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आरबीआई ने इन तीन वजहों से नहीं घटाई ब्याज दर

Wed, 07 Dec 2016 07:31 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Dec 2016 07:31 PM IST
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Three reasons why RBI went against the wind and kept repo rate unchanged
- फोटो : Getty

आरबीआई ने बुधवार को अपनी मौद्रिक समीक्षा नीति में ब्याज दरों में कोई बदलाव न करके फाइनेंशियल मार्केट्स को चौंका दिया। आरबीआई का यह ऐलान उस पूर्वनुमान के उलट है जिसमें कहा जा रहा था कि नीतिगत दरों में 25 बेसिस की कटौती की जा सकती है। अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा नीति में कटौती की घोषणा कर सकते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक कटौती न करने के निर्णय को लेकर दलाल स्ट्रीट के विश्लेषकों ने तीन कारण बताए हैं जिनकी वजह से ब्याज दरों में कटौती नहीं की गई।

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मुद्रास्फीति: रिजर्व बैंक ने इस बात पर गौर किया कि गेहूं, चना और चीनी जैसी खाने वाली चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। साथ ही ओपेक ब्लॉक ने भी जनवरी से कच्चे तेल का उत्पादन कम करने का निर्णय लिया है। इस वक्त अगर आरबीआई दरों में कटौती करता तो इससे महंगाई बढ़ सकती थी। 

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देखो और इंतजार करो

Three reasons why RBI went against the wind and kept repo rate unchanged

देखो और इंतजार करो: रिजर्व बैंक ने कहा है कि इस वक्त वह वेट ऐंड वॉच के मोड में है। क्योंकि नोटबंदी के प्रभाव को देखने के  लिए कुछ और समय चाहिए। आरबीआई का अनुमान है कि इस निर्णय से कैश आधारित बिजनेस रिटेल ट्रेड, होटल और रेस्टोरेंट और परिवहन सेक्टर में कुछ वक्त के लिए कमजोरी दिख सकती है। लेकिन आरबीआई को उम्मीद है कि नए नोटों का सर्कुलेशन तेज होने के बाद लोग नॉन कैश बेस्ड पेमेंट्स की ओर बढ़ेंगे।

वैश्विक अनिश्चितता: रिजर्व बैंक को आशंका है कि विश्व के वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने और कच्चे तेल की कीमत में  उतार-चढ़ाव के कारण इस वर्ष की चौथी तिमाही में महंगाई बढ़ने का दबाव हो सकता है। इस समय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बेहतर हो रहा है। जुलाई-अगस्त में यह व्यापार काफी नीचे चला गया था। आरबीआई ने कहा है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ी है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में धीमी रही है।

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