नहीं घटी ईएमआई, निराश हुआ बाजार
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नोटबंदी के इस प्रतिकूल माहौल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति पर टकटकी लगाए लाखों कर्जदारों को निराश किया है। नोटबंदी के कारण सुस्त चल रहे बाजार, खाद्य पदार्थों की महंगाई और कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य की तेजी के कारण ब्याज दर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया गया है।
इससे कर्ज दर सस्ती होने की कोई उम्मीद नहीं रह गई है। इस वजह से मुंबई शेयर बाजार के निफ्टी और सेंसेक्स के सूचकांकों में भी गिरावट देखी गई। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने अक्टूबर में जब ब्याज दर में कटौती की थी, उसके बाद से रेपो दर 6.25 प्रतिशत ही बनी हुई है।
आरबीआई की बुधवार को मौद्रिक नीति समीक्षा में किया गया यह फैसला उद्योग जगत, शेयर बाजार तथा मकान-वाहन के कर्जदारों की अपेक्षाओं के प्रतिकूल रहा। हर किसी को उम्मीद थी कि इस बार रेपो दर में आधा फीसदी (50 बेसिक अंक) की कटौती की जाएगी जिससे व्यावसायिक बैंकों को केंद्रीय बैंक से कम दर पर कर्ज मिल पाएगा और इससे बैंक भी कर्ज लेने वालों की ईएमआई कम करने को बाध्य होंगे। लेकिन इसके उलट आरबीआई ने वित्त 2016-17 में जीडीपी (विकास दर) का अनुमान भी 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया।
महंगाई की आशंका के कारण ब्याज दरों में नहीं किया गया बदलाव
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि महंगाई की आशंका को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले अक्टूबर में ब्याज दरें 25 बेसिक अंक कम की जा चुकी हैं जिसके बाद इसमें कटौती की जरूरत नहीं रह गई है। फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन नेवतिया कहते हैं, ‘ऐसी परिस्थिति में रेपो दर आधा फीसदी कम होती तो औद्योगिक अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिल जाती।
नोटबंदी के बाद उपभोक्ता मांग प्रभावित हुई है और ब्याज दरों में कटौती से उपभोक्ताओं तथा उद्योग जगत को सकारात्मक संदेश मिलता।’ब्याज दरें अपरिवर्तित रहने का प्रतिकूल असर शेयर बाजार पर भी पड़ा और बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 155 अंक जबकि निफ्टी 41 अंक तक गिर गया। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य ने आरबीआई के फैसले पर आश्चर्य जताते हुए कहा, ‘यह फैसला संभवत: तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी फेडरल दर में वृद्धि की संभावना को देखते हुए किया गया है।’
नोटबंदी के बाद देश में बरकरार करेंसी संकट के बावजूद उर्जित पटेल ने अर्थव्यवस्था पर इसके दीर्घकालीन प्रभाव को खारिज कर दिया। हालांकि उन्होंने माना कि नोटबंदी के कारण थोड़े समय के लिए आर्थिक गतिविधियां बाधित रह सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इस वजह से खुदरा कारोबार, होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और असंगठित क्षेत्रों का कारोबार थोड़े समय के लिए प्रभावित होगा। पटेल के सकारात्मक विचार पर खुशी जाहिर करते हुए आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ चंदा कोचर ने कहा कि जहां तक तरलता और ब्याज दरों की बात है तो कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) दर में कटौती तथा तरलता प्रबंधित करने के अन्य उपायों का स्वागत है। इससे भविष्य में जमा और कर्ज पर ब्याज दरें कम होंगी। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को राहत देने के लिए 100 प्रतिशत सीआरआर वापस ले लिया है।