इन कारणों से पांच हफ्तों में एशियाई करेंसी में सिरमौर बना भारतीय रुपया
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पांच हफ्तों के भीतर भारतीय रुपये ने लंबी छलांग लगाई है। एशियाई देशों की करेंसी में जहां पांच हफ्ते पहले रुपये की स्थिति काफी कमजोर थी, वहीं अब यह सभी देशों में प्रचलित करेंसी का सिरमौर बन गया है।
यह बना सबसे बड़ा कारण
पांच हफ्ते पहले भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 72-75 के भाव से कारोबार कर रहा था। पुलवामा हमले के बाद भारत-पाक में युद्ध की आशंका के बीच रुपया काफी नीचे चला गया था। लेकिन अब बालाकोट पर हमले के बाद और कुछ सर्वे व ओपिनियन पोल में प्रंधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दुबारा सत्ता संभालने की वजह से रुपया काफी मजबूत हो गया है।
शेयर बाजार में लगातार तेजी
इन पांच हफ्तों में शेयर बाजार भी काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनावों की घोषणा के अगले दिन से शेयर बाजार लगातार बढ़त के साथ बंद हो रहा है। इससे निवेशकों को भी अच्छा रिटर्न मिल रहा है।
67 पर आ सकता है रुपया
बाजार एक्सपर्ट के मुताबिक भारतीय रुपया इस साल जून के अंत तक 67 रुपये प्रति डॉलर पर आ सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशक अभी तक 330 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुके हैं। यह अभी तक निवेश किए गए 560 करोड़ डॉलर का आधे से ज्यादा हिस्सा है। इसके साथ ही करीब 140 करोड़ डॉलर के बांड भी खरीदे जा चुके हैं।
272 सीटें जीत सकता है एनडीए
हाल ही में आए दो ओपिनियन पोल के मुताबिक एनडीए सरकार इस बार फिर से 272 के करीब का आंकड़ा पार कर सकती है। सात चरणों में हो रहे यह चुनाव 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 मई तक चलेंगे। मतगणना 23 मई को होगी। इस ओपिनियन पोल का असर बाजार में भी देखने को मिल रहा है।