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नौकरीपेशा लोगों को खुशखबरी दे सकते हैं जेटली

Fri, 27 Feb 2015 03:49 PM IST
Updated Fri, 27 Feb 2015 03:49 PM IST
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Budget might bring increased Tax Exemption for Salaried And Middle Class

वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट दिल तोड़ने वाला पेश करेंगे या मुस्कान देने वाला, यह सवाल सबके जेहन में है। इस जिज्ञासा के बीच मध्य वर्ग और वेतनभोगियों की निगाहें बजट का इंतजार इस उत्सुकता में कर रही हैं कि बजट उन्हें करों में किस प्रकार की राहत देगा।

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फिलहाल उनके लिए खुशी की बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन आयकर में छूट का दायरा बढ़ाने और निवेश पर मिलने वाली कर छूट को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाने के समर्थन में हैं। महंगाई की तगड़ी मार जेब पर पड़ने के बाद लोग बजट से राहत की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनके हाथ में कुछ और पैसे आ सकें।
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वित्तमंत्री जेटली भी समय-समय पर कह चुके हैं की वह आम लोगों पर ज्यादा कर लगाए जाने के खिलाफ हैं। वह चाहते हैं कर की दरें कम हों। इससे लोगों के हाथों में खर्च के लिए अधिक पैसे आएंगे। इससे मांग में बढ़ोतरी होगी, जो अर्थव्यवस्था में तेजी लाएगी।

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पिछले बजट में बढ़ी थी करछूट की सीमा

Budget might bring increased Tax Exemption for Salaried And Middle Class

पिछले बजट में उन्होंने निवेश पर मिलने वाली करछूट में 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 1.5 लाख रुपये करने की घोषणा भी की थी, पर लोगों को इसका बहुत लाभ नहीं दिख रहा है। अब आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भी इसे बढ़ाने की वकालत की है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले बजट में बचत पर मिलने वाली करछूट की सीमा में 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी की थी। अब सवाल यह उठता है कि क्या इसे और बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक यह सीमा एक लाख रुपये रहने के चलते अभी पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पाया है। ऐसे में हो सकता है कि इसमें बढ़ोतरी करनी पड़े।

राजन ने कहा कि रिजर्व बैंक वित्तीय सुदृढ़ता के ठोस उपाय होते देखना चाहेगा। सरकार के व्यय का रुख लक्ष्य से ज्यादा सब्सिडी के बजाय अधिक और बेहतर ढंग से पूंजीगत खर्च की ओर होना चाहिए। ऐसा करना एक अच्छा कदम होगा।

महंगाई पर काबू पाने में होगा मददगार

Budget might bring increased Tax Exemption for Salaried And Middle Class

यह महंगाई पर काबू पाने में भी मददगार होगा, क्योंकि सरकार के पूंजीगत व्यय से आपूर्ति में कमी से भी निपटने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक सब्सिडी के पूरी तरह से खिलाफ नहीं है। समाज में कई ऐसे वर्ग हैं, जिन्हें इसकी जरूरत है।

गौरतलब है कि वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के लिए इस समय देश में घरेलू बचत के स्तर में आई भारी गिरावट बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। यह वर्ष 2008 के 36.9 फीसदी से गिरकर बीते वर्ष 30 फीसदी पर आ गई। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आगामी बजट में वित्त मंत्री इसे बढ़ाने के हर संभव प्रयास करेंगे।

1 करोड़ से अधिक की एफडी पर ज्यादा ब्याज

Budget might bring increased Tax Exemption for Salaried And Middle Class

बीते दिनों एक करोड़ रुपये से अधिक के सावधि जमा (एफडी) पर ज्यादा ब्याज देने के मंजूरी इसी दिशा में उठाया गया कदम है। उम्मीद की जा रही है कि बजट में छोटी घरेलू बचत को भी बढ़ावा देने संबंधी कुछ घोषणाएं वित्त मंत्री की ओर से की जा सकती हैं।

सबसे ज्यादा उम्मीद पीएफ, पीपीएफ, न्यू पेंशन स्कीम बीमा और इक्विटी लिंक्ड निवेश में निवेश पर मिलने वाली कर राहत को बढ़ाने पर टिकी हैं। फिलहाल धारा 80 सी के तहत ऐसी योजनाओं में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश को करदाता की करयोग्य आय से घटा दिया जाता है। इससे जहां करदाताओं को राहत मिलती है, वहीं बचत को भी बढ़ावा मिलता है।

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