छह फरवरी को होगी RBI की अगली बैठक, ब्याज दरें स्थिर रख सकता है केंद्रीय बैंक
- खदरा महंगाई के आंकड़ों के चलते RBI रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करने को मजबूर हो सकता है।
- अगली समीक्षा बैठक छह फरवरी को होनी है।
- दिसंबर में खुदरा महंगाई 7.35 फीसदी रही।
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खदरा महंगाई के आंकड़ों के चलते रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अपनी अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत (रेपो) दरों में कोई बदलाव नहीं करने को मजबूर हो सकता है। दिसंबर में खुदरा महंगाई 7.35 फीसदी रही है और जनवरी में यह आठ फीसदी के स्तर से ज्यादा हो सकती है।
दिसंबर में खुदरा महंगाई 7.35 फीसदी
सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते दिसंबर में खुदरा महंगाई 7.35 फीसदी के साथ साढ़े पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। यह आरबीआई के चार फीसदी (इससे दो फीसदी ज्यादा या कम) के लक्ष्य से खासी ज्यादा है। साथ ही, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर 2019 में 2.59 फीसदी पर आ गई। इससे पिछले महीने नवंबर में यह 0.58 फीसदी थी।
दरें स्थिर रख सकता है आरबीआई
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट ‘इकोरैप’ ने कहा, ‘आरबीआई ने दिसंबर में भी रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया था, जब अक्तूबर में खुदरा महंगाई 4.62 फीसदी रही थी। अब दिसंबर में खुदरा महंगाई खासी ज्यादा हो गई है और जनवरी में इसके आठ फीसदी से ऊपर जाने का अनुमान है। ऐसे में आरबीआई अगली मौद्रिक नीति में दरें स्थिर रख सकता है।’ आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य रूप से खुदरा महंगाई पर गौर करता है। अगली समीक्षा बैठक छह फरवरी को होनी है।
पांच मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में की कटौती
फरवरी-अक्तूबर, 2019 के दौरान लगातार पांच मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में 135 आधार अंकों तक की कटौती करने के बाद आरबीआई ने दिसंबर में रेपो दर को 5.15 फीसदी के स्तर पर बरकरार रखा था। रिपोर्ट में खुदरा महंगाई के लिए सीएसओ की आकलन की पद्धति पर फिर से विचार किए जाने पर भी जोर दिया गया।
एसबीआई ने सोमवार को अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट इकोरैप में अनुमान जताया था कि आर्थिक सुस्ती की वजह से चालू वित्त वर्ष में करीब 16 लाख रोजगार कम आएंगे।