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62 फीसदी महिलाओं को नहीं मिलता है पुरुषों के समान वेतन, कार्यस्थल पर इनका है वर्चस्व
Fri, 15 Mar 2019 07:28 PM IST
paliwal पालीवाल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: paliwal पालीवाल
Updated Fri, 15 Mar 2019 07:28 PM IST
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आजादी के इतने दिनों बाद भी कार्यस्थल पर लैंगिक समानता महज जुमला साबित हो रहा है। बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के एक सर्वे से पता चला है कि 62 फीसदी महिलाओं को कार्यस्थल वेतन समानता के मुद्दे को मान्यता नहीं दी जाती है। वेतन में भेदभाव का ज्यादा मामला वित्तीय और विनिर्माण क्षेत्र में देखने को मिला है।
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इस सर्वेक्षण के मुताबिक करीब 62 फीसदी युवतियों का मानना है कि उनके पास जो नौकरी है और उन्होंने जिस नौकरी की कल्पना की थी उसमें कोई समानता नहीं है। जब कार्य स्थल पर पुरुषों के समान वेतन की बात होती है तो इसमें भी लैंगिक भेदभाव की बात सामने आती है।
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इससे महिलाओं में हताशा का भाव आता है और उनका प्रदर्शन प्रभावित होता है। यही नहीं, इस वजह से उपजी हताशा की वजह से वह अपनी क्षमता से परे काम करने लगती है और उनका स्वास्थ्य खराब होता है।
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53 फीसदी महिलाएं मानती हैं कि उनका कार्यस्थल अभी भी पुरुष प्रधान है। यही नहीं, जैसे-जैसे महिलाएं उम्र दराज होती जाती हैं, उन्हें पुरुषों के लिए अनुपयुक्त काम या असाइनमेंट सौंप दिए जाते हैं। 22 से 33 साल की युवतियां और 33 से 44 वर्ष की महिलाएं मानती हैं कि पुरुष प्रधान कार्यस्थल में उनकी पदोन्नति का अवसर भी प्रभावित होता है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के इस सर्वेक्षण में 22 से 55 साल की महिलाओं को शामिल किया गया था।