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आखिर पृथ्वी पर कहां से आया पानी? हैरान कर देंगे ये रहस्य
हमारी आकाशगंगा में कई खत्म हो रहे तारे होते हैं जो क्षुद्र ग्रह के अवशेष होते हैं। ठोस पत्थर के गोले के तौर पर ये किसी तारे पर गिर कर खत्म हो जाते हैं। तारों के वायुमंडल पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक क्षुद्र ग्रह पत्थर के बने होते हैं, लेकिन इनमें काफी पानी भी मौजदू होता है। इस नतीजे के आधार पर इस सवाल का उत्तर मिल सकता है कि पृथ्वी पर पानी कहां से आया?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हमारी आकाशगंगा में कई क्षुद्र ग्रह ऐसे होते हैं जिनमें काफी ज्यादा पानी है। यही पानी ग्रहों पर पानी की आपूर्ति करता है जीवन को आगे बढ़ाता है। ब्रिटेन की वॉरिक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता रोबर्तो राडी कहते हैं, 'हमारे शोध से पता चला है कि जिस तरह के ज्यादा पानी वाले क्षुद्र ग्रह की बात हो रही है, वैसे शुद्र गृह हमारे सौर मंडल में काफी ज्यादा संख्या में पाए जाते हैं।'
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हालांकि शोधकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि पृथ्वी पर पानी कहां से आया? काफी पहले पृथ्वी बहुत सूखा और बंजर इलाका रहा होगा। इसकी टक्कर किसी ज्यादा पानी वाले क्षुद्र ग्रह से हुई होगी और इसके बाद उस ग्रह का पानी पृथ्वी पर आया होगा।
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- फोटो : Pixabay
अपने इस शोध को विश्वसनीय बनाने के लिए राडी को ये दर्शाना था कि ज्यादा जल वाले क्षुद्र ग्रहों की मौजूदगी सामान्य बात है। इसके लिए उन्हें पुराने तारों के बारे में जानकारी की जरूरत पड़ी। जब तारा अपने अंत की ओर बढ़ता है तो वह सफेद रंग के बौने तारे में बदलने लगता है। उसका आकार भले छोटा हो जाता है लेकिन उसके गुरुत्वाकर्षण बल में कोई कमी नहीं आती है। वह अपने आस पास से गुजरने वाले क्षुद्र ग्रह और कॉमेट्स को अपने वायुमंडल में खींचने की ताकत रखता है।
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- फोटो : Pixabay
इन टक्करों से पता चलता है कि ये पत्थर किस चीज के बने हैं। ऑक्सीजन और हाइड्रोजन जैसे रासायनिक तत्व अलग अलग ढंग से रोशनी को ग्रहण करते हैं। राडी के शोध दल ने खत्म हो रहे तारों पर पड़ने वाली रोशनी के पैटर्न का अध्ययन किया है। कनेरी द्वीप समूह पर स्थित विलियम हर्शेल टेलीस्कोप की मदद से ये अध्ययन किया गया। राडी और उनके सहयोगियों ने 500 प्रकाश वर्ष दूर खत्म हो रहे तारों पर शोध किया। उन्होंने बिखरे हुए क्षुद्र ग्रहों के रासायनिक संतुलन को आंकने की कोशिश की। उन्होंने पाया कि उनमें पत्थर के अलावा पानी की बहुतायत है।
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