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क्यों नहरों में फेंक दिए गए थे खराब हो चुके टायर? वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
Tue, 08 Sep 2026 12:48 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Tue, 08 Sep 2026 12:48 PM IST
सार
अमेरिका के साउथवेस्ट में नहरों को कंक्रीट से पक्का करने के बाद जलीय जीवों के लिए समस्या खड़ी हो गई। इसके बाद शोर्धकताओं ने बेकार पड़े टायरों से इसका हल निकाला।
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क्यों नहरों में फेंक दिए गए थे खराब हो चुके टायर? वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
- फोटो : AI
विस्तार
नहरों की मजबूती और पानी के रिसाव को रोकना के लिए कंक्रीट से पक्का किया जाता है, लेकिन इससे एक परेशानी खड़ी हो सकती है। अमेरिका के साउथवेस्ट में नहरों को कंक्रीट से पक्का किए जाने के बाद जलीय जीवन प्रभावित हुआ और मछलियों की संख्या घट गई। लेकिन कैलिफोर्निया और एरिजोना के शोधकर्ताओं ने इसका हल निकाल लिया। उन्होंने इसका हल पूराने और कबाड़ टायरों में खोज लिया था।
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दरअसल, इंजीनियरों ने नहरों को पक्का करने के बाद पानी का रुकना आसान कर दिया। ऐसे में पानी मिट्टी में घुला नहीं रहा था। पानी के अंदर वाले पेड़ पौधे खत्म हो गए और जलीय जीवों के प्रवास की जगहें भी चली गईं। इसका असर हुआ कि मछलियों की संख्या घटनी लगी।
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शोधकर्ताओं ने किया प्रयोग
यह समस्या सामने आने के बाद कैलिफोर्निया और एरिजोना के शोधकर्ताओं गॉर्डन मुलर और चार्ल्स आर. लिस्टन ने प्रयोग किया। उन्होंने 32 साल पहले कैलिफोर्निया केकोचेला नहर और एरिजोना के हेडन-रोड्स एक्वाडक्ट में प्रयोग किया। यह प्रयोग सफल हो गया और मछलियां लौटनें लगीं।
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टायरों को बनाया खाना और घर
इस प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने बेकार पड़े टायरों को बांधकर पानी में डाल दिया। इससे मछलियों को पानी के अंदर बनी चट्टानों का अहसास हुआ। इसमें शैवाल, कीड़े और दूसरे कीट जमा होने लगे। यह मछलियों के खाने के काम आने लगे। इससे साबित होता है कि इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन में कम खर्च से भी प्रभावी काम हो सकते हैं।
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शोधकर्ता यह जानना चाहते थे कि क्या कंक्रीट स्ट्रक्चर को बिना हटाए नहरों के माहौल को मछलियों के हिसाब से बदला जा सकता है। इसी बदलाव के तहत उन्होंने टायरों को चट्टान का रू दिया। मछलियों के ऐसे छोटे बदलाव भी बड़ी संभावना ला सकते थे। इसमें मछलियों और छोट जीवों को रहने के लिए घर मिल गया। हालांकि, यह भी नहीं कहा जा सकता है कि कंक्रीट वाली नहरें प्राकृतिक अहसास कराने लगीं थी।
टायरों की समस्या भी हुई खत्म
शोधकर्ताओं के 1994 में इस प्रयोग से टायरों की समस्या भी समाप्त हुई। दरअसल, बेकार हो चुके टायरों को हटाना बेहद कठिन था, क्योंकि इनको डिसपोज करना कठिन होता है। शोधकर्ता दावा नहीं करते हैं कि टायरों से हर इकोलॉजिकल परेशानी हल हो सकती है। सिर्फ यह प्रयोग कंक्रीट नहर को वापस से तोड़कर प्राकृतिक बनाने की जगह टायरों में समस्या का हल बताता है।