बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती के विरोध में उतरा बीएमएस
- बाजार से संबद्ध आर्थिक नीतियां भारत के लिए उपयुक्त नहीं
- सरकार निर्णय पर पुनर्विचार करे
- हालिया घोषणा से प्रधानमंत्री की जन धन योजना भी प्रभावित होगी
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संघ समर्थित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने शनिवार को छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती का विरोध किया और कहा कि बाजार से संबद्ध आर्थिक नीतियां भारत के लिए उपयुक्त नहीं हैं। बीएमएस के महासचिव बृजेश उपाध्याय ने कहा, ‘भारतीय मजदूर संघ छोटी और लंबी अवधि की बचत योजनाओं की ब्याज दर घटाने का विरोध करता है। हम मांग करते हैं कि सरकार को छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले आम आदमी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।’
बीएमएस ने सरकार से देश के आर्थिक मॉडल में बदलाव करने को कहा क्योंकि इसके अनुसार बाजार से संबद्ध आर्थिक नीतियां भारत के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उपाध्याय ने कहा, ‘ब्याज दरें घटने से आम आदमी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब वे बैंक में पैसे नहीं रखेंगे और बैंक पहले से ही बुरी स्थिति में हैं।’
संघ समर्थित इस मजदूर संगठन का रुख सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रति आलोचनात्मक रही है। बीएमएस ने कहा है कि ब्याज दर घटाने की हालिया घोषणा से प्रधानमंत्री की जन धन योजना भी प्रभावित होगी।
राहुल बोले, मध्य वर्ग पर मोदी का एक और प्रहार
पहले किसान, फिर गरीब और अब मध्य वर्ग मोदी सरकार के निशाने पर है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार पर मध्य वर्ग से राहत छीन लेने का आरोप लगाते हुए ट्वीट किया है। ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा है कि पीपीएफ केवीएफ की व्याज दरों में कटौती कड़ी मेहनत करके पैसा बचाने वाले मध्यवर्ग पर मोदी सरकार का दूसरा हमला है।
राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में तंज कसते हुए कहा है कि मोदी जी आपके लोग आपकी तरह इवैंट मैनेजमेंट पालिट्किस की तरफ देख रहे हैं।
केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को प्रमुख केन्द्रीय बचत योजनाओं से ब्याज दर में कटौती की है। इसमें पीपीएफ, किसान विकास पत्र, रिकरिंग डिपॉजिट, सुकन्या योजना समेत सभी प्रमुख बचत योजनाएं हैं।