अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों पर सरकार कसेगी नकेल, नहीं कहलाएंगे 'बैंक'
सरकार देश भर में कार्यरत अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों पर नकेल कसने जा रही हैं। अभी तक यह बैंक मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होते हैं। सरकार ने इन बैंकों को स्मॉल फाइनेंस बैंक में तब्दील होने और आरबीआई के तहत आने के लिए कहा था, जिसका पालन नहीं हुआ था।
बैंकों का सरकार करना चाहती है वर्गीकरण
केंद्र सरकार यह कदम उठाकर के बैंकों का सही में वर्गीकरण करना चाहती है, ताकि लोगों को पता रहे कि कौन सा बैंक है। क्योंकि बैंक आरबीआई के नियमों का पालन करते हुए कार्य करते हैं। हालांकि अभी भी देश में कार्यरत कई अर्बन बैंक आरबीआई के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
सितंबर 2018 में दिया था यह आदेश
सितंबर 2018 में आरबीआई ने कई अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों को स्मॉल फाइनेंस बैंक में तब्दील होने के लिए कहा था। हालांकि ज्यादातर बैंकों ने इसको स्वीकार नहीं किया, क्योंकि यह फिर बैंक किसी को भी लोन नहीं दे सकते थे। पीएमसी बैंक में हुए घोटाले के बाद अब वित्त मंत्रालय ने बैंक शब्द का प्रयोग नहीं करने का सुझाव दिया है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि को-ऑपरेटिव अपने आप को बैंक कहते हैं। इसलिए लोग भी उनको असल बैंक समझकर के ट्रांजेक्शन को सुरक्षित समझते हैं। को-ऑपरेटिव बैंकों का महत्व काफी बढ़ गया है, क्योंकि राष्ट्रीयकृत बैंक छोटे लोगों को लोन देने में काफी सजग हो गए हैं।