हिम्मत हो तो चखकर देखें इंसानी मल से बनी वाइन
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इससे पहले कभी आपने इंसानी मल से बनने वाली वाइन के बारे में सुना? वाइस डॉट कॉम के मुताबिक कोरिया में ये वाइन बनाई जाती है। कहते हैं ना सिर्फ स्वाद बल्कि सेहत की नजरों से भी ये वाइन काफी फायदेमंद होती है।
कोरिया में भी आज के जमाने के काफी कम लोग ही अपने देश की इस चीज के बारे में कोई जानकारी रखते हैं। कोरियाई भाषा में इस वाइन का टॉन्गसुल कहते हैं।
इस वाइन को बनाने की कला कम ही जानकर जानते हैं। वो कहते हैं कि चार से सात-आठ साल तक के बच्चों के मल में बदबू नहीं होती। मल कई बीमारियों को दूर रखने की क्षमता रखता है।
चावल और खमीर के साथ मिलाते हैं
इस वाइन को बनाने के लिए सबसे पहले बच्चों के मल को खमीर में मिलाकर सड़ने के लिए रख दिया जाता है। एक दिन बाद इस घोल में चावल को मिलाया जाता है और फिर से खमीर डालकर सड़ने के लिए रख दिया जाता है।
इसमें कुछ नौ प्रतिशत एल्कोहोलिक कंटेन्ट या तत्व को डाला जाता है। तीन से चार दिनों बाद इसे निकाला जाता है और फिर कपड़े की छन्नी में छानकर इससे निकलने वाले पानी को वाइन का नाम दिया जाता है।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि वाकई इसे पीने के लिए कलेजा चाहिए। ये बहुत मुश्किल है।
है बहुत ही फायदेमंद
कोरियाई किताबों में टॉन्गसुल के बारे में काफी वर्णन हैं। कहते हैं कि इससे पीने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पेट भी साफ रहता है और किसी अन्य प्रकार की कोई बीमारी नहीं लगती है।
आम इंसानों को इसकी पूरी प्रक्रिया देखना और उसके पास बैठना बहुत ही चैलेंजिंग लग सकता है। पर यकीन मानिए, बन जाने के बाद से बदबू नहीं करता है। इसका थोड़ा सा कंटेन्ट भी फायदेमंद है।