मेडिकल महंगाई से बचाएगा इन्फ्लेशन-लिंक्ड हेल्थ कवर: क्या आपका बीमा कल के भारी मेडिकल बिल के सामने टिक पाएगा?
गुरुग्राम में रहने वाले विनीत ने दो साल पहले 10 लाख रुपये का स्टैंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस कवर लिया था। तब विनीत को लगा था कि यह रकम आने वाले कई वर्षों के लिए अचूक सुरक्षा कवच है। बस हर साल आंख मूंदकर चुपचाप पुराना प्रीमियम भरते रहे।
पिछले महीने जब विनीत के पिता को अचानक सीने में तकलीफ हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, तो एक हफ्ते के इलाज और आधुनिक जांचों के बाद जब बिल काउंटर से फाइनल पर्ची आई, तो विनीत के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिल 14 लाख रुपये का था!
अगर विनीत की तरह आप भी सोचते हैं कि आपका पुराना हेल्थ कवर हर बीमारी से लड़ने के लिए काफी है, तो जरा ठहरिए!
- नी रिप्लेसमेंट, दिल की सर्जरी या आईसीयू में एक हफ्ते का खर्च अब से पांच साल पहले के मुकाबले लगभग दोगुना हो चुका है।
देश में सामान्य महंगाई भले ही पांच-छह फीसदी के आसपास ऊपर-नीचे होती हो, लेकिन मेडिकल इन्फ्लेशन बिल्कुल अलग ट्रैक पर दौड़ रही है- हर साल लगातार 12 से 14% की तेज रफ्तार से।
फिक्स्ड हेल्थ कवर का पुराना तरीका क्यों हो रहा है फेल?
इस लगातार चक्रवृद्धि बढ़ोतरी का मतलब यह है कि 10 लाख रुपये का जो हेल्थ इंश्योरेंस कवर कुछ साल पहले आपको परिवार के लिए एक बड़ा और सुरक्षित घेरा लगता था, वह जरूरत पड़ने पर आज बहुत छोटा साबित हो सकता है।
आधुनिक उपभोक्ता के लिए सिर्फ एक फिक्सड हेल्थ कवर खरीदकर भूल जाने का पुराना तरीका अब व्यावहारिक वित्तीय रणनीति नहीं रहा। यहीं पर इन्फ्लेशन-लिंक्ड हेल्थ कवर आपकी बचत के लिए एक शक्तिशाली ढाल बन सकता है।
क्या है इन्फ्लेशन-लिंक्ड कवर?
सीधे शब्दों में कहें तो, इन्फ्लेशन-लिंक्ड हेल्थ कवर आपकी आवश्यकताओं के साथ-साथ बढ़ने के लिए तैयार किया गया है। साल-दर-साल अपनी सुरक्षा को बिल्कुल उसी निश्चित राशि पर बनाए रखने के बजाय, यह पॉलिसी नियमित अंतराल पर आपके कवरेज को ऑटोमैटिक बढ़ा देती है, ताकि यह अस्पताल के बढ़ते शुल्कों और मानक वार्षिक मूल्य वृद्धि के साथ तालमेल बिठा सके।
पॉलिसी यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि आपका सुरक्षा कवच बढ़ते अस्पताल के खर्चों के अनुरूप बढ़े, ताकि आपकी सुरक्षा पीछे न छूटे।
यह महंगाई को कैसे मात देता है?
- इस कवर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पॉलिसीधारक से किसी भी सक्रिय मैन्युअल हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना अंडर-इंश्योरेंस की समस्या का समाधान करता है।
- यदि आपको एहसास होता है कि आपका 5 लाख रुपये का कवर बहुत छोटा है, तो आपको रिन्यूअल के दौरान मैन्युअल रूप से बीमा राशि बढ़ाने का अनुरोध करना होगा। इससे नई मेडिकल जांच, अतिरिक्त दस्तावेज और यदि इस बीच आपको हाइपरटेंशन या डायबिटीज हो गई है, तो संभावित रूप से रिजेक्शन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
- इन्फ्लेशन-लिंक्ड कवर इस अड़चन को दरकिनार कर देता है। यह आपकी स्वास्थ्य स्थिति या उम्र में बदलाव की परवाह किए बिना आपके कवरेज को ऑटोमैटिक रूप से लगातार विस्तारित होने की अनुमति देता है।
जानना जरूरी है : प्रीमियम व लागत की गणना
- आम गलतफहमी यह है कि ऑटोमैटिक रूप से बढ़ने वाली बीमा राशि का मतलब है कि प्रीमियम हर साल अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगेगा।
- बीमा राशि ऑटोमैटिक रूप से बढ़ सकती है- मान लीजिए सालाना 10% या 15%- लेकिन बेस प्रीमियम जरूरी नहीं कि उसी अनुपात में बढ़े।
- यह उम्र बढ़ने पर नया और महंगा स्टैंडअलोन कवर खरीदने की तुलना में अधिक किफायती हो सकता है।
इन्फ्लेशन-लिंक्ड हेल्थ कवर किसे लेना चाहिए?
- 30 या 40 वर्ष के वेतनभोगी लोग, जो ऐसी पॉलिसी चाहते हैं जो अगले 30 वर्षों तक उनकी सुरक्षा कर सके।
- जिन व्यक्तियों के परिवार में पुरानी बीमारियों का इतिहास है और जिन्हें आने वाले दशकों में स्वास्थ्य कवर की अधिक आवश्यकता पड़ सकती है।
पॉलिसी लेते समय किन जरूरी बातों का रखें ध्यान?
- जांच लें कि कवर में बढ़ोतरी वास्तविक मेडिकल इन्फ्लेशन इंडेक्स के आधार पर होती है या फिर किसी निश्चित वार्षिक प्रतिशत के तहत। 10% की निश्चित सालाना बढ़ोतरी का अनुमान लगाना और बजट बनाना आसान होता है।
- पॉलिसी के नियम-शर्तें ध्यान से पढ़ें। यदि कमरे के किराये की सीमा किसी कम राशि पर अटकी हुई है, तो स्वतः बढ़ने वाली बीमा राशि का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
- इन्फ्लेशन लिंक केवल एक हिस्से तक सीमित न होकर, अस्पताल के सभी प्रमुख खर्चों और अधिकारों पर समग्र रूप से लागू होना चाहिए।