यहां रहता है कि एशिया का सबसे अमीर अरबपति, जानें भारत लिस्ट में है भी या नहीं
सिंगापुर पर आधारित इस फ़िल्म में शानदार मॉल्स दिखाए गए हैं जिनमें दुनियाभर के महंगे ब्रैंड का सामान रखा हुआ है। वैसे यह सच्चाई महज़ फ़िल्मी पर्दे तक ही सीमित नहीं है। चैरिटी संस्था ऑक्सफ़ेम के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमीर लोगों की संख्या उत्तरी अमरीका और यूरोप से ज़्यादा हो गई है। इस महाद्वीप में दुनियाभर के करोड़पति और अरबपति लोग बस रहे हैं।
अमीर और गरीब की खाई बढ़ रही है
दुनिया के सबसे अमीर अमेरिका में लेकिन।।।
फ़ोर्ब्स मैगज़ीन के अनुसार मेगा रिच यानी बेहद अमीर लोगों की संख्या में अभी भी अमरीका सबसे ऊपर है। वहां लगभग 585 करोड़पति हैं। लेकिन एशिया महाद्वीप का प्रमुख देश चीन भी अब अमरीका से ज़्यादा पीछे नहीं है। चीन में करोड़पतियों की संख्या 373 है।
वैसे अगर एशिया के सभी देशों में मौजूद करोड़पतियों को मिला लिया जाए तो यह संख्या 600 तक पहुंच जाती है, जो अमरीका से ज़्यादा है। यह जानकारी ऑक्सफ़ेम के ज़रिए सूसी ग्लोबल वेल्थ डेटाबुक 2017 में मौजूद आंकड़ों के विश्लेषण के बाद दी गई। साल 2008 से 2012 के बीच चीन की सालाना विकास दर 8 प्रतिशत से 11 प्रतिशत के बीच रही, जबकि इसी दौरान अमरीका और यूरोप में आर्थिक संकट बना हुआ था।
न्यूयॉर्क में केपजेमिनी कंपनी में मार्केट इंटेलीजेंस के डिप्टी हेड चिराग ठकराल इस बारे में कहते हैं, ''चीन और भारत जैसे बड़े देशों में जिस तरह से बाज़ार का विस्तार हुआ है, इससे पिछले कुछ सालों में इस पूरे इलाके का आर्थिक तंत्र मज़बूत हो गया है, इसके साथ-साथ जापान, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में भी बाज़ार विकसित हुए हैं।''
एशिया के अमीर कौन हैं?
वहीं, टॉप-30 में हांगकांग के ली का-शिंग और चीन के वांग जिआनलिन शामिल हैं। अगर एशिया महाद्वीप के अलग-अलग देशों में साल 2015 के मुकाबले अब संपत्ति में आई वृद्धि के प्रतिशत को देखें तो इंडोनेशिया में सबसे अधिक 14।3 प्रतिशत और थाईलैंड में 13।3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज़ की गई। चीन में यह प्रतिशत जहां 9।8 है तो वहीं भारत में 10 प्रतिशत है। इस आकलन में उन लोगों की संपत्ति शामिल की गई है जिनकी सालाना आय 10 लाख डॉलर से अधिक है।
भारत का हाल
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संपत्ति और उसके अधिकार के बीच बढ़ती असमानता की खाई को समझने के लिए गिनी गुणांक के आंकड़े को देखा जा सकता है। साल 1990 से 2014 के बीच इस पूरे इलाके में आर्थिक असमानता में गिनी गुणांक 0.37 से बढ़कर 0.48 हो गया। अर्थशास्त्र में गिनी गुणांक के तहत किसी देश की संपत्ति और उसका वहां की जनता में बंटवारे को मापा जाता है।
यह आंकड़ा जब 0 होता है तो पूरी तरह समानता मानी जाती है, वहीं यह आंकड़ा जब 1 हो जाता है तो पूरी तरह असामनता मान ली जाती है। इस तरह देखें तो एशिया-प्रशांत महाद्वीप में आर्थिक असमानता का आंकड़ा धीरे-धीरे 1 की तरफ बढ़ रहा है। अलग-अलग देशों के हिसाब से देखें तो साल 2015 में चीन में गिनी गुणांक 0.82 रहा, भारत में 0.88 रहा और पूरे महाद्वीप में यह 0.90 रहा।