भारत में निजी बैंकिंग बंद करेगा एचएसबीसी
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ग्लोबल स्तर पर बैंकिंग सेवाए मुहैया कराने वाले एचएसबीसी बैंक ने भारत में अपना निजी बैंकिंग कारोबार बंद करने की घोषणा की है।
एचएचबीसी भारत में वेल्थ मैनजमेंट सेवाओं की पेशकश कर रही है। बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि यहां हमारे निजी बैंकिंग परिचालन की रणनीतिक समीक्षा के बाद हमने इस कारोबार को बंद करने का फैसला किया है।
अधिकारियों का कहना है कि शांतनु अंबेडकर की अगुवाई वाले डिवीजन में 70 कर्मचारी काम कर रहे हैं। अब इसे रिटेल बैंक में समायोजित किया जाएगा। प्रवक्ता ने कहा कि कारोबार मार्च 2016 तक बंद किया जाएगा और चुनिंदा ग्राहकों को एचएसबीसी प्रीमियर प्लेटफार्म पर शिफ्ट होने का विकल्प दिया जाएगा।
एचएसबीसी प्रीमियर एचएसबीसी का ग्लोबल रिटेल बैंकिंग एंड वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफार्म है। उनका कहना है कि इस कदम से बैंक का कारोबार सरल होगा और साथ ही सतत विकास के लक्ष्य को पाने में भी आसानी होगी। हालांकि बैंक ने इस बात की जानकारी नहीं दी है कि वह भारत में अपना कारोबार क्यों समेट रहा है।
ये बैंक भी हो चुके हैं बंद
एक दौर में जब भारत की आर्थिक विकास दर 8 से 9 फीसदी थी, कई बैंकों ने यहां अपनी शाखाएं खोलीं थीं।
लेकिन इनमें से ज्यादातर बैंकों को अब मुनाफा कमाने में संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि निजी बैंकिंग को बंद करने का कदम लागत कम करने के लिए नही है।
गौरतलब है कि इससे पहले एचएसबीसी बैंक लागत को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों को निकाल चुका है। एचएसबीसी से पहले, आरबीएस और मॉर्गन स्टेनली ने एशिया से अपना व्यापार समेटा लिया था।
इसी साल जून में कंपनी के मुख्य अधिकारी स्टुअर्ट गुलिवर ने घोषणा की थी कि कंपनी रिस्ट्रक्चरिंग के तहत हजारों की संख्या में नौकरियों में कटौती करेगी। भारत में 32 हजार लोग एचएसबीसी की कॉर्पोरेट, खुदरा और पूंजी निवेश बैंकिंग सर्विसेज से जुड़े हैं।