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एक ऐसा खुफिया कोड, जो डिकोड न होता तो 'इंडिया गेट' पर हो गया होता आतंकी हमला

Fri, 14 Feb 2020 06:07 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 14 Feb 2020 06:07 PM IST
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How a jobless youth helped Delhi Police to crack a code and foil terror attack at India Gate
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

इंडिया गेट को सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि भारत की भी शान कहा जाता है। अगर आप साल 2003 से पहले से दिल्ली में रह रहे होंगे तो आपको पता होगा कि पहले इंडिया गेट पर कोई भी सुरक्षा नहीं होती थी। वहां न तो पुलिस के जवान होते थे और न ही सेना के। लोग आराम से इंडिया गेट के पास जा सकते थे, उसे हाथ से छू सकते थे। लेकिन 23 फरवरी, 2003 को सबकुछ बदल गया और अचानक वहां सेना के जवान तैनात हो गए, वो भी खतरनाक हथियारों के साथ। तब से लेकर आज तक वहां 24 घंटे जवानों की तैनाती रहती है। अब किसी भी आम नागरिक को इंडिया गेट छूने की अनुमति नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये सब क्यों हुआ और कैसे हुआ? तो चलिए ये कहानी विस्तार से आपको बताते हैं...

How a jobless youth helped Delhi Police to crack a code and foil terror attack at India Gate
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दरअसल, कश्मीर में साल 2002 में मारे गए एक आतंकी की डायरी के आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कई दिनों से एक ईमेल आईडी की जांच कर रही थी, जिसपर अजीबोगरीब मैसेज आ रहे थे और उस ईमेल से मैसेज भेजे भी जा रहे थे। हालांकि उस मैसेज से कुछ खास पता नहीं चल पा रहा था और चूंकि ईमेल भी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के साइबर कैफे से भेजे जा रहे थे, इसलिए पुलिस को भी उसे भेजने वाले को ढूंढने में परेशानी हो रही थी। लेकिन फिर भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उस ईमेल आईडी पर नजर बनाए हुए थी। इस मिशन को लीड कर रहे थे तत्कालीन एसीपी प्रमोद कुशवाहा। 

How a jobless youth helped Delhi Police to crack a code and foil terror attack at India Gate
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

13 फरवरी, 2003 को अचानक नेहा नाम से बनी एक ईमेल आईडी पर मैसेज आया, जिसने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को और भी चौकन्ना कर दिया। इस मैसेज में फुटबॉल और मैच का जिक्र किया गया था। यहां दिल्ली पुलिस को यह समझते देर नहीं लगी कि फुटबॉल का मतलब शायद बम हो सकता है और मैच का मतलब धमाका यानी आतंकी हमला। हालांकि यह धमाका कब होगा और कहां होगा, इसके बारे में उस मैसेज में कोई जिक्र नहीं किया गया था। इसी बीच 18 फरवरी को एक दूसरे ईमेल आईडी से एक दूसरे ईमेल आईडी पर मैसेज आया, जिसमें एक कोड लिखा हुआ था। बस फिर क्या था, एसीपी प्रमोद कुशवाहा की स्पेशल सेल की टीम उस कोड को डिकोड करने में जुट गई।

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How a jobless youth helped Delhi Police to crack a code and foil terror attack at India Gate
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

स्पेशल सेल की टीम ने दिन-रात एक कर दिया, फिर भी वो उस खुफिया कोड को डिकोड करने में नाकाम रही। इस दौरान कई क्रिप्टोलॉजिस्ट से भी मदद मांगी गई, लेकिन वो भी इस कोड को डिकोड करने में असफल रहे। दरअसल, क्रिप्टोलॉजिस्ट खुफिया कोड को डिकोड करने वाले विशेषज्ञ को कहा जाता है। चूंकि कोड डिकोड नहीं हो रहा था तो स्पेशल सेल की टीम तो परेशान थी ही, साथ ही साथ जिनके नेतृत्व में यह मिशन हो रहा था, वो एसीपी प्रमोद कुशवाहा भी परेशान थे।  

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How a jobless youth helped Delhi Police to crack a code and foil terror attack at India Gate
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

इसी बीच 19 फरवरी को प्रमोद कुशवाहा से मिलने के लिए उनके दफ्तर उनके स्कूल का एक दोस्त आया, जो बेरोजगार था। उसका नाम था विवेक ठाकुर। चूंकि प्रमोद कुशवाहा उस कोड को लेकर काफी परेशान थे, इसलिए विवेक के पूछने पर उन्होंने उस कोड के बारे में उसे बता दिया और कहा कि हमारी टीम इसे डिकोड ही नहीं कर पा रही है। अब यह बताने की देर थी कि विवेक उस कोड को डिकोड करने में जुट गया। उसने काफी मेहनत की और आखिरकार वह उस खुफिया कोड को डिकोड करने में सफल रहा। 

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