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10वीं के छात्र ने ईजाद की साइलेंट हार्टअटैक पहचानने की तकनीक
amarujala.com {Presented by: पवन नाहर}
Updated Mon, 06 Mar 2017 03:27 AM IST
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हार्ट अटैक
- फोटो : NBC News
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तमिलनाडु के 10वीं के एक छात्र ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो ग्रामीण इलाकों के उन लोगों में हृदयाघात के खतरों की पहचान कर लेगी जिनमें आम तौर पर हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इस नई तकनीकी को ईजाद करने वाले दसवीं के छात्र आकाश मनोज इन दिनों ‘इनोवेशन स्कॉलर्स इन-रेजीडेंस प्रोग्राम’ के तहत राष्ट्रपति भवन में मेहमान के तौर पर ठहरे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के तहत नए आविष्कारकों, लेखकों और कलाकारों को एक हफ्ते से अधिक समय तक राष्ट्रपति भवन में रहने का मौका मिलता है। राष्ट्रपति भवन में चल रहे इस उत्सव में शामिल हुए आकाश मनोज ने बताया कि आजकल ‘साइलेंट हार्ट-अटैक’ आम हो गया है। लोगों में हृदयाघात से जुड़ा कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है।
देखने में भी ऐसे लोग स्वस्थ्य प्रतीत होते हैं, लेकिन उनमें यह बीमारी अचानक उभरती है। मेरे दादाजी भी एकदम स्वस्थ लगते थे लेकिन अचानक ही हार्ट-अटैक से उनका निधन हो गया। इसी घटना ने आकाश मनोज को बीमारी के खतरों का पता लगाने वाली नई तकनीक को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। यह तकनीक खून में एफएबीपी-3 नामक प्रोटीन की मौजूदगी के विश्लेषण पर आधारित है।
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एफएबीपी-3 की मात्रा दिल तक रक्त की आपूर्ति के बाधित होने का संकेत देती है। इसमें खून में एफएबीपी-3 नामक प्रोटीन की मात्रा का समय-समय पर विश्लेषण किया जाता है। अपनी ईजाद की गई तकनीक के बारे में बताते हुए आकाश मनोज ने कहा कि एफएबीपी-3 प्रोटीन सबसे छोटे प्रोटीनों में से एक है जो ऋणावेशित होने की वजह से धनावेश की ओर आकर्षित होता है। मेरी नई खोज इसी तकनीक पर आधारित है।
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उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के तहत नए आविष्कारकों, लेखकों और कलाकारों को एक हफ्ते से अधिक समय तक राष्ट्रपति भवन में रहने का मौका मिलता है। राष्ट्रपति भवन में चल रहे इस उत्सव में शामिल हुए आकाश मनोज ने बताया कि आजकल ‘साइलेंट हार्ट-अटैक’ आम हो गया है। लोगों में हृदयाघात से जुड़ा कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है।
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देखने में भी ऐसे लोग स्वस्थ्य प्रतीत होते हैं, लेकिन उनमें यह बीमारी अचानक उभरती है। मेरे दादाजी भी एकदम स्वस्थ लगते थे लेकिन अचानक ही हार्ट-अटैक से उनका निधन हो गया। इसी घटना ने आकाश मनोज को बीमारी के खतरों का पता लगाने वाली नई तकनीक को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। यह तकनीक खून में एफएबीपी-3 नामक प्रोटीन की मौजूदगी के विश्लेषण पर आधारित है।
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एफएबीपी-3 की मात्रा दिल तक रक्त की आपूर्ति के बाधित होने का संकेत देती है। इसमें खून में एफएबीपी-3 नामक प्रोटीन की मात्रा का समय-समय पर विश्लेषण किया जाता है। अपनी ईजाद की गई तकनीक के बारे में बताते हुए आकाश मनोज ने कहा कि एफएबीपी-3 प्रोटीन सबसे छोटे प्रोटीनों में से एक है जो ऋणावेशित होने की वजह से धनावेश की ओर आकर्षित होता है। मेरी नई खोज इसी तकनीक पर आधारित है।