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मार्च 2019 तक सड़क पर होंगी 10 हजार ई-कारें, कंपनी ने गेल गैस लिमिटेड से किया करार

Mon, 19 Nov 2018 07:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 19 Nov 2018 07:50 AM IST
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10 thousand e-cars will be on the road till March 2019

एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) अब इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। कंपनी मार्च, 2019 तक करीब 10 हजार ई-कारें सड़कों पर उतारने वाली है। साथ ही होटल, मॉल, कॉरपोरेट अस्पतालों, एयरपोर्ट, इंटीग्रेटेड कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और डेटा सेंटरों आदि में कंबाइंड हीट एंड पावर जनरेशन की सुविधा भी शुरू करने के लिए कंपनी ने गेल गैस लिमिटेड से करार किया है। कंपनी की गतिविधियों और भविष्य की योजना पर शिशिर चौरसिया ने ईईएसएल के एमडी सौरभ कुमार से बातचीत की।

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केंद्र ने ई-वाहनों की आउटसोर्सिंग और आपूर्ति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ईईएसएल को सौंपी है। ई-वाहन परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?

ईईएसएल के पास इस समय 13,000 इलेक्ट्रिक कारों का ऑर्डर है। कंपनी ने टाटा मोटर्स और महिंद्रा को इनके निर्माण का ऑर्डर दिया है। मान कर चलिए कि 31 मार्च, 2019 तक आठ से 10 हजार ई-कारें सड़कों पर उतार दी जाएंगी। वर्तमान में सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में ही 300 ई-कारें सड़कों पर दौड़ रही हैं। 250 ई-कारों का रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस चल रहा है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में 1,000 ई-कारें सड़कों पर दौड़ रही हैं या फिर रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस में हैं। कुछ अन्य राज्यों में भी 300 से 400 ई-कारें चल रही हैं। ईईएसएल को आंध्र प्रदेश से ही 10 हजार ई-कारों का ऑर्डर मिला है। महाराष्ट्र, गुजरात और रेलवे से भी 1,000-1,000 ई-कारों का ऑर्डर मिला है।
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एक बार बैट्री चार्ज करने से ईईएसएल द्वारा उपलब्ध कराई जा रहीं कारें कितनी दूरी तय करेंगी? इसके बैट्री रिचार्ज की क्षमता कितनी है? 

वर्तमान में उपलब्ध कराई जा रहीं कारों में 15 किलोवाट की बैट्री लगी है। इसे एक बार चार्ज करने पर 130 किमी की दूरी तय की जा सकती है। देखा जाए तो यह पर्याप्त है क्योंकि फिलहाल हम सरकारी दफ्तरों में ही ई-कारों की आपूर्ति कर रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में एक दिन में कोई भी कार औसतन 80 से 100 किमी की दूरी ही तय करती है। बैट्री रिचार्ज क्षमता की जहां तक बात है तो यदि उसे जीरो से 100 फीसदी चार्ज किया जाए तो 3,000 बार रिचार्ज हो सकता है। जीरो से 100 फीसदी चार्ज का मतलब बैट्री के पूरी तरह से डिस्चार्ज होने के बाद उसे फुल चार्ज करना। मान कर चलिए कि सरकारी दफ्तर साल में 300 दिन खुलते हैं। इस हिसाब से फैक्ट्री फिटेड बैट्री  से ही कार 10 साल आराम से चलेगी।
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आपको नहीं लगता कि एक बार बैट्री चार्ज करने पर 130 से ज्यादा किमी ई-कारें चलतीं तो ज्यादा अच्छा होता?

बैट्री को एक बार चार्ज करने के बाद ई-कारों को ज्यादा दूरी तय करने में कोई दिक्कत नहीं है। ऐसा भी संभव है कि शक्तिशाली बैट्री के जरिए एक बार चार्ज करने पर 500 किमी की दूरी तय कर लें। लेकिन बात फिर आकर कीमत पर अटक जाती है। इतनी शक्तिशाली बैट्री लगाने पर ई-कारों की कीमत कई गुना बढ़ जाएगी।

ईईएसएल ने कुछ साल पहले उजाला योजना के तहत एलईडी बल्ब का वितरण शुरू किया था। अब तक की क्या उपलब्धि है?

