85 डॉलर पहुंच सकता है कच्चे तेल का दाम, रिकॉर्ड तोड़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें
- एशियाई विकास बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के चौतरफा प्रभावित होने की जताई आशंका
- 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल क्रूड के दाम पहुंचने का अनुमान जताया है विशेषज्ञों ने
- 2.4 करोड़ टन तेल खरीदा 2018-19 में भारत ने ईरान से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका द्वारा ईरान से तेल आयात की छूट खत्म करने के असर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें फिर आसमान छूने की आशंका है। भारत अपनी जरूरत का अधिकतर तेल आयात करता है, जिससे क्रूड का ऊंचा दाम उसकी अर्थव्यवस्था पर चौतरफा असर डाल सकता है। उसे खुदरा महंगाई में इजाफे के साथ चालू खाते का घाटा और राजस्व संतुलन में गड़बड़ी की भी चिंता सताने लगी है।
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की अर्थशास्त्री राधिका राव का कहना है कि क्रूड की कीमतों का सीधा असर भारत के इक्विटी बाजार पर पड़ेगा। इसमें गिरावट आने से विदेशी निवेश प्रभावित होगा और चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है।
तेल कीमतों का असर घरेलू बाजार में माल ढुलाई पर होने से खुदरा महंगाई फिर बेकाबू हो सकती है। यह सरकार के राजस्व गणित को प्रभावित करेगी और आरबीआई अपनी नीतिगत दरों में एक और कटौती करने से ठिठक सकता है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर क्रूड का ऊंचा दाम भारतीय अर्थव्यवस्था पर चौतरफा असर डाल सकता है।
ऐसे समझें असर का गणित
अगर क्रूड ऑयल में 10 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा होता है तो यह भारत के चालू खाते के घाटे (कैड) में जीडीपी के मुकाबले 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी करता है। इसी तरह, खुदरा महंगाई में क्रूड की हिस्सेदारी 2.3 फीसदी होती है और अगर कच्चे तेल का दाम 10 फीसदी बढ़ता है तो खुदरा महंगाई की दर 20 आधार अंक (0.20 फीसदी) बढ़ जाएगी। पिछले छह महीने में क्रूड ऑयल के दाम में 20 डॉलर प्रति बैरल यानी 40 फीसदी का उछाल आ चुका है।
सख्त हो सकता है आरबीआई
एडीबी ने बताया कि कैड और महंगाई के दबाव से रिजर्व बैंक एक बार फिर मौद्रिक समीक्षा में सख्त रुख अपना सकता है। इससे जून में होने वाली एमपीसी बैठक में एक बार फिर रेपो रेट में कटौती की उम्मीद लगाए बाजार को झटका लग सकता है। महंगा क्रूड रसायन, ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता उत्पाद, पेंट और लुब्रीकेंट उत्पादकों की लागत और संचालन खर्च भी बढ़ा सकता है, जिसका असर जीडीपी की रफ्तार पर भी होगा।
सरकार ने कर ली है तैयारी : प्रधान
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट कर बताया कि भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए तेल आपूर्ति के अन्य विकल्पों पर मंथन कर रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की जरूरतें पूरी करने के लिए हमारी पूरी तैयारी है। ईरान से आयात बंद कर हम अन्य तेल उत्पादक देशों सऊदी अरब, कुवैत, यूएई और मैक्सिको से खरीद बढ़ाएंगे।
सरकारी तेल कंपनी आईओसी के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से हम अन्य स्रोतों से तेल आयात बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। अमेरिका के इस कदम का असर अस्थायी रूप से तेल कीमतों पर पड़ेगा लेकिन हम स्पॉट मार्केट के जरिये खरीद कर इससे बचने का रास्ता अपनाएंगे।