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रमजान पर खुद भूखा रहकर रोजाना भूखे लोगों को खाना खिलाता है ये शख्स, सलमान खान भी हैरान

Tue, 22 May 2018 08:07 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 22 May 2018 08:07 AM IST
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Azhar Maqsusi- feed poor people under flyovers in Hyderabad

फ्लाईओवर के नीचे थालियां लेकर चटाई पर बैठे बेघरों, भिखारियों और मजदूरों को रोज दोपहर किसी के आने का इंतजार रहता है। हैदराबाद के दबीरपुरा फ्लाईओरवर के पास 2012 से रोज यह नजारा देखा जा रहा है। ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरता है जब शहर के इस फ्लाईओवर के नीचे खड़ी इस भीड़ को दोपहर का खाना नहीं मिलता हो और यह आदमी उन्हें भोजन नहीं परोसता हो।

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यह आदमी कोई और नहीं बल्कि सैयद उस्मान अजहर मकसुसी हैं जिन्होंने पिछले छह साल से भूखों और जरूरतमंदों की भूख मिटाना अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है। इनका एक नारा है कि भूखों का कोई मजहब नहीं होता है। 
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चार साल की उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ जाने के पाद खुद भूखे रहने की पीड़ा झेल चुके अजहर भूखों का दर्द समझते हैं। इसलिए वह उनके कष्टों को दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते है।

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Azhar Maqsusi- feed poor people under flyovers in Hyderabad

इसी फ्लाईओवर के नीचे छह साल पहले एक दिन उन्हें एक बेघर औरत मिली जिनसे भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू करने की प्रेरणा मिली। 36 साल के अजहर ने उस वाकये को याद करते हुए कहा, 'लक्ष्मी भूख से छटपटा रही थी। वह बिलख-बिलख कर रो रही थी। मैंने उसे खाना खिलाया और तभी फैसला किया कि मेरे पास जो सीमित संसाधन है उससे मैं भूखों की भूख मिटाऊंगा।'

शुरुआत में उनकी पत्नी घर में ही खाना पकाती थीं और वह फ्लाईओवर के पास खाना लाकर भूखे लोगों को परोसते थे। बाद में उन्होंने वहीं खाना तैयार करना शुरू कर दिया। अजहर ने कहा, 'शुरुआत में 30-35 लोग यहां होते थे मगर आज 150 से ज्यादा हैं, जिन्हें मैं रोज खाना खिलाता हूं। अजहर की एक संस्था है जो अब इस काम का संचालन करती है। संस्था का नाम है 'सनी वेल्फेयर फाउंडेशन'। संस्था ने खाना पकाने के लिए दो रसोइयों को रखा है।'

तीन साल पहले उन्होंने यहां के अलावा सिकंदराबाद स्थित गांधी अस्पताल में भी भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू कर दिया। फाउंडेशन की वैन में रोज 150-200 लोगों का खाना यहां से जाता है। फाउंडेशन कुछ एनजीओ के साथ मिलकर बेंगलूरू, गुवाहाटी, रायचूर और तांदुर शहर में रोजाना आहार कार्यक्रम का संचालन करता है।

Azhar Maqsusi- feed poor people under flyovers in Hyderabad

अजहर को खुशी है कि जो काम उन्होंने अकेले शुरू किया था आज उसके साथ कारवां सज गया है और अनेक लोग व संगठन उनके काम से प्रेरित हुए हैं। अजहर को इससे अपनी कामयाबी का अहसास होता है। हालांकि उनका मानना है कि सपना तभी साकार होगा जब इस देश से और दुनिया से भूख मिट जाएगी। भूख नाम की कोई चीज नहीं होनी चाहिए।

दबीरपुरा फ्लाईओवर के पास उनकी प्लास्टर ऑफ पेरिस की दुकान है जहां वह हर दिन सुबह और शाम कुछ घंटे बिताते हैं। उन्होंने कहा, 'बाकी समय मैं दोनों जगहों पर भोजन की व्यवस्था में लगा रहता हूं। अजहर को इस काम में उनके भाई और परिवार के अन्य सदस्यों के अलावा कुछ कार्यकर्ता वीकऐंड में उनका हाथ बंटाते हैं।

बॉलीवुड अभिनेता सलमान ने अपने कार्यक्रम 'बीइंग ह्यूमन' में हिस्सा लेने के लिए मुंबई बुलाया था। उनका चयन देशभर के छह ऐसे लोगों में किया गया था, जो वास्तविक जीवन में नायक हैं। अजहर ने सलमान के साथ बातचीत की और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई।

Azhar Maqsusi- feed poor people under flyovers in Hyderabad

इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता अजहर 'आज की रात है जिंदगी' में शामिल हुए थे जिसकी मेजबानी मेगास्टार अमिताभ बच्चन कर रहे थे। विभिन्न संगठनों ने भी उनको सम्मानित किया है। हालांकि अजहर आज भी जमीन से जुड़े हैं और कहते हैं, 'मुझे कोई दफ्तर या कर्मचारी की जरूरत नहीं है। मेरे लाइफस्टइाल में कोई बदलाव नहीं आया है।'

अजहर किसी से पैसे नहीं मांगते हैं। उन्होंने कहा, 'जो लोग चावल और दाल लेकर आते हैं उनका दान मैं स्वीकार कर लेता हूं। मैं किसी से नकद में पैसे नहीं लेता बशर्ते कि दानदाता चावल या दाल देने की स्थिति में न हो।'

अजहर के पिता ऑटो चलाते थे। उन्होंने कहा, 'जब मैं महज चार साल का था तभी मेरे पिता चल बसे। चार भाई-बहनों में मैं तीसरे नंबर पर हूं।'  उन्होंने पांचवी कक्षा में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और मजदूरी करने लगे थे।

अजहर को सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां से मिली। वह मानते हैं कि अल्लाह ही गरीबों के लिए उनके मार्फत भोजन की व्यवस्था करता है। अजहर ने कहा, 'मैं यह नहीं देखता कि कौन खाने को आ रहा है। मैं बस यही जानता हूं कि सभी भूखे हैं। यही उनका ठिकाना है। दाने दाने पे लिखा है खाने वाले का नाम।'

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