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मांग में कमी से सराफे में गिरावट, चांदी भी 600 रुपये टूटी, छोटे शेयरों में दिखी बड़ी गिरावट

Fri, 30 Mar 2018 05:11 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 30 Mar 2018 05:11 PM IST
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gold prices down by subdued demand, small shares saw fallout this financial year
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स्थानीय आभूषण निर्माताओं तथा फुटकर विक्रेताओं की मांग में उल्लेखनीय कमी से शुक्रवार को सराफा बाजार में सोने का भाव 650 रुपये की गिरावट के साथ प्रति 10 ग्राम 31,300 रुपये रहा। औद्योगिकी इकाइयों तथा सिक्का निर्माताओं द्वारा उठान में कमी से चांदी की कीमत भी 600 रुपये की गिरावट के साथ प्रति किलोग्राम 39,150 रुपये रही।  व्यापारियों ने बताया कि घरेलू हाजिर बाजार में स्थानीय आभूषण निर्माताओं तथा फुटकर विक्रेताओं की मांग में कमी से सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। 
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31300 पर आया सोना
राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 फीसदी तथा 99.5 फीसदी शुद्ध सोने की कीमत 650 रुपये की गिरावट के साथ प्रति 10 ग्राम क्रमश: 31,300 रुपये तथा 31,150 रुपये रही। हालांकि आठ ग्राम की गिन्नी का भाव 24,800 रुपये पर स्थिर रहा। 
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चांदी की यह रही कीमत
सोने की कीमत की तर्ज पर ही हाजिर चांदी का भाव 600 रुपये की गिरावट के साथ प्रति किलोग्राम 39,150 रुपये रहा तथा साप्ताहिक डिलीवरी आधारित चांदी का भाव 660 रुपये की गिरावट के साथ प्रति किलोग्राम 38,320 रुपये रहा।
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इस साल छोटे शेयरों में दिखी बड़ी गिरावट

gold prices down by subdued demand, small shares saw fallout this financial year
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बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के छोटे शेयरों यानी, स्मॉलकैप और मिडकैप में बड़े शेयरों के मुकाबले अधिक गिरावट देखी जा रही है। छोटे शेयरों में इस साल अब तक 12 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। 2018 में अब तक स्मॉलकैप सूचकांक 11.62 फीसदी गिरावट के साथ 16,994.36 पर आ चुका है, जबकि मिडकैप सूचकांक 10.43 फीसदी गिरावट के साथ 15,962.59 पर आ चुका है। इस बीच बीएसई का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स इस साल अब तक महज 3.19 फीसदी गिरावट के साथ 32,968.68 पर चल रहा है।

सेंसेक्स ने 29 जनवरी 2018 को हालांकि रिकॉर्ड ऊपरी स्तर 36,443.98 को छू लिया था। स्मॉलकैप इंडेक्स ने 15 जनवरी 2018 को रिकॉर्ड ऊपरी स्तर 20,183.45 को छूआ था, जबकि मिडकैप सूचकांक ने नौ जनवरी 2018 को रिकार्ड ऊपरी स्तर 18,321.37 को छूआ था।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि घरेलू और विदेशी निवेशकों की मजबूत लिवाली के चलते 2017-18 के पहले 10 माह में बाजार में बेहतरीन तेजी थी। आखिर के दो माह में लंबी अवधि के पूंजी निवेश से होने वाले लाभ पर कर (एलटीसीजी) लगाए जाने और घरेलू व वैश्विक बांड की यील्ड बढ़ने के चलते लार्ज, मिड और स्मॉलकैप सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अनिश्चितता के समय में आम तौर पर छोटे शेयरों में अधिक गिरावट देखी जाती है।

सेंसेक्स में जनवरी में 6.36 फीसदी तेजी आई थी, जबकि फरवरी में यह 4.79 फीसदी लुढ़क गया और मार्च में भी इसमें 3.16 फीसदी गिरावट आई। 

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