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RBI Monetary Policy: अगले हफ्ते RBI कर सकता है बड़ा एलान, रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी संभव

Sat, 02 Oct 2021 01:42 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Sat, 02 Oct 2021 01:42 PM IST
सार

सिटीग्रुप के अनुमान के अनुसार, केंद्रीय बैंक अगले सप्ताह रिवर्स रेपो रेट बढ़ा सकता है। फिलहाल रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर है। इसमें 15 आधार अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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RBI monetary policy Citi expects reverse repo may hike by 15 bps on October 8
आरबीआई - फोटो : pixabay

विस्तार

अगले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को लेकर बड़ा एलान कर सकता है। केंद्रीय बैंक आठ अक्तूबर को रिवर्स रेपो रेट पर फैसला कर सकता है। इसे 3.35 फीसदी से बढ़ाकर 3.50 फीसदी पर लाया जा सकता है।

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चार फीसदी पर स्थिर रेपो रेट
आठ अगस्त को हुई पिछली बैठक में केंद्रीय बैंक ने लगातार सातवीं बार रेपो रेट को चार फीसदी पर बरकरार था। यानी ग्राहकों को ईएमआई या लोन की ब्याज दरों पर राहत नहीं मिली थी। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट भी 4.25 फीसदी पर स्थिर है। रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर स्थिर रखा गया। इसके साथ ही बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया था। यह 4.25 फीसदी पर है। 
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रिवर्स रेपो रेट को 15 आधार अंक बढ़ोतरी की उम्मीद
सिटीग्रुप के अनुसार, केंद्रीय बैंक अगले महीने रिवर्स रेपो रेट बढ़ा सकता है। पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई दिसंबर में इसको बढ़ाने का एलान करेगा। सिटीग्रुप के अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती और बकार जैदी ने एक नोट में कहा है कि केंद्रीय बैंक रिवर्स रेपो रेट को 15 आधार अंक बढ़ा सकता है। हालांकि रिजर्व बैंक की नीति वृद्धि को समर्थन करने वाली ही रहेगी।
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क्या है रेपो रेट?
मालूम हो कि रेपो रेट वह रेट होता है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यक बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है। इसे रिप्रोडक्शन रेट या रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट के कम होने का अर्थ है कि बैंक से मिलने वाले सभी तरह के लोन ग्राहकों के लिए सस्ते हो जाएंगे और यदि यह दर बढ़ती है तो सभी तरह के लोन- होम लोन, व्हीकल लोन, पर्सनल लोन, आदि महंगे हो जाते हैं। 


क्या है रिवर्स रेपो रेट?
दरअसल बैंकों के पास जो अतिरिक्त नकदी होती है, वे उसे केंद्रीय बैंक के पास जमा करा देते हैं। इस जमा राशि पर बैंकों को ब्याज का लाभ मिलता है और जिस दर पर बैंकों को आरबीआई में उनके धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। यह बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आता है। 

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