एमएसएमई के लिए खुलेगा बड़े बाजार का रास्ता, डूबने से बचेेंगे डिस्कॉम और डेवलपर्स
- वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बुधवार को राहत पैकेज का लेखाजोखा पेश
- 45 दिनों के भीतर एमएसएमई क्षेत्र को सरकार से मिल जाएगी राशि
- 20 हजार करोड़ रूपये एनपीए से जूझ रही छोटी-मझोली कंपनियों को मिलेंगे
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सीतारमण ने कहा, सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाले इस क्षेत्र का आकार बड़ा करने से उत्पादन और आपूर्ति दोनों ही बढ़ेंगे। इसके लिए भारत में जारी होने वाले 200 करोड़ रुपये तक के टेंडर में वैश्विक कंपनियों को शामिल नहीं किया जाएगा और इसका सबसे ज्यादा लाभ छोटे और मझोले उद्योगों को होगा।
सरकार वैश्विक कंपनियों के साथ इनकी प्रतिस्पर्धा को कम करने के लिए सामान्य वित्तीय नियमों में भी बदलाव करेगी। उन्होंने कहा कि एमएसएमई की सबसे बड़ी समस्या नकदी संकट और मार्केटिंग का अभाव है। इसके लिए सरकार लगातार उनके बकाए पर नजर रखेगी और केंद्रीय कंपनियों से भुगतान दिलाने की कोशिश करेगी। ऐसी कंपनियों का बाजार बड़ा बनाने के लिए उन्हें ई-मार्केट से जोड़ा जाएगा जो व्यापार मेले और प्रदर्शनियों की जगह लेंगे।
- शेयर बाजार में होेंगे सूचीबद्ध
- राज्य लेंगे डिस्कॉम की कर्ज गारंटी
वित्तमंत्री ने भीषण नकदी संकट से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को भी 90 हजार करोड़ का भारी-भरकम कर्ज देने का एलान किया है। डिस्कॉम पर बिजली निर्माता कंपनियों का करीब 94 हजार करोड़ रुपये बकाया है। लॉकडाउन की वजह से डिस्कॉम की बिजली बिल वसूली में 80 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है, जिससे उनकी देनदारी का दबाव और बढ़ गया है।
राहत पैकेज में कहा गया है कि पॉवर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) के जरिये डिस्कॉम को दिया जाने वाला यह कर्ज बाद में वसूल किया जाएगा। इस कर्ज की पूरी गारंटी राज्य सरकारों को लेनी होगी।
- कर्ज के दबाव में नहीं आएगा इन्फ्रा क्षेत्र
सड़क, हाइवे, रेलवे और सरकारी निर्माणों को पूरा करने में जुटे ठेकेदारों को भी बड़ी राहत मिली है। वित्तमंत्री ने कहा है कि पीपीपी मॉडल पर हो रहे निर्माण के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के इन डेवलपर्स को सरकारी एजेंसियों की ओर से बैंक गारंटी दी जाएगी। साथ ही निर्माण कार्य पूरा करने के लिए भी अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
इतना ही नहीं रेरा के तहत पंजीकृत आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी सरकार 9 महीने का अतिरिक्त समय दे सकती है। इसमें से निर्माण की अवधि फिलहाल 6 महीने बढ़ा दी गई है और जरूरत पर तीन महीने और बढ़ाई जा सकती है। इस कदम इन्फ्रा क्षेत्र को मिला कर्ज एनपीए नहीं होगा और परियोजनाएं भी पूरी हो जाएंगी।
- एनबीएफसी की मजबूती बनेगी रियल एस्टेट का आधार
रियल एस्टेट परियोजनाओं को सबसे ज्यादा फंड उपलब्ध कराने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओें को 75 हजार करोड़ का राहत पैकेज मिला है। यह पैकेज अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
सरकार स्पेशल लिक्विडिटी फंड के तहत 30 हजार करोड़ की राशि प्राथमिक और द्वितीयक बाजार में इन कंपनियों के डेट पेपर बेचकर जुटाएगी। सरकार इन पेपर की पूरी गारंटी लेगी और यह कदम बाजार में स्थिरता लाने में भी मददगार होगा।
इसके अलावा 45 हजार करोड़ की राशि ऐसी कंपनियों के बांड बेचकर जुटाई जाएगी जिनकी रेटिंग थोड़ी कमजोर है। सरकार इनके बांड की 20 फीसदी राशि की गारंटी लेगी। इन कंपनियों में नकदी तरलता बढ़ने से रियल एस्टेट और एमएसएमई क्षेत्र को बड़े पैमाने पर कर्ज मिलने का रास्ता खुल जाएगा।