बैंकों के विलय से अर्थव्यवस्था और बैंकिंग पर क्या होगा असर, जानें हर सवाल का जवाब
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- केंद्र सरकार ने 10 बैंकों के विलय का फैसला किया, कुल सरकारी बैंकों की संख्या अब 12 रह जाएगी
- इस फैसले के परिणामस्वरूप देश के बड़े सार्वजनिक बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता करने में सक्षम हो जाएंगे।
- देश की बैंकिंग प्रणाली भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में योगदान दे सकेगी।
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विस्तार
पिछले साल बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ हुए देना बैंक और विजया बैंक के सफलतापूर्वक विलय के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था की गति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय करने की घोषणा की है। बैंकों का विलय करके चार बड़े बैंक बनाए जाएंगे। इस विलय से सरकार, कारोबार और आम बैंक ग्राहकों पर क्या और कैसा प्रभाव पड़ेगा। केंद्र सरकार के इस कदम के परिणामस्वरूप देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks-PSBs) की कुल संख्या 18 से घटकर 12 हो जाएगी।
किन बैंकों का होगा विलय?
1. ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (Oriental Bank of Commerce) तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (United Bank of India) का विलय पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) में।
- विलय के पश्चात् पंजाब नेशनल बैंक भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्रक बैंक बन जाएगा।
- इसके अतिरिक्त बैंक शाखाओं के मामले में भी यह बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक होगा, जिसकी 11,437 शाखाएं होंगी।
- तीनों बैंकों के विलय के पश्चात् पंजाब नेशनल बैंक का कुल कारोबार 17.95 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा।
2. सिंडिकेट बैंक (Syndicate Bank) का विलय केनरा बैंक (Canara Bank) में।
- इस विलय के पश्चात् केनरा बैंक देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।
- इस बैंक का कुल कारोबार 15.20 लाख करोड़ रुपए का होगा एवं इसकी कुल शाखाओं की संख्या 10,342 हो जाएगी।
3. आंध्रा बैंक (Andhra Bank) तथा कॉर्पोरेशन बैंक (Corporation Bank) का विलय यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) में।
- विलय के पश्चात् यूनियन बैंक ऑफ इंडिया देश का पाँचवां सबसे बड़ा बैंक होगा।
- इसका कुल कारोबार 14.59 लाख करोड़ रुपए का होगा एवं इसकी कुल शाखाओं की संख्या 9,609 होगी।
4. इलाहाबाद बैंक (Allahabad Bank) का विलय इंडियन बैंक (Indian Bank) में।
- विलय के पश्चात् यह देश का सातवां सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।
- इसका कुल कारोबार 8.08 लाख करोड़ रुपए का होगा एवं इसकी शाखाओं की कुल संख्या 6,104 होगी।
विलय के कारण
केंद्र सरकार के अनुसार, देश के 10 बैंकों का विलय करने से बैंकों के कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी और उनका तुलन-पत्र (Balance sheet) भी मजबूत होगी। इस फैसले के परिणामस्वरूप देश के बड़े सार्वजनिक बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता करने में सक्षम हो जाएंगे। देश की बैंकिंग प्रणाली भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में योगदान दे सकेगी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी और वे ज्यादा कर्ज देने की स्थिति में होंगे। बैंकों का विलय एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक बैंकों को आपस में मिलाकर एक कर दिया जाता है। बैंकों का विलय होने के बाद बने एकीकृत बैंक, या तो अपने पुराने नाम से या फिर एक नए नाम के तहत काम कर सकते हैं।
इस विलय प्रक्रिया के बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या 12 रह जाएगी, जबकि साल 2017 में ये संख्या 27 थी। इस प्रक्रिया का मकसद देश में वैश्विक स्तर के मजबूत बैंक बनाना है।
पहले भी हो चुका है बैंकों का विलय
पूंजी की कमी
केंद्र सरकार को बैंकों के विलय की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि बैंकों के पास पूंजी की कमी अनुभव की जा रही है। बैंक पर्याप्त रूप से ऋण नहीं दे पा रहे थे। सरकार से बैंकों को 55 हजार 250 करोड़ रुपए की राशि मिलने पर अब बैंकों की ताकत बढ़ जाएगी और ये बैंक अब कम ब्याज दर पर ज्यादा राशि के लोन आसानी से दे पाएंगे।
