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26 सेकेंड्स के अंदर कर डाला ऐसा काम, सोशल मीडिया पर हीरो बना बिहार का ये नौजवान

Thu, 16 Aug 2018 04:40 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Thu, 16 Aug 2018 04:40 PM IST
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Watch How Kerala Floods Bihar Kanhaiya Kumar Saves Child Running On Bridge Before It Collapsed
Kanhaiya Kumar

बाढ़ के कारण केरल में जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है। एनडीआरएफ़ (नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट फ़ोर्स) के सदस्य कन्हैया कुमार इस आपदा की घड़ी में केरल में जाने-माने चेहरा बन गए हैं। जब केरल के इदुक्की ज़िले की पेरियार नदी में भीषण बाढ़ आई तो उसी वक़्त नदी के तट के पास एक पिता गोद में अपनी नवजात को लिए मदद की आस में खड़े थे। कन्हैया कुमार एनडीआरएफ़ में एक सिपाही हैं और वो उस पिता की गोद में नवजात को देखते ही दौड़ पड़े। कन्हैया ने उस नवजात को उनकी गोद से लेने में जरा भी देरी नहीं की।

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देखते ही देखते डूब गया पुल...

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वो उस नवजात को लेकर एक पुल की तरफ़ भागे। कन्हैया के पीछे-पीछे उस नवजात का पिता और बाक़ी लोग भी भागने लगे। ऐसा करने के लिए कन्हैया के पास बहुत वक़्त नहीं था, लेकिन उन्होंने कर दिखाया। कन्हैया ने बच्चे को निकाला ही था कि पुल बाढ़ के पानी में बह गया। पल भर में ही लगा कि वहां कोई पुल था ही नहीं और नदी समंदर की तरह दिखने लगी। इदुक्की में एनडीआरएफ़ के अधिकारियों का कहना है कि कन्हैया ने नवजात को सुरक्षित निकालने में महज 26 सेकंड का वक़्त लिया।

 

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'हर कोई मेरा परिवार है'

बीबीसी तमिल ने कन्हैया से बात की। कन्हैया अभी केरल में सोशल मीडिया के लिए सनसनी बने हुए हैं। कन्हैया कुमार बिहार के हैं। स्कूल की पढ़ाई ख़त्म करने के बाद ही कन्हैया ने नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। कन्हैया ने ग़रीबी के कारण यह फ़ैसला लिया था ताकि माता-पिता और तीन भाइयों वाले परिवार का खर्च चल सके। कन्हैया पिछले 6 महीने से एनडीआरएफ़ में हैं।
कन्हैया ने कहा, ''मैंने सरकारी नौकरी परिवार की मदद के लिए हासिल की। मेरे दो और भाई सेना में हैं। एक कश्मीर में है। हम लोगों की मुलाक़ात बड़ी मुश्किल से होती है। हमारे माता-पिता को अपने बेटे के काम पर गर्व है। केरल में जो भी बाढ़ की त्रासदी से प्रभावित हैं वो सारे मेरे परिवार हैं।'' केरल में बाढ़ की आपदा और राहत बचाव पर कन्हैया कुमार ने कहा, ''हमलोगों को पता था कि हम केरल में बाढ़ में फँसे लोगों को निकालने जा रहे हैं। जब हम यहां पहुंचे तो ऐसा लगा कि जो सोचकर आए थे उससे ज़्यादा करने की ज़रूरत है।''

''इदुक्की ज़िले में भूस्खलन सबसे ज़्यादा होता है। इस नदी में 26 साल बाद बाढ़ आई है। यहीं पर एक बस स्टॉप था जिसका नामो-निशान मिट गया है। नारियल की खेती भी बर्बाद हो गई है।''

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प्रकृति के साथ कोई भविष्यवाणी नहीं

एनडीआरएफ़ के एक और सदस्य कृपाल सिंह ने भी केरल में बाढ़ और राहत बचाव कार्य को लेकर बीबीसी तमिल से बात की। उन्होंने कहा, ''प्राकृतिक आपदा से जुड़ी ज़्यादातर भविष्यवाणियां ग़लत साबित होती हैं। हमलोग किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं। यही हमारा मंत्र भी है। कई जगहों पर तो तत्काल राहत पहुंचाना बहुत मुश्किल होता है। हमारे काम से लोगों के बीच उम्मीद जगी है। लोगों ने भी हमलोग के साथ काम करना शुरू कर दिया है।''

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