें दावा किया गया था कि कंपनी देश के बड़े शहरों में भीड़ भरे इलाकों में हर घंटे में एक टावर लगा रही है।
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