ब्याज दर ऊंची हो तो सुस्त पड़ जाएगी विकास दर: जेटली
- मौजूदा 8.7 फीसदी की कर मुक्त ब्याज दर वास्तव में बैठती है 12.13 फीसदी
- यदि जमा दर 12.5 फीसदी हुई तो ऋण दर बैठेगी 14-15 प्रतिशत
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पीपीएफ और डाकघर की लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की कटौती के हालिया निर्णय को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उचित ठहराया है। उनका कहना है कि यहां ब्याज दरों का स्तर असाधारण रूप से ऊंचा है और यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं तो अर्थव्यवस्था की विकास दर के सुस्त पड़ने का खतरा है।
जेटली ने कहा कि लघु बचत योजनाओं पर मौजूदा 8.7 फीसदी की कर मुक्त ब्याज दर वास्तव में 12.13 फीसदी बैठती है। इस हिसाब से कर्ज पर ब्याज दर 14-15 फीसदी तक होगी क्यों कि लोन पर ब्याज डिपोजिट पर मिलने वाले ब्याज दर से कुछ ऊपर ही रहता है।
उन्होंने कहा कि लघु बचतों पर भारत की ब्याज दरें असाधारण रूप से ऊंची हैं। ब्याज दर ऊंची होने से अर्थव्यवस्था की विकास दर अवरूद्ध होती है।
ऋण पर ब्याज दर 14-15 फीसदी हो तो सुस्त हो जाएगी अर्थव्यवस्था
पीपीएफ पर मिलने वाली 8.7 फीसदी की कर मुक्त ब्याज दर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें लाभ को भी मिलाकर देखें तो इस पर ब्याज दर वास्तव में 12.5 से 13 फीसदी बैठती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में आपको कहां 12.5 फीसदी ब्याज का प्रतिफल मिलता है। इसलिए यदि जमा दर 12.5 फीसदी हुई तो ऋण दर क्या होगी, 14-15 प्रतिशत। यदि ऋण पर ब्याज दर 14-15 फीसदी हो तो आप दुनिया की सबसे सुस्त अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।
जेटली ने कहा कि किसी भी देश में ऐसा नहीं हो सकता कि ऋण पर ब्याज दर जमा पर मिलने वाले दरों से कम हों। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। उल्लेखनीय है कि सरकार ने बीते 18 मार्च ही पीपीएफ और डाकघर की जमाओं पर ब्याज दर में कटौती की घोषणा की थी।