ईईएसएल ने 2013 में उजाला योजना की शुरुआत की थी। जनवरी, 2014 में सात वॉट और 85 ल्यूमिन प्रति वॉट वाला एलईडी बल्ब हमें 310 रुपये में मिल रहा था। आज उसकी कीमत घटकर महज 39.15 रुपये पर आ गई है। एलईडी बल्ब भी नौ वॉट का हो गया है। उसकी रोशनी भी 100 ल्यूमिन प्रति वॉट से ज्यादा है। पिछले सप्ताह तक करीब 31.35 करोड़ बल्ब का वितरण किया जा चुका है। इससे बिजली की बचत की बात करें तो 8,000 मेगावॉट बिजली की बचत हो रही है। यह योजना इस समय देश के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है। इसी के मद्देनजर 77 करोड़ एलईडी बल्ब वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में 20 वॉट वाले ट्यूबलाइट का वितरण भी शुरू किया गया है। तीन साल की गारंटी वाले इस ट्यूबलाइट की कीमत 220 रुपये है। अब तक 67.26 लाख से भी ज्यादा ट्यूबलाइट का वितरण हो चुका है।

ईईएसएल ने हाल ही में गेल गैस लिमिटेड से समझौैता किया है। इसका मकसद क्या है?

आप अक्सर देखते होंगे कि बड़े होटलों, मॉल, बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों, एयरपोर्ट, व्यावसायिक एवं सरकारी भवनों, इंटीग्रेटेड कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, शैक्षिक संस्थानों और डेटा सेंटर आदि में कंबाइंड हीट एंड पावर जनरेशन के लिए बिजली की जरूरत पड़ती है। इसमें काफी बिजली की खपत होती है। हमने ऐसे स्थानों पर प्राकृतिक गैस के उपयोग से भवनों की कूलिंग, हीटिंग और वहां गर्म पानी की आपूर्ति के लिए सुविधा मुहैया कराना तय किया है। इसी के लिए ईईएसएल ने इंस्पायर-2018 कॉन्फ्रेंस के दौरान गेल गैस लिमिटेड से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए समझौता किया है। इससे बिजली की खपत घटेगी और ईईएसएल को कार्बन क्रेडिट भी मिलेगा।

ई-वाहन परियोजना की सबसे बड़ी बाधा आपकी नजर में क्या है? 

ई-वाहन परियोजना की सबसे बड़ी बाधा बैट्री की कीमत है। वर्तमान में आप देखें तो एक ई-कार की कीमत में 60 से 65 फीसदी कीमत सिर्फ बैट्री की होती है। यदि कोई ई-बस खरीदना चाहता है तो उसे काफी पूंजी निवेश करना होगा क्योंकि एक ई-बस की कीमत में चार से पांच साधारण ईंधन या सीएनजी से चलने वाली बसें आ जाती हैं। इसके अलावा बैट्री चार्जिंग स्टेशन भी परेशानी का सबब है। कारें बनाने वाली कंपनियां भी कहती हैं कि भारत में पर्याप्त बैट्री चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं। हालांकि, मुझे लगता है कि इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है। बैट्री चार्जिंग स्टेशन के मानकों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि बैट्री चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। 


13,000 ई-कारों के निर्माण का ऑर्डर टाटा मोटर्स और महिंद्रा को दिया गया है। दिल्ली-एनसीआर में 300 और कुछ राज्यों में 300 से 400 ई-कारें सड़कों पर दौड़ रही हैं। ईईएसएल को आंध्र प्रदेश से ही 10 हजार, महाराष्ट्र, गुजरात और रेलवे से भी 1,000-1,000 ई-कारों का ऑर्डर मिला है। -सौरभ कुमार, एमडी, ईईएसएल

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