योजनाओं के राशि वितरण में होगी आसानी
मजबूत सरकारी बैंकों से सरकारी योजनाओं के तहत पात्रताधारियों को दी जाने वाली राशि के वितरण में आसानी होगी। आज देश में करीब 36 करोड़ जन-धन खाते हो गए हैं। वहीं पिछली बार जब बैंकों का विलय हुआ, उसके उचित या सकारात्मक परिणाम मिले। इस बात को ध्यान में रखते हुए बैंकों का विलय किया गया।
विलय के बाद घटेगा एनपीए
सरकारी बैंक विलय के बाद मजबूत हो जाएंगी, तो इन बैंकों का एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट घट जाएगा। एनपीए को आम भाषा में कहें तो ऐसे कर्ज जो वसूल नहीं हो पाते हैं, उन्हें एनपीए कहा जाता है। दिवालिया होने वाले कारोबारों का निपटारा छोटे बैंक करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। बड़े बैंक मजबूती के साथ ऐसी स्थितियों को हैंडल कर पाते हैं।
बैंकिंग खर्च होंगे कम
बैंकों के विलय के बाद धोखाधड़ी के गंभीर मामलों पर भी लगाम कसी जा सकेगी। मजबूत सरकारी बैंकों में बैंकिंग झटकों यानी आर्थिक उतार-चढ़ाव के झटकों को सहने की शक्ति होती है। वहीं धोखाधड़ी के मामलों को वह ताकत के साथ निपट सकती है। इसके अलावा छोटे बैंकों की परिचालन लागत ज्यादा होती है यानी इनके बैंकिंग खर्च ज्यादा होते हैं।
इसके पहले भी हुए हैं विलय
सरकार ने बैंकों के विलय की प्रक्रिया को वर्ष 2017 में शुरू किया था। वर्ष 2017 में भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकों– स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और भारतीय महिला बैंक का स्टेट बैंक के साथ एकीकरण किया गया था।
बैंकों के विलय के दूसरे चरण में सरकार ने जनवरी 2019 में देना बैंक और विजया बैंक का विलय बैंक ऑफ बड़ौदा में करने को स्वीकृति दी गई थी जोकि 1 अप्रैल, 2019 से प्रभाव में आया। यह वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है।
वित्त मंत्री द्वारा की गई अन्य घोषणाएं
बैंक प्रबंधन को निदेशक मंडल (Board of Directors) के प्रति जवाबदेह बनाने हेतु एक बोर्ड समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रबंध निदेशक सहित महाप्रबंधक और उससे उच्च रैंक वाले अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही बैंकों को एक मुख्य जोखिम अधिकारी की नियुक्ति करने का भी आदेश दिया गया है। मुख्य जोखिम अधिकारी की नियुक्ति बाजार के अनुकूल पारितोषिक पर की जाएगी।
बैंक मर्ज होने से क्या और किसे फायदा
सरकार 50 खरब डॉलर यानी 350 लाख करोड़ रुपए की एक बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था का सपना लेकर चल रही है। इसका फायदा यह होगा कि जब देश की बैंकें मजबूत होंगी तो उनकी भूमिका भी अहम रहेगी। क्योंकि इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं है। बैंकों के विलय से ग्राहक को यह फायदा यह मिलेगा कि बड़ी बैंकों की सर्विस, सुविधाएं, पारदर्शिता, तेज कार्यप्रणाली होती है। साथ ही सरकार की सारी योजनाओं का क्रियान्वयन बैंकों के माध्यम से त्वरित होगा।
छोटे बैंकों की भूमिका
अब कुल 12 राष्ट्रीय बैंक बचे हैं। लेकिन अभी भी ऐसी संभावना है कि सरकार अभी कुछ और बैंकों को भी भविष्य में मर्ज कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार लक्ष्य 8 से 10 राष्ट्रीय बैंक रखना है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाले नाबार्ड और अन्य सहकारी बैंकों को भी अपना प्रदर्शन सुधारना होगा।
देश में रोजगार पर क्या असर पड़ेगा
बैंकों के मर्ज होने से सर्विस सेक्टर को काफी मदद मिलेगी। व्यापार बढ़ेगा, औद्योगिक क्षेत्र को भी फायदा होगा। क्योंकि बड़ी बैंक ज्यादा सरलता से और बड़ी राशि के ऋण देंगी। लोग व्यापार में लोन का पैसा लगाएंगे, इससे रोजगार बढ़ेंगे। जानकारों के अनुसार दुनिया के जिन देशों में सरकारी बैंक मजबूत किए गए हैं, वहां रोजगार बढ़े हैं। इस अनुभव के आधार पर भी कहा जा सकता है कि सर्विस सेक्टर को लाभ मिलेगा।
नई तकनीक से काम करना होगा
बैंकों के विलय के बाद बैंक कर्मचारियों को अब नई तकनीक के साथ काम करना होगा। इसके लिए उन्हें तैयार रहना होगा, क्योंकि अब बैंकिंग सेक्टर में तेजी से प्रशासनिक सुधार भी होंगे। बैंक सुधार के लिए वर्ष 1991 में एमएल नरसिंहम समिति बनी थी। इस समिति ने अपनी अनुशंसाओं में तब कहा था कि 10 राष्ट्रीयकृत बैंक होना चाहिए। इनमें से 3 से 4 बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर के होने चाहिए। उनकी संकल्पना अब जाकर आकार ले रही है।
कितने बैंकों का विलय हो चुका?
