मोदी राज में एक बार फिर से पड़ी महंगाई की मार
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महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी पर फिर से इसकी मार पड़ी है। जून के महीने में खुदरा महंगाई दर 5.4 फीसदी हो गई है। मई महीने में खुदरा महंगाई दर 5.01 फीसदी थी। वहीं दूसरी ओर थोक महंगाई दर घटी है। मई में थोक महंगाई दर -2.36 फीसदी थी, जो जून में -2.4 फीसदी हो गई है।
खाने-पीने की चीजों की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं, ऐसे में खुदरा महंगाई दर को नियंत्रण में रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि आखिर रिजर्व बैंक कैसे ब्याज दरों में कटौती कर पाएगा।
अगर कीमतें कम नहीं होती हैं, तो ब्याज दरों में कटौती होना भी बहुत ही मुश्किल है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। वहीं विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अगर बारिश उम्मीद से कम हुई, तो भी महंगाई पर नियंत्रण करना मुश्किल हो जाएगा।
किसमें हुई कितनी बढ़ोत्तरी
सीएसओ के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले साल जून के मुकाबले इस साल दालों की कीमतों में 22.24 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं दूसरी ओर, जून में खाद्य महंगाई दर भी बढ़कर 5.48 फीसदी हो गई है, जो पिछले महीने 4.8 फीसदी थी।
सब्जियों की कीमतों में आए उछाल ने सब्जियों की महंगाई दर भी बढ़ा दी है। मई महीने सब्जियों की महंगाई दर 4.64 फीसदी थी, जबकि जून महीने में इसमें 5.73 फीसदी की तेजी आई है।