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बैंकों के विलय से अर्थव्यवस्था और बैंकिंग पर क्या होगा असर, जानें हर सवाल का जवाब

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 03 Sep 2019 10:55 AM IST
ऐसे समझिए विलय को
ऐसे समझिए विलय को - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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खास बातें

  • केंद्र सरकार ने 10 बैंकों के विलय का फैसला किया, कुल सरकारी बैंकों की संख्या अब 12 रह जाएगी
  • इस फैसले के परिणामस्वरूप देश के बड़े सार्वजनिक बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता करने में सक्षम हो जाएंगे।
  • देश की बैंकिंग प्रणाली भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में योगदान दे सकेगी।
पिछले साल बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ हुए देना बैंक और विजया बैंक के सफलतापूर्वक विलय के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था की गति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय करने की घोषणा की है। बैंकों का विलय करके चार बड़े बैंक बनाए जाएंगे। इस विलय से सरकार, कारोबार और आम बैंक ग्राहकों पर क्या और कैसा प्रभाव पड़ेगा। केंद्र सरकार के इस कदम के परिणामस्वरूप देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks-PSBs) की कुल संख्या 18 से घटकर 12 हो जाएगी।

किन बैंकों का होगा विलय?

1. ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (Oriental Bank of Commerce) तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (United Bank of India) का विलय पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) में।

  • विलय के पश्चात् पंजाब नेशनल बैंक भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्रक बैंक बन जाएगा।
  • इसके अतिरिक्त बैंक शाखाओं के मामले में भी यह बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक होगा, जिसकी 11,437 शाखाएं होंगी।
  • तीनों बैंकों के विलय के पश्चात् पंजाब नेशनल बैंक का कुल कारोबार 17.95 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा।

2. सिंडिकेट बैंक (Syndicate Bank) का विलय केनरा बैंक (Canara Bank) में।

  • इस विलय के पश्चात् केनरा बैंक देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।
  • इस बैंक का कुल कारोबार 15.20 लाख करोड़ रुपए का होगा एवं इसकी कुल शाखाओं की संख्या 10,342 हो जाएगी।

3. आंध्रा बैंक (Andhra Bank) तथा कॉर्पोरेशन बैंक (Corporation Bank) का विलय यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) में।

  • विलय के पश्चात् यूनियन बैंक ऑफ इंडिया देश का पाँचवां सबसे बड़ा बैंक होगा।
  • इसका कुल कारोबार 14.59 लाख करोड़ रुपए का होगा एवं इसकी कुल शाखाओं की संख्या 9,609 होगी।

4. इलाहाबाद बैंक (Allahabad Bank) का विलय इंडियन बैंक (Indian Bank) में।

  • विलय के पश्चात् यह देश का सातवां सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।
  • इसका कुल कारोबार 8.08 लाख करोड़ रुपए का होगा एवं इसकी शाखाओं की कुल संख्या 6,104 होगी।

विलय के कारण

केंद्र सरकार के अनुसार, देश के 10 बैंकों का विलय करने से बैंकों के कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी और उनका तुलन-पत्र (Balance sheet) भी मजबूत होगी। इस फैसले के परिणामस्वरूप देश के बड़े सार्वजनिक बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता करने में सक्षम हो जाएंगे। देश की बैंकिंग प्रणाली भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में योगदान दे सकेगी।
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सरकार का मानना है कि इस कदम से बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी और वे ज्यादा कर्ज देने की स्थिति में होंगे। बैंकों का विलय एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक बैंकों को आपस में मिलाकर एक कर दिया जाता है। बैंकों का विलय होने के बाद बने एकीकृत बैंक, या तो अपने पुराने नाम से या फिर एक नए नाम के तहत काम कर सकते हैं।

इस विलय प्रक्रिया के बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या 12 रह जाएगी, जबकि साल 2017 में ये संख्या 27 थी। इस प्रक्रिया का मकसद देश में वैश्विक स्तर के मजबूत बैंक बनाना है।
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पहले भी हो चुका है बैंकों का विलय

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