जनवरी 2019 में सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक के विलय को मंजूरी दी थी। इससे पहले साल 2017 में सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक में 5 सहयोगी बैंकों- स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के साथ ही भारतीय महिला बैंक का भी विलय कर दिया था।
आरबीआई के पास सरप्लस फंड
आरबीआई ने सरकार को मंदी से निपटने के लिए 1.76 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। ऐसा देश की आजादी के बाद पहली बार हुआ है। रिजर्व बैंक द्वारा राशि देने का कारण यह है कि सरकार पूंजी बाजार में पैसे की तंगी का सामना कर रही है। आरबीआई के पास रिजर्व फंड में यह राशि रहती है, जिसे रिजर्व सरप्लस फंड कहा जाता है। आरबीआई के पास करीब 9.6 लाख करोड़ रुपए का सरप्लस फंड है। इनमें से केवल 18 फीसदी ही सरकार को दिया है।
बैंक खातों पर इसका क्या असर होगा?
बैंकों के विलय का सीधा असर बचत खाता, चालू खाता और अन्य तरह के खातों पर होगा। विलय की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन खाताधारकों को बैंक जाकर अपनी मौजूदा पासबुक को नई पासबुक से बदलवाना होगा। सरकार ने विलय में शामिल सभी बैंकों को इस बात को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि विलय प्रक्रिया के दौरान बैंकिंग सेवाओं में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
क्या बैंकों के अकाउंट नंबर बदल जाएंगे?
विलय होने वाले बैंकों के अकाउंट नंबर में अगर बराबर अंक रहे तो अकाउंट नंबर शायद नहीं बदले। लेकिन खाता नंबरों के अंकों की संख्या में फर्क होने पर उनमें निश्चित रूप से बदलाव होगा।क्या ब्रांच भी बदल जाएंगी?
विलय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें शामिल बैंकों में से किसी एक बैंक की ब्रांच किसी इलाके में एक से ज्यादा पाई जाती हैं तो कुछ ब्रांच बंद हो सकती हैं। वहीं अगर बैंकों की एक शहर में आसपास ब्रांच हैं तो उन्हें भी मर्ज किया जाएगा।
पुरानी चेकबुक का क्या होगा?
विलय प्रक्रिया के बाद इसमें शामिल 10 में से 6 बैंकों के नाम बदल जाएंगे और पुराने बैंक के नाम वाली चेकबुक भी निरस्त हो जाएगी। उसकी जगह पर नई चेकबुक जारी की जाएगी। हालांकि ऐसा करने के लिए छह महीने का वक्त दिया जाएगा।
क्या बैंक का IFSC भी बदलेगा?
विलय होने वाले बैंकों की अलग-अलग ब्रांचों के IFSC (इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड) नंबर तुरंत प्रभावित तो नहीं होंगे, लेकिन विलय प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात उनमें निश्चित रूप से बदलाव होगा और वे पूरी तरह बदल जाएंगे।
पुराने डेबिट और क्रेडिट कार्डों का क्या होगा?
विलय में शामिल अलग-अलग बैंकों की ओर से ग्राहकों को जारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर इस प्रक्रिया का कोई असर नहीं होगा और वे पहले की तरह काम करते रहेंगे। हालांकि एकीकृत बैंक चाहें तो नई ब्रांडिंग के तहत ग्राहकों को नए डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी कर सकते हैं।
एफडी और आरडी पर क्या असर पड़ेगा?
बैंकों के एकीकरण का असर उनके द्वारा विभिन्न जमा योजनाओं पर दी जा रही ब्याज दर पर भी पड़ेगा। विलय से पहले के ग्राहकों की एफडी-आरडी ब्याज दरों पर तो फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन नए ग्राहकों के लिए ब्याज दरें एकीकरण के बाद बने बैंक वाली और एक जैसी होंगी।
क्या ऋण दरों में किसी तरह का बदलाव होगा?
ब्याज दरों की तरह ही पहले से चल रहे विभिन्न तरह के लोन जैसे होम लोन, व्हीकल लोन, एजुकेशन लोन, पर्सनल लोन और गोल्ड लोन की पुरानी दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।
क्या बैंक डिटेल्स अलग-अलग जगह पर अपडेट कराना होगी?
विलय से प्रभावित होने वाले बैंक के ग्राहकों को अपने नए अकाउंट नंबर और IFSC की डिटेल्स इनकम टैक्स, इंश्योरंस कंपनी, म्यूचुअल फंड सहित सभी जगह अपडेट करना होंगी। एसआईपी और ईएमआई में भी ब्योरा अपडेट करना होगा।