13 साल के निचले स्तर पर पहुंचे कच्चे तेल के दाम
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भारत द्वारा खरीदे जाने वाले (इंडियन बास्केट) कच्चे तेल की कीमत 26 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर पहुंच गई है, जो कि पिछले 13 वर्षों का न्यूनतम स्तर है। जानकारों का कहना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल के बाजार में ईरान से प्रतिबंध हटना बताया जा रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बीते कारोबारी दिवस में इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत 26.40 डॉलर प्रति बैरल रही। इससे पहले यह स्तर जून 2003 में देखा गया था। विशेषज्ञ इसमें अभी और कमी के आसार जता रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान पर लगी आर्थिक पाबंदी हटने की वजह से वहां से कच्चे तेल का निर्यात बढ़ने के आसार हैं। प्रतिबंध के हटने के बाद वहां से भारत को रोजाना 5 लाख बैरल तक की आपूर्ति बढ़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 से परमाणु गतिविधि को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसे हाल ही में हटा लिया गया है। हालांकि भारत इन प्रतिबंधों को न मानकर संयुक्त राष्ट्र का निर्देश मानता रहा है, इसलिए यहां ईरान से कच्चे तेल आयात जारी था। हालांकि भुगतान संबंधी समस्या के चलते ईरान से सीमित मात्रा में ही कच्चा तेल आ पाता था। अब ऐसी कोई समस्या नहीं है। संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा ईरान से प्रतिबंध हटाने और उस पर से आर्थिक पाबंदी हटने से भारत को भी फायदा होगा।
सस्ते तेल से एशिया को नहीं मिलेगी राहत
कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों में मांग सुधरने के कोई खास आसार नहीं हैं। यह आकलन एचएसबीसी ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में पेश किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की गिरी हुई कीमतों से इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को फिलहाल कोई संजीवनी नहीं मिलने वाली है।
इससे सुस्त पड़ी आर्थिक रफ्तार की समस्या का कोई त्वरित हल मिलने की उम्मीद भी नहीं दिखती। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊपरी तौर पर ऐसा लगता है कि तेल के दाम घटने से खर्च में कमी आएगी और क्रय शक्ति में बढ़ोतरी होगी, पर यह बात इतनी सीधी और आसान नहीं है।