एजीआर मामला: वसूली के लिए दूरसंचार मंत्रालय जब्त कर सकता है वोडा आइडिया की बैंक गारंटी
बकाया एजीआर भुगतान पर सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने एक बार फिर सरकार से गुहार लगाई है। बिड़ला ने मंगलवार को दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश से मुलाकात कर कंपनी का संचालन जारी रखने के विकल्पों पर मंथन किया।
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सचिव से मुलाकात के बाद बिड़ला ने कहा, फिलहाल मौजूदा हालात में मैं कुछ भी कहने की स्थिति मेें नहीं हूं। माना जा रहा है कि बैठक में वोडा आइडिया की बैंक गारंटी बचाने पर चर्चा हुई है। दूरसंचार विभाग (डॉट) ने 14 फरवरी को कंपनियों को जारी नोटिस में कहा था कि अगर तय समय तक बकाया सांविधिक सकल राजस्व (एजीआर) का भुगतान नहीं किया गया, तो उनकी बैंक गारंटी भुनाकर नकद जमानत में बदल दी जाएगी।
इसके लिए ने एटॉर्नी जनरल से सलाह-मशविरा भी मांगा है। इस नोटिस के बाद वोडा आइडिया ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट मेें 2,500 करोड़ के तत्काल भुगतान के बदले बैंक गारंटी बचाने की गुहार लगाई थी और सरकार को इस पर कदम नहीं बढ़ाने के लिए नोटिस जारी करने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था।
कंपनी ने अब तक चुकाया सिर्फ 5 फीसदी बकाया
एजीआर भुगतान मुद्दे पर सबसे ज्यादा मार झेल रही वोडा आइडिया राहत पाने के लिए हर तरह की जुगत आजमा रही है, जबकि कंपनी ने अभी तक कुल बकाए के एवज में 5 फीसदी से भी कम राशि का भुगतान किया है।
वोडा आइडिया ने सोमवार को दूरसंचार विभाग को 2,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया और 1,000 करोड़ रुपये शुक्रवार 21 फरवरी तक देने का वादा किया है। कुमार मंगलम बिड़ला ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि अगर एजीआर पर कोई राहत नहीं मिलती है, तो वोडा आइडिया की कहानी खत्म हो जाएगी।
एजीआर डिफॉल्ट पर मुश्किल में आ जाएंगे बैंक और सरकार
दूरसंचार क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि एजीआर भुगतान मामले में दूरसंचार कंपनियां चूक करती हैं, तो इसका असर बैंक और राजकोषीय घाटे पर भी होगा। करीब 13 हजार कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रोजगार देने वाली वोडा आइडिया पर 27.17 हजार करोड़ रुपये का बैंक कर्ज लदा है।
ऐसे में कंपनी डूबती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर होगा, जो पहले ही 11 साल में सबसे सुस्त रफ्तार से चल रही है। सलाहकार फर्म मोतीलाल ओसवाल के शोध विश्लेषक अलीअसगर शाकिर ने कहा, इस बड़े डिफॉल्ट से भारत का राजकोषीय घाटा 0.40 फीसदी बढ़ जाएगा, जो सरकारी खजाने को 1 लाख करोड़ रुपये चपत लगाएगा। इसका असर बैंकिंग क्षेत्र पर भी होगा, जो पहले से ही 10 लाख करोड़ से ज्यादा के एनपीए से जूझ रहा है।