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आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने को LIC बोर्ड ने दी मंजूरी, सेबी के पाले में गेंद
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 16 Jul 2018 04:07 PM IST
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सरकारी क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के द्वारा 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने को कंपनी के बोर्ड ने अपनी मंजूरी दे दी है। बीमा नियामक इरडा द्वारा हरी झंडी दिए जाने के बाद अब एलआईसी बाजार नियंत्रक सेबी के पास जाएगी। सेबी से मंजूरी मिलने के बाद एलआईसी के पास आईडीबीआई बैंक का मालिकाना हक पहुंच जाएगा।
इस तरह एलआईसी खरीदेगा शेयर
तरजीही शेयर आवंटन के जरिए आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी तक हिस्सेदारी बढ़ाकर उसका अधिग्रहण करने के लिए एलआईसी के बोर्ड ने सोमवार को बीमा कंपनी को मंजूरी दे दी। यह बात सोमवार को आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने कही।
गर्ग एलआईसी के बोर्ड में भी हैं। कर्ज में डूबा बैंक पूंजी जुटाने के लिए सरकारी कंपनी एलआईसी को तरजीही शेयर जारी करेगा। गर्ग ने कहा कि पूरी संभावना है कि तरजीही शेयर आवंटन का मार्ग अपनाया जा सकता है। बैंक को पूंजी की जरूरत है। वह तरजीही शेयर जारी करेगा। यही तरीका हो सकता है।
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सरकार से खरीदने पर बैंक को नहीं मिलेगी पूंजी
यहां हुई बैठक के बाद उन्होंने कहा कि दूसरा तरीका यह है कि वे सरकार से खरीद सकती है, लेकिन इससे आईडीबीआई बैंक को पूंजी नहीं मिलेगी। अब अगला कदम यह होगा कि जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बाजार नियामक सेबी से संपर्क करेगी, क्योंकि आईडीबीआई एक सूचीबद्ध कंपनी है।
इस अधिग्रहण के लिए बीमा नियामक इरडा ने पहले ही मंजूरी दे दी है। आईडीबीआई बैंक को भी अपनी हिस्सेदारी एलआईसी को बेचने के लिए अपने बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी।
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इस तरह एलआईसी खरीदेगा शेयर
तरजीही शेयर आवंटन के जरिए आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी तक हिस्सेदारी बढ़ाकर उसका अधिग्रहण करने के लिए एलआईसी के बोर्ड ने सोमवार को बीमा कंपनी को मंजूरी दे दी। यह बात सोमवार को आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने कही।
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गर्ग एलआईसी के बोर्ड में भी हैं। कर्ज में डूबा बैंक पूंजी जुटाने के लिए सरकारी कंपनी एलआईसी को तरजीही शेयर जारी करेगा। गर्ग ने कहा कि पूरी संभावना है कि तरजीही शेयर आवंटन का मार्ग अपनाया जा सकता है। बैंक को पूंजी की जरूरत है। वह तरजीही शेयर जारी करेगा। यही तरीका हो सकता है।
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सरकार से खरीदने पर बैंक को नहीं मिलेगी पूंजी
यहां हुई बैठक के बाद उन्होंने कहा कि दूसरा तरीका यह है कि वे सरकार से खरीद सकती है, लेकिन इससे आईडीबीआई बैंक को पूंजी नहीं मिलेगी। अब अगला कदम यह होगा कि जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बाजार नियामक सेबी से संपर्क करेगी, क्योंकि आईडीबीआई एक सूचीबद्ध कंपनी है।
इस अधिग्रहण के लिए बीमा नियामक इरडा ने पहले ही मंजूरी दे दी है। आईडीबीआई बैंक को भी अपनी हिस्सेदारी एलआईसी को बेचने के लिए अपने बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी।
सरकार की है 85 फीसदी हिस्सेदारी
आईडीबीआई बैंक में केन्द्र सरकार की 85 फीसदी हिस्सेदारी है और वित्त वर्ष 2018 के दौरान केन्द्र सरकार ने बैंक की 10,610 करोड़ रुपये से मदद भी की थी। आई़बीआई देश के बीमारू सरकारी बैंकों में सर्वाधिक एनपीए अनुपात वाला बैंक है।
मार्च में खत्म हुई तिमाही में आईडीबीआई बैंक गैर निष्पादित संपत्तियों के कारण फंसा कर्ज बढ़कर 55,600 करोड़ रुपये होने की समस्या से जूझ रहा है। मार्च को समाप्त तिमाही में बैंक ने 5,663 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया था।
23 हजार करोड़ की पूंजी
फिलहाल बैंक की बाजार पूंजी 23,000 करोड़ रुपये है। बैंक की रियल एस्टेट और निवेश पोर्टफोलियो 20,000 करोड़ रुपये की है। सूत्रों ने कहा कि इस स्थिति में बैंक का वर्तमान मूल्य आकर्षक नहीं है और यह सिर्फ सरकारी रणनैतिक निवेशकों के लिए माकूल है।
मार्च में खत्म हुई तिमाही में आईडीबीआई बैंक गैर निष्पादित संपत्तियों के कारण फंसा कर्ज बढ़कर 55,600 करोड़ रुपये होने की समस्या से जूझ रहा है। मार्च को समाप्त तिमाही में बैंक ने 5,663 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया था।
23 हजार करोड़ की पूंजी
फिलहाल बैंक की बाजार पूंजी 23,000 करोड़ रुपये है। बैंक की रियल एस्टेट और निवेश पोर्टफोलियो 20,000 करोड़ रुपये की है। सूत्रों ने कहा कि इस स्थिति में बैंक का वर्तमान मूल्य आकर्षक नहीं है और यह सिर्फ सरकारी रणनैतिक निवेशकों के लिए माकूल है।