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क्या है गोल्ड वॉल्ट?: धनतेरस पर सोना खरीदने का नया तरीका, जानें निवेश के फायदे और नुकसान
Mon, 02 Nov 2026 07:26 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 02 Nov 2026 07:26 AM IST
सार
धनतेरस पर सोने में निवेश के लिए अब पारंपरिक खरीदारी के अलावा डिजिटल विकल्प भी मौजूद हैं। धन एप का गोल्ड वॉल्ट MCX कॉन्ट्रैक्ट के जरिए भौतिक सोना खरीदने, सुरक्षित भंडारण और जरूरत पर डिलीवरी की सुविधा देता है। हालांकि, इसमें कई अतिरिक्त शुल्क भी लगते हैं।
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सोना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
धनतेरस पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों में केवल परंपरा नहीं, बल्कि संपत्ति जुटाने का एक बड़ा माध्यम भी है। हालांकि, पारंपरिक रूप से सोना खरीदने में शुद्धता की जांच, लॉकर का सुरक्षित भंडारण और जरूरत पड़ने पर बेचने जैसी कई चुनौतियां सामने आती हैं। अब तकनीक की मदद से सोना खरीदने के नए रास्ते खुल चुके हैं। ऐसा ही एक आधुनिक विकल्प धन एप का 'गोल्ड वॉल्ट' है, जिसके जरिये निवेशक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के निर्धारित कॉन्ट्रैक्ट्स के अनुसार वास्तविक सोना खरीद सकते हैं। इस व्यवस्था में खरीद से लेकर निपटान और सुरक्षित भंडारण तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होती है।
गोल्ड वॉल्ट क्या है?
गोल्ड वॉल्ट एक ऐसा निवेश फीचर है, जो यूजर्स को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से जुड़ी लाइव बाजार कीमतों पर भौतिक सोना और चांदी खरीदने की अनुमति देता है। पारंपरिक डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म के विपरीत, यह सिस्टम रेगुलेटेड पूंजी बाजारों के भीतर काम करता है। इसका मतलब है कि लेनदेन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के आधिकारिक फ्रेमवर्क के नियमों के तहत होता है।
कैसे काम करता है गोल्ड वॉल्ट ?
यह सामान्य डिजिटल गोल्ड से पूरी तरह अलग व्यवस्था है, क्योंकि यहां खरीद को सीधे एक्सचेंज के कॉन्ट्रैक्ट्स और भौतिक निपटान से जोड़ा गया है।
इस सुविधा को एक्टिव करते ही यूजर का कमोडिटी रिसीट्स होल्डिंग खाता बन जाता है। जिस तरह शेयरों के लिए डीमैट खाता होता है, उसी तरह इसमें कमोडिटी की रसीदें सुरक्षित रहती हैं।
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निवेश से पहले ध्यान रखें...
शुद्धता के कड़े मानक
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गोल्ड वॉल्ट क्या है?
गोल्ड वॉल्ट एक ऐसा निवेश फीचर है, जो यूजर्स को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से जुड़ी लाइव बाजार कीमतों पर भौतिक सोना और चांदी खरीदने की अनुमति देता है। पारंपरिक डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म के विपरीत, यह सिस्टम रेगुलेटेड पूंजी बाजारों के भीतर काम करता है। इसका मतलब है कि लेनदेन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के आधिकारिक फ्रेमवर्क के नियमों के तहत होता है।
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कैसे काम करता है गोल्ड वॉल्ट ?
यह सामान्य डिजिटल गोल्ड से पूरी तरह अलग व्यवस्था है, क्योंकि यहां खरीद को सीधे एक्सचेंज के कॉन्ट्रैक्ट्स और भौतिक निपटान से जोड़ा गया है।
इस सुविधा को एक्टिव करते ही यूजर का कमोडिटी रिसीट्स होल्डिंग खाता बन जाता है। जिस तरह शेयरों के लिए डीमैट खाता होता है, उसी तरह इसमें कमोडिटी की रसीदें सुरक्षित रहती हैं।
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निवेश से पहले ध्यान रखें...
- यह उन निवेशकों के लिए सबसे उत्तम है, जो भौतिक सोने के जोखिमों से बचना चाहते है और कम से कम 1 ग्राम या उससे ऊपर निवेश करना चाहते हैं।
- केवल सोने की बाजार कीमत न देखें, बल्कि जीएसटी, स्टांप ड्यूटी, स्टोरेज और डिलीवरी चार्जेस को जोड़कर कुल लागत का हिसाब जरूर लगाएं।
- धनतेरस के विशेष ऑफर्स का लाभ उठाने के लिए समय सीमा का ध्यान रखें।
शुद्धता के कड़े मानक
- सोना खरीदते समय शुद्धता सबसे अहम होती है। MCX के कॉन्ट्रैक्ट्स में इसके स्पष्ट मानक तय किए गए हैं:
- 1 ग्राम के गोल्ड पेटल, 8 ग्राम के गोल्ड गिनी और 10 ग्राम के गोल्ड टेन कॉन्ट्रैक्ट्स में 999 शुद्धता मिलती है।
- 100 ग्राम के गोल्ड मिनी और 1 किलोग्राम के गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट्स में 995 शुद्धता का मानक निर्धारित है।
- कीमतें एमसीएक्स से जुड़ी होती हैं, जिससे मनमाने मूल्य निर्धारण की आशंका बिल्कुल नहीं रहती।
- धनतेरस के मौके पर निवेशकों की लागत घटाने के लिए 19 अक्तूबर से 13 नवंबर, 2026 तक शून्य ब्रोकरेज की सुविधा दी जा रही है। साथ ही, शून्य मार्कअप के तहत बिना किसी छुपे हुए मार्जिन के सीधे लाइव बाजार दर पर सोना मिलता है।
- घर में सोना रखने के झंझट से मुक्ति मिलती है और जरूरत पड़ने पर डिलीवरी मिल जाती है।
- इसमें 100 या 500 रुपये जैसी छोटी या मनचाही रकम से निवेश नहीं किया जा सकता। खरीद एक्सचेंज के तय कॉन्ट्रैक्ट्स (1) ग्राम से लेकर 1 किलो तक) के हिसाब से ही करनी होती है।
- एक्सचेंज पर कारोबार होने का मतलब यह नहीं है कि लागत केवल सोने की कीमत तक सीमित है। इसमें ब्रोकरेज (सामान्य दिनों में 20 रुपये प्रति ऑर्डर), भौतिक निपटान शुल्क (लगभग 0.1%, 3% GST, शुल्कों पर 18% GST, सालाना भंडारण शुल्क और शिपिंग शुल्क जैसे खर्च जुड़ जाते हैं। साथ ही, संभावित शुल्कों को पूरा करने के लिए कंपनी मूल्य का 5% एडवांस रोकने की व्यवस्था भी करती है।