Facts: 10,000 के नोट भी छाप सकता है RBI
रिजर्व बैंक के 80 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम में मोदी ने नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले कागज और स्याही के स्वदेशी होने की इच्छा जताई है।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एस एस मूंदड़ा ने कहा कि करेंसी नोट का कागज तैयार करने वाले कारखाने पर काम जल्द ही खत्म होने वाला है। जल्द ही देश में तैयार कागज पर ही नोट छपेंगे।
आइए जानते हैं भारत की करंसी रुपए के बारे में कुछ खास बातें-
रिजर्व बैंक के अनुसार, भारत हर साल 2,000 करोड़ करेंसी नोट छापता है। इसकी 40 प्रतिशत लागत कागज और स्याही के आयात में जाती है। ये कागज जर्मनी, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों से आयात किया जाता है।
पहले बैंक छापते थे नोट
पेपर करंसी छापने की शुरुआत 18वीं शताब्दी में हुई। सबसे पहले बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास जैसे बैंकों ने पेपर करंसी छापी थी।
पेपर करंसी एक्ट 1861 के बाद करंसी छापने का पूरा अधिकार भारत सरकार को दे दिया गया। 1935 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना तक भारत सरकार करंसी छापती रही, जिसके बाद रिजर्व बैंक ने यह जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली।
5,000 का भी छपा था नोट
1938 में 10,000 रुपए का नोट भी छापा गया था। रिजर्व बैंक ने जनवरी 1938 में पहली पेपर करंसी छापी थी, जो 5 रुपए का नोट था।
इसी साल 10 रुपए, 100 रुपए, 1,000 रुपए और 10,000 रुपए के नोट भी छापे गए। हालांकि, 1946 में 1,000 और 10,000 हजार के नोट बंद कर दिए गए।
1954 में एक बार फिर से 1,000 और 10,000 रुपए के नोट छापे गए। इस बार 5,000 रुपए के नोट भी छापे गए। हालांकि, 1978 में इसे बंद कर दिया गया।
RBI छाप सकता है 10,000 का नोट
मौजूदा समय में रिजर्व बैंक 10 रुपए, 100 रुपए, 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट छाप सकता है। हाल ही में 1 रुपए के नोट की भी छपाई शुरू हुई है।
इससे पहले 1 रुपए, 2 रुपए और 5 रुपए के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी, क्योंकि इनके लिए सिक्कों को बाजार में उतारा गया था।
आपको बता दें कि रिजर्व बैंक के पास अभी भी 10,000 रुपए के नोट छापने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 में थोड़े संशोधन करने होंगे।