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सावधान: एप्स के जरिए हो रही धोखाधड़ी, खाली हो रहे लोगों के बैंक खाते
Mon, 21 Sep 2020 12:27 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Mon, 21 Sep 2020 12:27 PM IST
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बैंक फ्रॉड
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किसी फ्रॉड से बचने के लिए बैंक अपने ग्राहकों को समय-समय पर सलाह देते रहते हैं। बैंक ग्राहकों को अक्सर सलाह दी जाती है कि वे अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर या ओटीपी किसी से साझा ना करें। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कड़े नियमों के बावजूद बैंकों में धोखाधड़ी हो ही जाती है। जालसाज आम लोगों को लूटने का कोई न कोई तरीका ढूंढ लेते हैं। डिजिटल लेनदेन ग्राहकों के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ उनके लिए खतरा भी है।
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देश में तकनीक के बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है। आए दिन साइबर क्राइम की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें लोगों के खातों से लाखों रुपये उड़ा लिए जाते हैं।
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बिना ओटीपी के हो रहा आर्थिक अपराध
अब धोखाधड़ी ने लिए एक और तरीका निकाल लिया गया है, जिसमें जालसाज बिना ओटीपी नंबर जाने ही आर्थिक अपराध को अंजाम दे रहे हैं। इसके लिए वे लोगों की मदद करने के बहाने किसी तरह एप डाउनलोड कराते हैं और उसी के जरिए सारी जानकारी चुराकर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।
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एप के जरिए ऐसे हो रही धोखाधड़ी
गूगल प्लेस्टोर पर मौजूद एप के जरिए ठगी की जा रही है। एप के जरिए पहले कर्ज की पेशकश की जाती है और फिर एप्लीकेशन फी के लिए 100 से 400 रुपये तक की रकम मांगते हैं, जिसके बाद उपयोगकर्ताओं को अन्य एप पर भेज दिया जाता है। इसके बाद शुल्क के रूप में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं, लेकिन कर्ज नहीं मिलता। अब तक ऐसे घोटाले लाखों लोगों के साथ हो चुके हैं, जिनसे करीब 15 करोड़ रुपये लूट लिए गए हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- हालांकि असली और नकली एप में अंतर करना आसान होता है। इसके लिए आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
- कोई भी असली एप अग्रिम शुल्क नहीं मांगती है। ज्यादातर वित्तीय कंपनियों या कर्जदाताओं द्वारा कर्ज की राशि से ही प्रोसेसिंग फी, आदि काट ली जाती है।
- लोन एप्लीकेशन से पहले देख लें कि कर्जदाता का कोई पता उपलब्ध है या नहीं। अगर ऐसा नहीं है, तो संभव है कि वो आपका पैसा लेकर भाग जाए।
- आपको हमेशा बैंक के अधिकृत मोबाइल एप का ही इस्तेमाल करना चाहिए।