PMC बैंक केसः HDIL के मालिकों के खिलाफ ईडी ने दाखिल की सात हजार पन्नों की चार्जशीट
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पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक फ्रॉड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को सात हजार पन्नों की चार्जशीट विशेष पीएमएलए कोर्ट में दाखिल कर दी है। ईडी ने इस केस में एचडीआईएल के मालिक राकेश वधावन और उसके बेटे सारंग वधावन को मुख्य तौर पर दोषी माना है।
ईडी ने पीएमएलए कानून के कई प्रावधानों के तहत वधावन बाप-बेटे को गिरफ्तार किया हुआ है। इन दोनों को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद ईडी ने आगे की जांच के लिए अक्तूबर में इन दोनों को गिरफ्तार किया था। कंपनी ने बैंक से करीब 6700 करोड़ रुपये का लोन ले रखा है। सितंबर में भारतीय रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक के खाताधारकों पर पैसा निकालने पर रोक लगा दी थी। बैंक के पास करीब 16 लाख खाताधारक हैं। बैंक का कुल नौ हजार करोड़ रुपये का लोन है, जबकि 11, 610 करोड़ रुपये जमा हैं। इस मामले में अभी तक बारह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें पीएमसी बैंक के कर्मचारी भी हैं।
इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बैंक की आंतरिक जांच टीम ने कहा है कि पीएमसी बैंक के रिकॉर्ड से कुल 10.5 करोड़ रुपये नकद गायब है।
चेक जमा किए बिना दिए गए पैसे
टीम को घोटाले में आरोपी रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और इसकी संबंधित कंपनियों द्वारा जारी किए गए कई चेक मिले हैं। हैरानी की बात ये है कि कंपनी द्वारा जारी किए गए ये चेक बैंक में जमा ही नहीं किए गए। तब भी उन्हें नकद दे दिया गया है।
50-55 लाख रुपये का कोई हिसाब नहीं
बैंक की आंतरिक जांच टीम के अनुसार उन्हें जो चेक मिले हैं, वे 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं। बाकी के 50-55 लाख रुपये का कोई हिसाब नहीं है। पिछले दो साल में बैंक के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय थॉमस को एचडीआईएल और ग्रुप की कंपनियों ने चेक भेजे थे, जो जमा नहीं किए गए लेकिन कंपनी को पैसे दे दिए गए थे। संभावना है कि थॉमस ने 50-55 लाख रुपये अपने पास रख लिए हों।
कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा एचडीआईएल को
मामले में एक सूत्र ने बताया कि, 'यह आश्चर्य की बात है कि बैंक की तरफ से बांटे गए कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक ही कंपनी को दिया गया। उसने कहा कि हो सकता है कि बैंक साल 2008 से ही फर्जीवाड़ा कर रहा है। पिछले 10 सालों से हाउसिंग कंपनी एचडीआईएल को पैसे दिलाने के लिए बैंक ने कईं डमी खाते खोले थे।
बैंक के चेयरमैन वरयाम सिंह एचडीआईएल के बोर्ड में शामिल थे। बैंक द्वारा एचडीआईएल को रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तौर पर कितना कर्ज दिया गया, इसका खुलासा नहीं किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है।