त्योहारों से पहले और सस्ता हो सकता है कर्ज, चार अक्तूबर को RBI करेगा एलान
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आरबीआई इस शुक्रवार को एक बार फिर प्रमुख नीतिगत दर में कटौती कर सकता है। केंद्रीय बैंक महंगाई के दायरे में रहने, सरकार के कॉर्पोरेट कर में कमी और त्योहारी सीजन के दौरान आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के क्रम में कर्ज को प्रोत्साहन देने के प्रयासों को देखते हुए इस साल लगातार पांचवीं बार यह फैसला ले सकता है।
शक्तिकांत दास की अगुवाई में होगी तीन दिवसीय बैठक
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) अपनी तीन दिवसीय बैठक के बाद शुक्रवार को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अपनी चौथी द्वैमासिक मौद्रिक नीति का एलान करेगी। रिजर्व बैंक (आरबीआई) जनवरी से अब तक चार बार में रेपो दर (अल्पकालिक उधारी दर) में 1.10 फीसदी की कटौती कर चुका है। अगस्त में हुई पिछली बैठक में एमपीसी ने असामान्य तौर पर अपनी बेंचमार्क उधारी दर 35 आधार अंक यानी 0.35 फीसदी घटाकर 5.40 फीसदी कर दी थी।
इससे पहले आरबीआई नीतिगत दरों में कमी का फायदा ग्राहकों को जल्द से जल्द देने के लिए बैंकों को एक अक्तूबर से अपने कर्ज उत्पादों को रेपो दर जैसे बाह्य बेंचमार्क से जोड़ने का आदेश दे चुका है। बैठक से पहले दास की अगुआई वाली वित्तीय स्थायित्व और विकास परिषद (एफएसडीसी) उप समिति मौजूदा व्यापक आर्थिक परिदृश्य का जायजा लेगी।
हाल में आरबीआई गवर्नर ने कहा था कि सरकार के पास वित्तीय प्रोत्साहन देने की गुंजाइश खासी कम है, जिससे आरबीआई द्वारा अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ज्यादा मौद्रिक राहत दिए जाने की उम्मीद जगी थीं।
0.25 फीसदी की हो सकती है कटौती
सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, अरब और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा कि सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में ढांचागत बदलावो को आगे बढ़ाने के लिए पिछले कुछ हफ्तों के दौरान कई कदमों का एलान किया है। हालांकि इनमें से ज्यादा आपूर्ति संबंधी दबाव कम करने से जुड़े प्रावधान हैं, जबकि सबसे बड़ी चुनौती मांग की है। उन्होंने कहा, ‘हम उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक सरकार के वित्तीय प्रोत्साहनों पर विचार करते हुए अगले सप्ताह रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.15 फीसदी कर सकता है।’
आईडीएफसी एएमसी के प्रमुख (नियत आय) सुयश चौधरी ने कहा, ‘हमें पहले भी उम्मीद थी और आगे भी कर रहे हैं कि रेपो दर घटकर पांच से 5.25 फीसदी के बीच रहेगी।’ उन्होंने कहा कि वैश्विक और स्थानीय परिदृश्य में कमजोरी दिख रही है, इसलिए मौद्रिक नीति में नरमी जारी रहने की उम्मीद है।